
Hindi Sahitya - Elove : ch-45 आखरी दांव
Quote of the Day ---
"In a moment of decision,
the best thing you can do is the right thing to do.
The worst thing you can do is nothing.
--- Theodore Roosevelt
... पुरी कहानी सुनाकर इन्स्पेक्टरने एक लंबी सांस ली. स्टेजपर इन्स्पेक्टर कंवलजित, अंजली, नेट सेक्यूराके डायरेक्टर और ऍन्कर खडे थे. पुरी कहानी खत्म होगई थी, फिरभी लोग अभीभी शांत थे. हॉलमें मानो शमशानसी चुप्पी फैली हुई थी. तभी अंजलीको हॉलके पिछले हिस्सेमें विवेक खडा हुवा दिखाई दिया. अंजलीने हात हिलाकर उसे स्टेजपर बुलाया. विवेकभी लगभग दौडते हूएही स्टेजपर गया. अंजलीने उसका हाथ अपने हाथमें लेकर उसे अपने पास खडा किया. अबतक जो सब लोग शांत थे वे अब तालियां बजाने लगे. और तालियाभी इतनी की मानो उन्होने सारा हॉल सरपर लिया हो. तालियां रुकनेका नाम नही ले रही थी.
अबभी विवेकका हाथ अंजलीके हाथमें कसकर पकडा हुवा था. अंजलीने दुसरा हाथ दिखाकर लोगोंको शांत रहनेका इशारा किया और वह माईक हाथमें लेकर बोलने लगी -
'' हमारा प्रेम... यां यू कहिए ... हमारा इ - लव्ह ... लगा था कमसे कम इसमें तो बाधाएं नही आयेंगी .. लेकिन ऐसा लगता है की प्यार की राहमें हमेशा बाधाए आती है ...''
अंजलीने हॉलमें सब तरफ अपनी नजरे घुमाई और वह विवेकका हाथ और कसकर पकडते हूए आगे बोली, '' ... लेकिन कुछभी हो ... आखिर जित प्यारकीही होती है ''
लोगोंने तालिया बजाते हूए फिरसे पुरा हॉल मानो अपने सरपर उठा लिया.
अब विवेकने माईक अपने हाथमें लिया और लोगोंको शांत रहनेका इशारा करते हूए वह बोला,
"" हमारे दोनोके प्रेमकहानीसे आप लोग एक सिख जरुर ले सकते है की ... '' एक क्षण स्तब्ध रहकर वह आगे बोला, '' की बुरेका अंत आखिर बुरेमेंही होता है ...''
फिरसे लोगोंने तालियां बजाकर मानो उसके कहनेको अपनी सहमती दर्शाई. तभी एक कंपनीका आदमी स्टेजके पिछले हिस्सेसे स्टेजपर आ गया. उसकी चारो ओर घुमती हूई आंखे स्टेजपर किसीको ढूंढ रही थी. आखिर उसे कंपनीके मॅनेजिंग डायरेक्टर भाटीयाजी दिखतेही वह उनके पास गया और उनके कानमें कुछ बोलने लगा. वह जोभी बोल रहा था वह सुनकर भाटीयाजींके चेहरेपर अचानक हडबडाहट, आश्चर्य और डरके भाव दिखने लगे. उनके चेहरेपर वे भाव देखकर स्टेजपर उपस्थित बाकी लोगोंके चेहरेपरभी भाव बदल गए थे. स्टेजपर जो हल्का फुल्का खुशीका माहौल था वह एकदमसे तनावमें बदल गया था. उस कंपनीके आदमीने भाटीयाजीको सब बतानेके बाद भाटीयाजीने स्टेजपर इधर उधर देखा और वे इन्स्पेक्टर कंवलजितकी तरफ बढने लगे.
अब भाटीयाजी इन्स्पेक्टरके कानमें कुछ बोल रहे थे. इन्स्पेक्टरकीभी वही दशा हो गई थी. उनके चेहरेपरभी हडबडाहटभरे आश्चर्य और डरके भाव आगए थे. तबतक अंजली, विवेक और वह ऍन्करभी इन्स्पेक्टरके पास पहूंच गए.
'' क्या हुवा ?'' अंजलीने एकबार इन्स्पेक्टरकी तरफ तो दुसरी बार भाटीयाजीकी तरफ देखते हूए पुछा.
'' जाते हूए वह अपना आखरी दांव खेल गया है '' इन्सपेक्टरने बताया.
'' लेकिन क्या हुवा ?'' विवेकने पुछा.
'' थोडा खुलकर तो बताओ ?'' अंजलीने भाटीयाजीकी तरफ देखते हूए पुछा.
'' खुलकर बोलनेके लिए अब वक्त नही है ... चलो मेरे साथ चलो '' भाटीयाजी अब जल्दी करते हूए बोले. और तेजीसे स्टेजके पिछले हिस्सेसे उतरकर उस कंपनीके आदमीके साथ अपने ऑफीसकी तरफ जाने लगे.
इन्स्पेक्टर, अंजली, और विवेकभी चुपचाप उनके पिछे चलने लगे. वह ऍन्कर उनके पिछे जाएकी ना जाए इस दुविधामें स्टेजपरही रुका रहा, क्योंकी अबतक हॉलमें उपस्थित लोगोंमे खुसुरफुसुर और गडबडी शुरु हो गई थी. हकिकतमें क्या हुवा यह जाननेकी जैसे उन लोगोंकी उत्सुकता बढ रही थी. लेकिन जितने वे लोग अनभिज्ञ थे उतनाही वह ऍन्करभी अनभिज्ञ था. लेकिन क्या हुवा यह जाननेसे बडी जिम्मेदारी अब उस एन्करके कंधेपर आन पडी थी - किसीभी तरह उन लोगोंको शांत करके वहां उस हॉलसे सही सलामत बाहर निकालनेकी.
क्रमश:...
Quote of the Day ---
"In a moment of decision,
the best thing you can do is the right thing to do.
The worst thing you can do is nothing.
--- Theodore Roosevelt
Hindi sahitya wangmay literature, Hindi entertainment books, Hindi editor, Hindi transliteration, Hindi gosti stories, nothern literature, Hindi prakashan publication, Hindi poems, hindi new books
|
|
|
|
|
|
|
The Romantic, suspense online Hindi Novel based on my book 'Cyber Love' |
Tuesday, June 9, 2009
Hindi Sahitya - Elove : ch-45 आखरी दांव
Posted by (Author)
Sunil Doiphode
at
10:56 AM
Labels: hindi editor, Hindi entertainment books, Hindi gosti stories, Hindi new books, hindi poems, Hindi prakashan publication, Hindi sahitya wangmay literature, Hindi transliteration, nothern literature
Subscribe to:
Post Comments (Atom)







0 comments:
Post a Comment