
Hindi Books library - Elove : ch-47 गुड मुव्ह
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--- Cicero
इतनी बडी कंपनीका अस्तित्व और भविष्य खतरेमें आया था, इसलिए इन्स्पेक्टरको अतूलका सबकुछ सुननेके अलावा कोई रास्ता नही था. और उससे कितना नुकसान हो सकता है यह भाटीयाजींके पसिनेसे लथपथ चेहरेपर साफ दिख रहा था. वैसे देखा जाए तो भाटीयाजी बहुत हिम्मतवाले या यू कहा जाए की मोटी चमडीवाले आदमी थे. और उनके चेहरेपर और पुरे बदनमें पसिना आए मतलब कंपनीका अस्तित्व बुरी तरफ दाव पर लगा था यह स्पष्ट था.
अतूलने बताए अनुसार विवेकभी उसके साथ उसे उस जगहसे दूर छोडनेके लिए तैयार हुवा था. इसलिए उसके साथ कौन जाएगा यह एक बडी गुथ्थी सुलझ गई थी. क्योंकी उसके साथ अकेला जाना खतरेसे खाली नही था, यहांतककी खुदकी जान जानेकाभी खतरा था और वह किसे अपनेसाथ कोई हथीयार ले जाने देगा इतना मुर्ख नही था. लेकिन विवेकको उसके साथ अकेले भेजनेके लिए अंजलीका दिल नही मान रहा था. वह वैसे कुछ बोली नही लेकिन उसके चेहरेसे सबकुछ झलक रहा था. एक तरफ भाटीयाजींकी कंपनी उसकी वजहसेही खतरेमें आ गई थी और उसनेही विवेकको भेजेनेके लिए इन्कार करना उसे ठिक नही लग रहा था. अतुलको जाल डालकर फांसनेके काममें भाटीयाजींका बहुमोल योगदान था. और उन्होने उस बातके खतरेका अहसास होते हूए भी उसे पुरा सहयोग दिया था. और अब उनकी कंपनी खतरेमें आनेके बाद मुंह मोड लेना उसे जच नही रहा था.
विवेकनें उसकी दुविधा जानते हूए उसे अपनी बाहोमें लेते हूए थपथपाकर कहा.
'' डोन्ट वरी हनी... आय वुल बी फाईन''
अंजली कुछभी बोली नही, लेकिन आखीर अपने दिलपर पत्थर रखकर वह उसे जाने देनेके लिए तैयार हो गई.
एक तरहसे इन्स्पेक्टर कंवलजितनेही उसे धिरज बंधाकर तैयार किया था.
भाटीयाजी, अंजली, विवेक और इन्स्पेक्टर कंवलजित स्टेजसे उतरकर वहांसे निकल जानेके बाद हॉलमें इकठ्ठा हूए लोगोंको शांतीसे बाहर निकालनेका काम ऍन्करने कुछ पुलिसकी मदत लेते हूए खुब निभाया था. अब कंपनीके कंपाऊंडके अंदर पुलिस, कंपनीके लोग, विवेक, अंजली और वह गुनाहगार के अतिरिक्त कोई नही था. कुछ लोगोंको इस पुरे मसलेकी खबर शायद लगी थी, क्योकी वे पुलिसकी डरकी वजहसे कंपाऊंडके बाहर जाकर इधर उधर छिपते हूए उधरही देख रहे थे. और वेभी लोग बहुत कम थे. इसलिए अब गुनाहगारको संभालनेमें या उसकी मांगे सुन लेनेमें इन्स्पेक्टर कंवलजितको जादा तकलिफ नही हो रही थी. अगर लोग अबभी कंपाऊंडके अंदर या हॉलमें होते तो शायद इस गुनाहगारको संभालनेसे उन लोगोंको संभालना जादा तकलिफदेह होता था.
आखिर अतूलको उसके कहे अनुसार कही बहुत दुर ले जाकर छोडनेके लिए पुलिस राजी हो गई. सब लोग कंपनीके बिल्डींगके बाहर खुले मैदानमे इकठ्ठा हुए थे. मैदानमें पुलिसकी और बाकी बहुतसारी गाडीयां खडी थी. अतूलने वहां खडी पाच छे गाडीयोंके पास जाकर गौरसे देखा और उनमेंसे एक गाडीके छतपर थपथपाते हूए पुछा,
'' यह गाडी किसकी है ?''.
वह कंपनीके एक ऑफिसरकी गाडी थी. वह ऑफिसर डरते हूएही सामने आते हूए बोला, '' मेरी है ''
'' चाबी दो '' अतूलने फरमान छोडा.
भाटीयाजींने उस ऑफीसरकी तरफ देखते हूए आंखोसेही उसे वैसा करनेके लिए कहा. उस ऑफीसरने चुपचाप अपने पॅन्टकी जेबसे चाबी निकालकर अतूलके हवाले कर दी.
'' हम इस गाडीसे जाएंगे '' अतूलने एलान किया.
विवेकने एक कडा कटाक्ष अतूलकी तरफ डालते हूए कहा, '' पहले तुम्हारा मोबाईल इधर दो ''
अतूलने कुछ क्षण सोचा और अपना मोबाईल निकालकर विवेकके पास देते हूए बोला, '' गुड मुव्ह''
विवेकने वह मोबाईल लेकर इन्स्पेक्टरके पास दिया.
'' अब तुम्हारा मोबाईल इधर लाओ '' अतूलने कहा.
विवेकने अपना मोबाईल निकालकर अतूलके पास दिया. अतूलने गाडीकी डीक्की खोली और वह मोबाईल डिक्कीमें डाल दिया. लेकिन उसे क्या लगा क्या मालूम, उसने वह मोबाईल फिरसे डीक्कीसे बाहर निकाला और उसे ऑफ कर फिरसे डिक्कीमें डालते हूए डिक्की बंद की.
'' गुड मुव्ह'' अब विवेककी बारी थी.
अतूल उसकी तरफ देखकर मक्कारकी तरह मुस्कुराते हूए बोला, '' हां अब सब ठिक है ''
'' हू विल ड्राईव्ह द व्हेईकल?'' विवेकने गाडीके पास जाते हूए पुछा.
'' ऑफ कोर्स मी'' अतूलने कहा और गाडीके ड्राईव्हींग सिटकी तरफ जाने लगा.
लेकिन अचानक अतूल बिचमेंही रुकते हूए बोला , ''वेट'
विवेकभी रुक गया. अतूल मुस्कुराते हूए विवेकके पास गया और उसकी उपरसे निचेतक पुरी तलाशी लेने लगा. शायद वह उसके पास कोई हथीयार है क्या यह देख रहा था.
'' हां अब ठिक है '' अतूल ड्रायव्हींग सिटकी तरफ जाने लगा वैसे विवेकने कहा,
'' वेट... दॅट अप्लाईज टू यू टू''
विवेकनेभी अतूलके पास जाकर उसकी पुरी तलाशी ली.
'' हां अब ठिक है '' विवेकने कहा और गाडीकी तरफ जाने लगा वैसे अतूल इन्स्पेक्टरकी तरफ देखते हूए बोला,
'' नही अभीभी सब ठिक नही है ... ''
इन्सपेक्टर कुछ ना बोलते हूए अतूलकी तरफ देखने लगा.
'' इन्स्पेक्टर अगर मुझे किसीभी क्षण खयालमें आगया की हमारा पिछा हो रहा है ... या हमारी जानकारी कही भेजी जा रही है ... तो ध्यानमें रखो ... मै पासवर्ड तो दुंगा ... लेकिन वह गलत पासवर्ड होगा ... जो दिए बराबर तुम्हारे कंपनीका सारा डाटा तुरंत नष्ट हो जाएगा ... समझे ?'' अतूलने कडे स्वरमें ताकिद दी.
'' डोन्ट वरी यू विल नॉटबी ... फालोड... प्रोव्हायडेड यू गिव्ह अस द करेक्ट पासवर्ड...'' इन्स्पेक्टरने कहा.
'' दट्स लाईक अ गुड बॉय'' अतूल गाडीके ड्रायव्हीग सिटपर बैठते हूए बोला.
अतूलने गाडी शुरु करके विवेककी तरफ कडी नजरसे देखा. विवेक उसकी बगलवाले सिटपर चुपचाप आकर बैठ गया और अंजलीकी तरफ देखते हूए उसने गाडीका दरवाजा खिंच लिया.
अतूलने गाडी रेस की और कंपनीके कंपाऊंडके बाहर ले जाकर तेजीसे रास्तेपर दौडाई.
क्रमश:...
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Friday, June 12, 2009
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Posted by (Author)
Sunil Doiphode
at
4:29 PM
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