
Hindi fiction books - Elove -ch-30 डोन्ट वरी... वुई हॅव अ सोल्यूशन
Inspirational Quotes -
Try not to become a man of success but a man of value.
--- Albert Einstein
वर्सोवा बिचपर अंजली विवेककी राह देख रही थी और उधर बडे बडे पत्थरोंके पिछे छुपकर अतूल और अलेक्स अपने अपने कॅमेरे उसपर केंद्रीत कर विवकके आनेकी राह देखने लगे. थोडी देरमें विवेकभी आ गया, विवेक और अंजलीमें कुछ संवाद हुवा, जो उन्हे सुनाई नही दे रहा था लेकिन उनके कॅमेरे अब उनके एक के पिछे एक फोटो खिचने लगे. थोडीही देरमें विवेक और अंजली एकदुसरेके हाथमें हाथ डालकर बिचपर चलने लगे. इधर अतूल और अलेक्सभी पत्थरोके पिछेसे आगे आगे खिसकते हूए उनके फोटो ले रहे थे.
अंधेरा छाने लगा था और एक लमहेमें उनमें क्या संवाद हुवा क्या पता?, विवेकने अंजलीको कसकर अपने बाहोंमें खिंच लिया. इधर अतूल और अलेक्सकी फोटो निकालनेकी रफ्तार तेज हो गई थी. फिरभी वे संतुष्ट नही थे. क्योंकी उन्हे जो चाहिए था वह अबभी नही मिला था.
अंजलीकी कार जब ओबेराय हॉटेलके सामने आकर रुकी. उसके कारका पिछा कर रही अतूल और अलेक्सकी टॅक्सीभी एक सुरक्षीत अंतर रखकर रुक गई. अंजली गाडीसे उतरकर हॉटेलमें जाने लगी और उसके पिछे विवेकभी जा रहा था, तब अतूलने अलेक्सकी तरफ एक अर्थपुर्ण नजरसे देखा और वे दोनोभी उनके खयालमें नही आए इसका ध्यान रखते हूए उनका पिछा करने लगे.
अब अंजली और विवेक हॉटेलके रुममें पहूंच गए थे और रुमका दरवाजा बंद हो गया था. उनका पिछा कर रहे अतूल और अलेक्स अब जल्दी करते हूए उनके रुमके दरवाजेके पास आगए. अलेक्सने दरवाजा धकेलकर देखा. वह अंदरसे बंद था.
'' अब क्या हम यहां उनकी पहरेदारी करनेवाले है ?'' अलेक्सने चिढकर लेकिन धीमे स्वरमें कहा.
'' डोन्ट वरी... वुई हॅव अ सोल्यूशन '' अतूलने उसका हौसला बढाते हूए कहा.
अलेक्स दरवाजेके कीहोलसे अंदर हॉटेलके रुममें देख रहा था ...
अंदर फोन उठाते हूए अंजलीके हाथका हल्कासा स्पर्ष विवेकको हुवा. बादमें फोनका नंबर डायल करनेके लिए उसने दुसरा हाथ सामने किया. इसबार उस हाथकाभी विवेकको स्पर्ष हुवा. इसबार विवेक अपने आपको रोक नही सका. उसने अंजलीका फोन डायल करनेके लिए सामने किया हाथ हल्केसे अपने हाथमें लिया. अंजली उसकी तरफ देखकर शर्माकर मुस्कुराई. उसने अब वह हाथ कसकर पकडकर खिंचकर उसे अपने आगोशमें लिया था. सबकुछ कैसे तेजीसे हो रहा था. उसके होंठ अब थरथराने लगे थे. विवेकने अपने गरम और अधीर हूए होंठ उसके थरथराते होंठपर रख दिए और उसे झटसे अपने मजबुत आगोशमें लेकर, उठाकर, बाजुमें रखे बेडपर लिटा दिया ....
अलेक्स अंदर कीहोलसे इतनी देरसे अंदर क्या देख रहा है? ... और वहभी कुछ शिकायत ना करते हूए. अतूलको आशंका हूई. उसने अलेक्सका सर कीहोल से बाजू हटाया. और वह अब खुद अंदर देखने लगा ...
अंदर अंजलीके शरीर पर विवेक झुक गया था और वह उसके गलेको चुम रहा था मानो उसके कानमें कुछ कह रहा हो. धीरे धीरे उसका मजबुत मर्दानी हाथ उसके नाजूक अंगोसे खेलने लगा. और प्रतिक्रियाके रुपमें वहभी किसी लताकी तरह उसे चिपककर सहला रही थी. हकसे अब वह उसके शरीरसे एक एक कर कपडे निकालने लगा और वहभी उसके शरीरसे कपडे निकालने लगी....
अलेक्सने अतूलकी उसका सर कीहोलसे बाजू होगा इसकी थोडी देर राह देखी. लेकिन वह वहांसे हटनेके लिए तैयार नही था. तब अलेक्सने जबरदस्ती उसका सर कीहोलसे बाजु हटाया और वह उसे बोला, '' मेर भाई यह देखनेसे अपना पेट भरनेवाला नही है ... थोडा अपने पेट पानीका भी सोचो ''
अंदरका दृष्य देखनेमें लिन हूवा अतूल अब कहा होशमें आ गया.
'' लेकिन अब उनके फोटो तूम कैसे निकालनेवाले हो ?'' अलेक्सने कामका सवाल पुछ लिया.
'' डोन्ट वरी वुई आर इक्वीपड विथ टेक्नॉलॉजी.'' अलेक्सने उसे दिलासा दिया और उसने अपने जेबसे एक वायरजैसी चिज निकालकर उसका एक सिरा अपने कॅमेरेसे जोडा और दुसरा सिरा दरवाजेके कीहोलसे अंदर डाला.
'' यह क्या है ... पता है ?'' अलेक्सने पुछा.
'' दिस इज स्पेशल कॅमेरा माय डियर'' अतूलने कहा और वह उस स्पेशल कॅमेरेसे हॉटेलके रुमके अंदरके सारे फोटो निकालने लगा.
क्रमश:...
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Try not to become a man of success but a man of value.
--- Albert Einstein
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The Romantic, suspense online Hindi Novel based on my book 'Cyber Love' |
Friday, April 24, 2009
Hindi fiction books - Elove -ch-30 डोन्ट वरी... वुई हॅव अ सोल्यूशन
Posted by (Author)
Sunil Doiphode
at
11:34 AM
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