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Hindi upanyas - Novel - ELove : CH-16 सहारा

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Famous quotes

Man is constantly in search of something unknown, and when he feels, he got it, probably he is in love.

--- Unknown


हॉटेलका सुईट जैसे जैसे नजदिक आने लगा, वैसे एक अन्जानी भावनासे अंजलीके दिलकी धडकन तेज होने लगी थी. एक अनामिक डरने मानो उसे घेर लिया था. विवेक भलेही उसके पिछे पिछे चल रहा था लेकिन उसके सासोंकी गति विचलीत हो चुकी थी. अंजलीने सुईटका दरवाजा खोला और अंदर चली गई.

विवेक दरवाजेमेही इधर उधर करता हुवा खडा हो गया.

'' अरे आवोना अंदर आवो '' अंजली उनके बिच बनी, असहजता, एक तणाव दूर करनेका प्रयास करती हुई बोली.

'' बैठो '' अंजली उसे बैठनेका इशारा करती हुई बोली और वही कोनेमें रखा फोन उठानेके लिए उसके पासही बैठ गई.

अंजलीने विवेकके पास रखा हुवा फोन उठानेके लिए हाथ बढाया और बोली, '' क्या लोगे ठंडा या गरम''

फोन उठाते हूए अंजलीके हाथका हल्कासा स्पर्ष विवेकको हुवा था. उसका दिल जोर जोरसे धडकने लगा. अंजलीको भी वह स्पर्श आल्हाददायक और अच्छा लगा था. लेकिन चेहरेपर वैसा कुछ ना बताते हूए उसने ऑर्डर देनेके लिए फोनका क्रेडल उठाया.

फोनका नंबर डायल करनेके लिए अब उसने अपना दुसरा हाथ बढाया. इसबार इस हाथकाभी हल्कासा स्पर्ष विवेकको हुवा. इस बार वह अपने आपको रोक नही सका. उसने अंजलीने आगे बढाया हुवा हाथ हल्केही अपने हाथमें लिया. अंजली उसकी तरफ देखकर शर्माकर मुस्कुराई. उसे वह हाथ उसके हाथसे छुडाकर लेना नही हो रहा था. मानो वह हाथ सुन्न हो गया हो. विवेकने अब वह हाथ कसकर पकडकर उसे खिंचकर अपनी बाहोंमे भर लिया. सबकुछ कैसे तेजीसे घट रहा था और वह सब अंजलीकोभी अच्छा लग रहा था. उसका पुरा बदन गर्म हो गया था और होंठ कांपने लगे थे. विवेकनेभी अपने गर्म और बेकाबू हूए होंठ उसके कांपते होंठोपर रख दिए. अंजलीका एक मन प्रतिकार करनेके लिए कह रहा था. लेकिन दुसरा मन तो विद्रोही होकर सारी मर्यादाए तोडने निकला था. वह उसपर हावी होता जा रहा था और अंजलीकी मानो होशोहवास खोए जैसी स्थिती हो गई थी. विवेकने उसे झटसे अपने मजबुत बाहोंमे उठाकर बगलमें रखे बेडपर लिटाया. उसके उस उठानेमें उसे एक आधार देनेवाली मर्दानी और हक जतानेवाली भावना दिखी इसलिए वह इन्कारभी नही कर सकी. या यू कहिए उसके पास प्रतिकार करनेके लिए कुछ शक्तीही नही बची थी.

उसे उसका वह सवाल याद आगया, '' अंजली मुझसे शादी करोगी ?''

और उसे अपना जवाबभी याद आगया, '' मैने ना थोडीही कहा है ''

उसे अब उसके बाहोमें एक सुरक्षा का अहसास हो रहा था. वहभी अब उसके हर भावनाको उतनीही उत्कटतासे प्रतिसाद दे रही थी.

'' विवेक आय लव्ह यू सो मच'' उसके मुंहसे शब्द बाहर आ गये.

'' आय टू'' विवेक मानो उसके गलेका चुंबन लेते हूए उसके कानमें कह रहा था.

धीरे धीरे उसका मजबुत मर्दानी हाथ उसके नाजूक बदनसे खेलने लगा. और वहभी किसी लतीका की तरह उसको चिपककर अपने भविष्यके आयुष्यका सहारा ढुंढ रही थी.

' हां मैही तुम्हारे आगेके आयूष्य का सहारा ... साथीदार हुं ' इस हकसे अब वह उसके बदनसे एक एक कपडे हटाने लगा था.

' हां मैने भी अब तुम्हे सब कुछ अर्पन कर दिया है .. ' इस विश्वास के साथ समर्पन करके वहभी उसके शरीर से एक एक कपडे हटाने लगी.

अंजली अचानक हडबडाकर निंदसे जाग गई. उसने बेडपर बगलमें देखा तो वहा विवेक निर्वस्त्र अवस्थामें चादर बदनपर ओढे गहरी निंद सो रहा था. लेकिन निंदमेंभी उसका एक हाथ अंजलीके निर्वस्त्र बदनपर था. इतने दिनोंमे रातको अचानक बुरे सपनेसे जगनेके बाद उसे पहली बार उसके हाथका एक बडा सहारा महसूस हुवा था.


क्रमश:..


Famous quotes

Man is constantly in search of something unknown, and when he feels, he got it, probably he is in love.

--- Unknown




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