उपन्यास - अद्-भूत
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Thursday, May 15, 2008

Hindi Novel book - अद्-भूत : Ch-22 : अब अगला कौन?

लगभग आधी रातको रोनॉल्ड और क्रिस्तोफर हॉलमें व्हिस्की पी रहे थे. एकके बाद एक उनके दो साथीयोंका कत्ल हूवा था. पहली बार जब स्टिव्हनका खुन हूवा तभी उन्हे शक हूवा था की हो न हो यह मामला नॅन्सीके खुनसे संबधीत है. लेकिन बादमें पॉलके कत्लके बाद उनका शक यकीनमें बदल गया था की यह नॅन्सीके खुनकी वजहसेही हो रहा है. कुछ भी हो जाए हम घबराएंगे नही ऐसा ठान लेनेके बादभी उनको रह रहकर अगला नंबर उन दोनोंमेंसेही कीसी एक का स्पष्ट रुपसे दिख रहा था. इसलिए उनके चेहरेंसे चिंता और डर हटनेके लिए तैयार नही था. वे व्हिस्कीके एक के बाद एक न जाने कितने ग्लास खाली कर रहे थे और अपना डर मिटानेकी कोशीश कर रहे थे.

'' मैने नही कहा था तुम्हे ?'' किस्तोफरने आवेशमे आकर कहा.

रोनॉल्डने प्रश्नार्थक मुद्रामे उसकी तरफ देखा.

'' उस साले हरामीको जिंदा मत छोड करके ... उसको हमने तभी ठिकाने लगाना चाहिए था... उस लडकीके साथ...'' क्रिस्तोफर व्हिस्कीका कडवा घूंट लेते हूए बुरासा मुंह बनाते हूए बोला.

उन्हे शक नही ... पक्का यकिन था की जॉनकाही इन दो वारदातोंमे हाथ होगा.

'' हमें लगा नही की साला इतना डेंजरस निकलेगा ...'' रोनॉल्डने कहा.

'' बदला ... बदला आदमीको डेंजरस बना देता है. '' क्रिस्तोफरने कहा.

'' लेकिन एक बात मेरे खयालमें नही आ रही है की वह सारे कत्ल कैसे कर रहा है ... पुलिस जब वहां पहुचती है तब घर अंदरसे बंद किया हूवा रहता है और बॉडी अंदर पडी हूई... और यही नही तो पॉलके गलेका तोडा हूवा मांसका टूकडा मेरे किचनमें कैसे आया?.. और खास बात तब मैने मेरा घर... खिडकीयां, दरवाजे सबकुछ अच्छी तरहसे बंद किया था. '' रोनॉल्ड आश्चर्य जताते हूए बोला.

रोनॉल्ड कही शून्यमे देखकर सोचते हूए बोला,

'' यह सब देखते हूए एक बात मुमकीन लगती है ...''

'' कौनसी ?'' क्रिस्तोफरने व्हिस्कीका खाली हूवा ग्लास भरते हूए पुछा.

'' तूम्हारा भूतोंपर विश्वास है ?'' रोनॉल्डने बोले या ना बोले इस मनकी व्दीधा स्थीतीमें पुछा.

'' मुरखकी तरह कुछभी मत बको.... उसके पास कुछतो ट्रीक है जिसको इस्तमाल करके वह इस तरहसे कत्ल कर रहा है ... '' क्रिस्तोफरने कहा.

'' मुझेभी वही लगता है ... लेकिन कभी कभी अलग अलग तरहके शक मनमें आते है '' रोनॉल्डने कहा.

'' चिंता मत करो... वह हमारे तक पहूंचनेके पहलेही हम उसके पास पहूंचते है और उसको ठिकाने लगाते है... '' क्रिस्तोफर उसे सांत्वना देनेकी कोशीश करते हूए बोला.

'' हमें पुलिस प्रोटेक्शन लेना चाहिए'' रोनॉल्डने सोचकर कहा.

'' पुलिस प्रोटेक्शन? ... पागल होगए हो क्या ?... हम उन्हे क्या बोलने वाले है ... की भले आदमीयों हमने उस लडकीको मारा है.... हमारेसे गलती होगई.... सॉरी ... ऐसी गलती हमारेसे फिर नही होगी.... कृपया हमारा रक्षण किजिए ..'' क्रिस्तोफर दारुके नशेमें माफी मांगनेके हावभाव करते हूए बोला.

'' वह बादकी बात होगई... पहले अपना प्रोटेक्शन सबसे अहम है... वह क्या है की ...सर सलामत तो पगडी पचास'' रोनॉल्डने कहा.

'' लेकिन पुलिसके पास जाकर उनसे प्रोटेक्शन मांगना ... कुछ... ''

पोलिस प्रोटेक्शनका खयाल आतेही रोनॉल्ड अपने डरसे काफी उभर गया था.

'' उसकी चिंता तूम मत करो... वह सब मुझपर छोड दो'' रोनॉल्डने उसका वाक्य बिचमेंही तोडते हुए बडे आत्मविश्वाससे कहा.


क्रमश:...

Wednesday, May 14, 2008

Hindi Literature Novel - अद-भूत : Ch-21: फिर जॉन कहा गया?

.... डिटेक्टीव्ह सॅम डिटेक्टीव बेकरके सामने बैठकर सब सुन रहा था. वह कबकी कहानी पुरी कर चूका था. लेकिन वह दर्दभरी कहानी सुनकर कमरेमें सारे लोग इतने द्रवित और अभिभूत हो गए थे की बहुत देर तक कोई कुछ नही बोला. कमरेमें एक अनैसर्गीक सन्नाटा छाया था.

एक प्रेम कहानीका ऐसा भयानक दर्दनाक अंत होगा? ....

किसीने नही सोचा था.

नॅन्सी और जॉनकी प्रेमकहानी कॅबिनमें उपस्थीत सभी लोगोंके दिलको छु गई थी.

थोडी देर बाद डिटेक्टीव सॅमने अपनी भावनाओंको काबुमें करते हूए पुछा,

'' क्या जॉनने पुलिस स्टेशनमें रिपोर्ट दर्ज की थी ?"'

'' नही ''

'' फिर ... यह सब तुम्हे कैसे पता ?''

'' क्योंकी नॅन्सीका भाई ... जॉर्ज कोलीन्सने रिपोर्ट दर्ज की थी. ''

'' लेकिन उसनेभी रिपोर्ट कैसे दर्ज की ? ... मेरा मतलब है उसे वह सबकुछ पता कैसे चला? ... क्या जॉन उसे मिला था ? '' सॅमने एकके बाद एक सवालोकी छडी लगा दी.

''नही ... जॉन उसे उस घटनाके बाद कभी नही मिला.. .'' बेकरने कहा.

'' फिर उसे खुनी कौन है यह कैसे पता चला ?'' सॅमको अब उसे सता रहे सारे सवालोंके जवाब मिलनेकी जल्दी हो रही थी.

'' कुछ महिने पहले जॉनने नॅन्सीके भाईको इस घटनाके बारेमें खत लिखकर सब जानकारी लिखी थी... उसमें उसने उन चार लोगोंके नाम पते भी लिखे थे. ...''

'' फिर रिपोर्टका नतिजा क्या निकला ?'' सॅमने अगला सवाल पुछा.

''... इस केसपर हमनेही तहकिकात की थी... लेकिन ना नॅन्सीकी डेड बॉडी मिली थी ... ना जॉन मिला जो की इस घटना का अकेला और बहुत अहम चश्मदीद गवाह था... इसलिए केस बिना कुछ नतिजेके वैसीही लटकी रही ... और अभीभी वैसीही लटकी पडी है... ''

'' अच्छा ... जॉनका कुछ अता पता ?'' सॅमने पुछा.

'' उसके बारेमें किसीकोभी कुछ पता नही चला... उस घटनाके बाद वह कभी उसके अपने घरभी नही आया ... वह जिंदा है या मरा ... इसकाभी कुछ पता नही चला... सिर्फ उसके जॉनको आए खतसे ऐसा लगता है की वह जिंदा होना चाहिए... लेकिन अगर वह जिंदा है तो छिप क्यो रहा है? ... यही एक बात समझमें नही आती.....''

'' उसका कारण सिधा है ... '' इतनी देरसे ध्यान देकर सुन रहे सॅमके साथीने कहा.

'' हां ....उसका एकही कारण हो सकता है की ... हालहीमें जो दो कत्ल हूए उसमें जॉनकाही हाथ हो सकता है.. और इसलिएही मैने तुम्हे यहां बुलाकर यह सब जानकारी तुम्हे देना मुनासीब समझा ...'' बेकरने कहा.

'' बराबर है तुम्हारा... इस खुनमें जॉनका हाथ हो सकता है ऐसा मान लेनेकी काफी गुंजाईश है... लेकिन मुझे एक बात समझमें नही आती है की ... जब वह कमरा या मकान अंदरसे और सब तरफसे बंद होता है तब वह खुनी अंदर पहूंचता कैसे है ? ... वह सारे कत्ल कैसे कर रहा है यह एक ना सुलझनेवाली पहेली बन चूकी है ''

'' अच्छा जब नॅन्सीके भाईको इस घटनाके बारेमें पता चला तो उसकी प्रतिक्रीया क्या थी ? ... और अब केसके नतिजेमें देरी हो रही है इसके बारेंमे उसकी प्रतिक्रिया कैसी है ?''

'' वह आदमी पागलोंजैसा हो चूका है ... इस पुलिस स्टेशनमें उसकी हमेशा चक्कर रहती है... और केसका आगे क्या हूवा यह वह हमेशा पुछता रहता है ... वह यह सब फोन करकेभी पुछ सकता है ... लेकिन नही वह खुद यहां आकर पुछता है ... मुझे तो उसपर बहुत तरस आता है ... लेकिन अपने हाथमें जितना है उतनाही हम कर सकते है... '' बेकरने कहा.

'' इसका मतलब हालहीमें जो दो खुन हूए उसका कातिल नॅन्सीका भाई जॉर्जभी हो सकता है .. '' सॅम ने कहा.

'' आपने उसे देखना चाहिए... उसकी तरफ देखकर तो ऐसा नही लगता... '' बेकरने कहा.

'' लेकिन यह एक संभावना है जिसे हम झुटला नही सकते ...'' सॅमने प्रतिवाद किया.

डिटेक्टीव बेकरने थोडी देर सोचा और फिर हांमे अपना सर हिलाया.


क्रमश:...

Tuesday, May 13, 2008

Hindi Novel book - अद्-भूत : Ch-20 : मै तुम्हे नही छोडूंगा

जॉनको एकदम सबकुछ शांत और स्थब्ध होनेका अहसास हूवा.

'' ए उसके आंखोपर बंधा कपडा छोड रे... '' क्रिस्तोफरका चिढा हूवा स्वर गुंजा.

जॉनको उसके आंखोपरसे कोई कपडा निकाल रहा है इसका अहसास हूवा. उसका आक्रोश आंसुओंके द्वारे बाहर निकलकर वह कपडा पुरी तरह गिला हूवा था.

जैसेही उन्होने उसके आखोसे वह कपडा निकाला, उसने सामनेका दृष्य देखा. उसके जबडे कसने लगे, आंखे लाल लाल हो गई, सारा शरीर गुस्सेसे कांपने लगा था. वह खुदको छुडाने के लिए छटपटाने लगा. उसके सामने उसकी नॅन्सी निर्वस्त्र पडी हूई थी. उसकी गर्दन एक तरफ लटक रही थी. उसकी आंखे खुली थी और सफेद हो गई थी. उसका शरीर निश्चल हो चूका था. उसके प्राण कबके जा चूके थे.

अचानक उसे अहसास हूवा की उसके सरपर किसी भारी वस्तूका प्रहार हूवा और वह धीरे धीरे होश खोने लगा.

जब जॉन होशमें आया, उसे अहसास हूवा की अब वह बंधा हूवा नही था. उसके हाथ पैर बंधनसे मुक्त थे. लेकिन जहां कुछ देर पहले नॅन्सीकी बॉडी पडी हूई थी वहां अब कुछभी नही था. वह तुरंत उठकर खडा होगया, उसने चारो ओर अपनी नजर घुमाई.

वह मुझे गिरा हूवा कोई भयानक सपनातो नही था...

हे भगवान वह सपनाही हो...

वह मनही मन प्रार्थना करने लगा.

लेकिन वह सपना कैसे होगा...

'' नॅन्सी '' उसने एक आवाज दिया.

उसे मालूम था की उसे कोई प्रतिसाद आनेवाला नही है.

लेकिन एक झूटी आस...

उसके सरमें पिछेकी तरफसे बहुत दर्द हो रहा था. इसलिए उसने सरको पिछे हाथ लगाकर देखा. उसका हाथ लाल लाल खुनसे सन गया.

उन लोगोंने प्रहार कर उसे बेसुध किया था उसका वह जख्म और निशानी थी. अब उसे पक्का विश्वास हुवा था की वह कोई सपना नही था.

वह तेजीसे रुमके बाहर दौड पडा. बाहर इधर उधर ढूंढते हूए वह गलियारेसे दौड रहा था. वह लिफ्टके पास गया और लिफ्टका बटन दबाया. लिफ्टमें घुसनेसे पहले फिरसे उसने एक बार चारोंतरफ अपनी ढूंढती नजर दौडाई.

कहा गए वे लोग?...

और नॅन्सीकी बॉडी किधर है? ...

की उन्होने लगा दिया उसे ठिकाने...

वह हॉटलके बाहर आकर अंधेरेमें पागलोंकी तरह इधर उधर दौड रहा था. सब तरफ अंधेरा था. आधी रात होकर गई थी. रास्तेपरभी आने जानेवाले बहुतही कम दिखाई दे रहे थे. एक कोनेपर खडा एक टॅक्सीवाला उसे दिखाई दीया.

उसे शायद पता हो...

वह उस टॅक्सीके पास गया, टॅक्सीवालेसे पुछा. उसने दाईतरफ इशारा कर कुछ तो कहा. जॉन टॅक्सीमें बैठ गया और उसने टॅक्सीवालेको टॅक्सी उधर लेनेको कहा.

निराश, हताश हूवा जॉन धीमे गतीसे चलता हूवा अपने रुमके पास वापस आगया. रुममें जाकर उसने अंदरसे दरवाजा बंद कर लिया.

उसने बेडकी तरफ देखा. बेडशीटपर झुर्रिया पडी हूई थी. वह बेडपर बैठ गया.

क्या किया जाये ?...

पुलिसके पास जावो तो वे मुझेही गिरफ्तार करेंगे...

और खुनका इल्जाम मुझपरही लगाएंगे...

और वैसे देखा जाए तो मैही तो हू उसके खुनके लिए जिम्मेदार...

सिर्फ खुनही नही तो उसपर हूए बलात्कारके लिए भी ...

उसने अपने पैर मोडकर घूटने पेटके पास लिए और घूटनोमें अपना मुंह छिपाया. और वह फुटफुटकर रोने लगा.

रोते हूए उसका ध्यान वही कपाटके निचे गिरें कागजके टूकडेने खिंच लिया. वह खडा होगया. अपने आंसू अपने आस्तीनसे पोंछ लिए.

कागजका टूकडा? ... यहां कैसे ?...

उसने वह कागजका टूकडा उठाया.

कागजपर चार अंग्रजी अक्षर लिखे हूए थे - सी, आर, जे, एस. और उन अक्षरोंके सामने कुछ नंबर्स लिखे हूए थे. शायद वे कोई पत्तोके गेमके पॉईंट्स होंगे...

उसने वह कागज उलट पुलटकर देखा. कागजके पिछे एक नंबर था. शायद मोबाईल नंबर होगा.

वह दृढतापुर्वक खडा हो गया -

'' ऍसहोल्स ... मै तुम्हे छोडूंगा नही '' वह गरज उठा.


क्रमश:...

Monday, May 12, 2008

Hindi Novel - अद्-भूत : Ch-19 : आय प्रॉमीस

हॉटेलके एक कमरेमे नॅन्सी और जॉन बेडपर एकदुसरेके आमने सामने बैठे थे. जॉनने नॅन्सीके चेहरेपर आती बालोंके लटोंको एक तरफ हटाया.

'' मुझे तो डरही लगा था की शायद हम उनके चंगुलमें ना फंस जाए'' नॅन्सीने कहा.

वह अभीभी उस भयानक मनस्थीतीसे बाहर नही निकल पाई थी.

'' देखो .. मेरे होते हूए तुम्हे चिंता करनेकी क्या जरुरत ?... मै तुम्हे कुछभी नही होने दुंगा... आय प्रॉमीस'' वह उसे सांत्वना देनेकी कोशीश करते हूए बोला.

उसने मंद मंद मुस्कुराते हूए उसके तरफ देखा.

सचमुछ उसे उसके इस शब्दोंसे कितना अच्छा लगा था. ...

धीरेसे जॉन उसके पास खिसक गया. नॅन्सीने उसकी आंखोमें देखा. जॉनभी अब उसकी आंखोसे अपनी नजरे हटानेके लिए तैयार नही था. धीरे धीरे उनके सांसोकी गति बढने लगी. हलकेही जॉनने उसे अपनी बाहोंमें खिंच लिया. उसेभी मानो उसकी सुरक्षीत बाहोमें अच्छा लग रहा था.

जॉनने धीरेसे उसे बेडपर लिटाकर उसका चेहरा अपनी हाथोंमे लेकर वह उसकी तरफ एकटक देखने लगा. धीरे धीरे उसकी तरफ झुकता गया और उसके गर्म होंठ अब उसके कांपते होंठोपर टीक गए. दोनोभी बेकाबु होकर एकदुसरेको आवेगमें चुमने लगे. इतने आवेगमेंकी वे दोनो 'धपाक' से बेडके निचे फर्शपर गिर गए. नॅन्सी निचे और उसके उपर जॉन गिर गया. दर्दसे कराहते हूए नॅन्सीने उसे दूर धकेला,

'' मेरी क्या हड्डीयां तोडोगे? '' वह कराहते हूए बोली.

जॉन झटसे उठ गया और उसे उपर उठानेका प्रयास करने लगा.

'' आय ऍम सॉरी ... आय ऍम सो सॉरी '' वह बोला.

नॅन्सीने उसे एक चांटा मारनेका अविर्भाव किया. उसनेभी डरके मारे अपनी आंखे बंद कर अपना चेहरा दुसरी तरफ हटाया. नॅन्सी मनही मन मुस्कुराई. किसी छोटे बच्चेकी तरह मासूम भाव उसके चेहरेपर उभर आए थे. उसकी इसी मासूम अदापर तो वह फिदा हूई थी. उसने उसका चेहरा अपने हाथोंमे लिया और उसकी होंठोंको वह कसकर चुमने लगी. वह भी उसी तडप, उसी आवेगके साथ जवाबमें उसे चुमने लगा. अब तो उन्होने निचे फर्शपर बिछे गालीचेसे उठकर उपर जानेकेभी जहमत नही उठाई. असलमें वे एक क्षणभी गवाना नही चाहते थे. वे निचे गालीचेपरही लेटकर एकदुसरेंके उपर चुंबनकी बरसात करने लगे. चुमनेके साथही उनके हाथ एकदुसरेके कपडे निकालनेमें व्यस्त थे. जॉन अब उसके सारे कपडे निकालकर उसमें समा जानेको बेताब हूवा था. वह धीरे धीरे बडी बडी सांसोके साथ नॅन्सीके उपर झुकने लगा. इतनेमें... इतनेंमे उनके कमरेके दरवाजेपर किसीने नॉक किया. वे मानो जैसे थे वैसे बर्फ की तरह जम गए. गडबडाकर वे एक दुसरेकी तरफ देखने लगे.

हमें दरवाजा बजनेका आभास तो नही हुवा? ...

तब फिरसे एकबार दरवाजेपर नॉक सुनाई दी - इसबार थोडी जोरसे.

सर्विस बॉय तो नही होगा ...

'' कौन है ?'' जॉनने पुछा.

'' पुलिस ...'' बाहरसे आवाज आया.

दोनो गालिचेसे उठकर कपडे पहनने लगे.

पुलिस यहांतक कैसे पहूंच गई ?...

जॉन और नॅन्सी सोचने लगे.

उन्होने अपने कपडे पहननेके बाद जॉन सहमें हूए स्थितीमें दरवाजेतक गया. उसने फिरसे एक बार नॅन्सीकी तरफ देखा. अब इस परिस्थितीका सामना कैसे किया जाए इसकी वे मनही मन तैयारी करने लगे थे. जॉन कीहोलसे बाहर झांककर देखने लगा. लेकिन बाहर अंधेरेके सिवा कुछ नजर नही आ रहा था.

या उस कीहोलमें कुछ प्रॉब्लेम होगा ...

सावधानीसे, धीरेसे उसने दरवाजा खोला और दरवाजा थोडा तिरछा करते हूए बाहर झांकनेका प्रयास कर रहा था तभी ... क्रिस्तोफर, रोनॉल्ड, पॉल, और स्टीव्हन दरवाजा जोरसे धकेलते हूए कमरेमें घुस गए.

क्या हो रहा है यह समझनेके पहलेही क्रिस्तोफरने दरवाजेको अंदरसे कुंडी लगा ली थी. किसी चित्तेकी फुर्तीसे रोनॉल्डने चाकू निकालकर नॅन्सीके गर्दनपर रख दिया और दुसरे हाथसे वह चिल्लाये नही इसलिये उसका मुंह दबाया.

क्रिस्तोफरनेभी मानो पुर्वनियोजनकी तहत उसका चाकू निकालकर जॉनके गर्दनपर रखा और उसका मुंह दबाकर उसे दबोच लिया. मानो अब पुरी स्थिती उनके कब्जेमें आई हो इस तरहसे वे एकदुसरेकी तरफ देखकर अजीब तरहसे मुस्कुराए.

'' स्टीव्ह इसका मुंह बांध'' क्रिस्तोफरने स्टीव्हनको आदेश दिया.

जैसेही नॅन्सीने चिल्लानेकी कोशीश की रोनॉल्डने उसका मुंह जोरसे दबाते हुए और मजबुतीसे उसे दबोच लिया.

'' पॉल इसकाभी बांध...''

स्टीव्हनने जॉनका मुंह, हाथ और पैर टेपसे बांध दिया. पॉलने नॅन्सीका मुंह और हाथ बांध दीए.

उन्होने जिस फुर्तीसे यह सब हरकतें की उससे ऐसा प्रतित हो रहा था की वे ऐसे कामोंमे बडे तरबेज हो.

अब क्रिस्तोफरके चेहरेपर एक वहशी मुस्कुराहट छुपाए नही छुप रही थी.

'' ए ... इसके आंखोपर कुछ बांधरे ... बेचारेसे देखा नही जाएगा. '' क्रिस्तोफरने कहा.

स्टीव्हनने उनकेही सामानसे एक कपडा निकालकर जॉनकी आंखोपर बांध दिया. अब जॉनको सिर्फ अंधेरेके सिवा कुछ दिखाई नही दे रहा था. और सुनाई दे रहा था वह उन गिद्दोंकी वहशी और राक्षसी हंसी और नॅन्सीका दबा-दबाया हूवा चित्कार.


क्रमश:...

Friday, May 9, 2008

Hindi Novel - अद्-भूत : Ch-18 : वे चार और ये दोनो (Hindi books literature sahitya)

अपना पिछा हो रहा है इसका अब पुरा यकिन नॅन्सी और जॉनको हो चूका था. वे दोनोभी घबराए और गडबडाए हूए थे. यह शहर उनके लिए नया था. वे उन चारोंसे बचनेके लिए जिधर रास्ता मिलता उधर जा रहे थे. चलते चलते वे एक ऐसे सुनसान जगहपर आये की जहा लोग लगभग नही के बराबर थे. वैसे रातभी काफी हो चूकी थी. यहभी एक वहां लोग ना होनेकी वजह हो सकती थी. उसने पिछे मुडकर देखा. क्रिस्तोफर और उसके दोस्त अभीभी उनका पिछा कर रहे थे. नॅन्सीका दिल धडकने लगा. जॉनकोभी कुछ सुझ नही रहा था. अब क्या किया जाए, दोनोभी इस संभ्रममे थे. वे तेजीसे चल रहे थे और उनसे जितना दुर जा सकते है उतनी कोशीश कर रहे थे. आगे रास्तेपर तो औरभी घना अंधेरा था. वे दोनो और उनके पिछे उनका पिछा कर रहे वे चार लडके इनके अलावा उनको वहां और कोईभी नही दिख रहा था.

''लगता है उनके खयालमें आया है की हम उनका पिछा कर रहे है '' स्टीव्हन अपने साथीयोंसे बोला.

'' आने दो ... वह तो कभी ना कभी उनके खयालमें आनेही वाला था '' क्रिस्तोफरने बेफिक्र अंदाजमें कहा.

'' वे बहुत डरे हूए भी लग रहे है ... '' पॉलने कहा.

'' डरनाही तो चाहिए ... अब डरके वजहसेही अपना काम होनेवाला है... कभी कभी डरही आदमीको कमजोर बना देता है.. '' रोनॉल्डने कहा.

जॉनने पिछे मुडकर देखा तो वे चारो तेजीसे उनकी तरफ आ रहे थे.

'' नॅन्सी ... चलो दौडो... '' जॉन उसका हाथ पकडते हूए बोला.

एकदुसरेका हाथ पकडकर वे अब जोरसे दौडने लगे.

'' हमें पुलिसमें जाना चाहिए क्या ?'' नॅन्सीने दौडते हूए पुछा.

'' अब यहां कहा है पुलिस... और अगर हम ढूंढकर गएभी ... तो वेभी हमेंही ढूंढ रहे होंगे... अबतक तुम्हारे घरवालोंने पुलिसमें रिपोर्ट दर्ज की होगी ... '' जॉन दौडते हूए किसी तरह बोल पा रहा था.

दौडते हूए वे घने अंधेरेमे डूबे हूए एक संकरी गलीमें घुस गए. क्रिस्तोफर और उसके दोस्तभी उनके पिछेही थे. वे जब गलीमें घुसनेहीवाले थे की उतनेमे एक बडासा ट्रक रास्तेसे उनके और उस गलीके बिचमेंसे गुजर गया. वे ट्रक पास होनेतक रुक गए. और जब ट्रक पास हो चूका था तब उनको उस गलीमें कोई नही दिख रहा था. वे गलीमें घुस गए. गलीके दुसरे सिरे तक तेजीसे दौड गए. वहां रुककर उन्होने आजुबाजु देखा. लेकिन उन्हे जॉन और नॅन्सी कही नही दिखाई दे रहे थे.

क्रिस्तोफर और उसके दोस्त इधर उधर देखते हूए एक चौराहेपर खडे हो गए. उन्हे नॅन्सी और जॉन कहीभी नही दिखाई दे रहे थे.

'' हम सब लोग चारो तरफ फैलकर उन्हे ढूंढते है ... वे हमारे हाथसे छुटना नही चाहिए. '' क्रिस्तोफरने कहा.

चार लोग चार दिशामे, चार रस्तेसे जाकर फैल गए और उन्हे ढूंढने लगे.

नॅन्सी और जॉन रास्तेके किनारे पडे एक ड्रेनेज पाईपमें छिप गए थे. शायद ड्रेनेज पाईप्स नये डालनेके लिए या बदलनेके लिए वहां लाकर डाले होंगे. इतनेमे अचानक उन्हे उनकी तरफ दौडते हूए आ रहे किसीके पैरोकी आहट हो गई. वे अब वहांसे हिलभी नही सकते थे. वे अगर इस हालमें उन्हे मिले तो उनके पास करनेके लिए कुछ नही बचा था. उन्होने बिल्लीके जैसे अपनी आखे मुंदकर अपने आपको जितना हो सकता है उतना सिमटनेकी कोशीश की. इसके अलावा वे करभी क्या सकते थे. ?

अब उनके खयालमें आया की वह दौडकर आनेवाला, उन्ही चारोंमेसे एक, अब उनके पाईपके पास पहूंच गया है. वह नजदिक आतेही जॉन और नॅन्सी एकदम शांत लगभग सांसे रोककर कुछभी हरकत ना करते हूए वैसे ही छिपे रहे. वह अब पाईपके एकदम पास आकर पहूंचा था.

वह उन चारोंमेंसेही एक स्टीव्हन था. उसने आजुबाजु देखा.

'' साले कहा गायब होगए ?'' वह चिढकर अपने आपसेही बुदबुदाया.

उतनेमें स्टीव्हनका पाईपकी तरफ खयाल गया.

जरुर साले इस पाईपमें छिपे होंगे....

उसने अनुमान लगाया. वह पाईपके और करीब गया. वह अब झुककर पाईपमें देखनेही वाला था. इतनेमे....

'' स्टीव... जरा इधर तो आवो .... जल्दी '' उधरसे क्रिस्तोफरने उसे आवाज दिया.

स्टीव्हन पाईपमें झुककर देखते देखते रुक गया, उसने आवाज आया उस दिशामें देखा और मुडकर दौडते हूए उस दिशामें चला गया.

जानेवाले पैरोंका आवाज आतेही नॅन्सी और जॉनने सुकूनकी सांस ली.


क्रमश:...

Thursday, May 8, 2008

Hindi literarture Novel - अद्-भूत : Ch-17 : गेम

रेल्वे प्लॅटफॉर्मपर जैसे लोगोंका सैलाब उमड पडा था. भिडमें लोग अपना अपना सामान लेकर बडी मुश्कीलसे रास्ता निकालते हूए वहांसे जा रहे थे. शायद अभी अभी कोई ट्रेन आई हो. वही प्लॅटफार्मपर एक कोनेमें स्टीव्हन, पॉल, रोनॉल्ड और क्रिस्तोफर ऍन्डरसन पत्ते खेल रहे थे. उन चारोंमे क्रिस्तोफर, उसके हावभावसे और उसका जो तिनोंपर एक प्रभाव दिख रहा था उससे, उनका लिडर लग रहा था. क्रिस्तोफर लगभग पच्चीस के आसपास, कसे हूवे और मजबूत शरीर का मालिक, एक लंबाचौडा यूवक था.

" देखो अपनी गाडी आनेमें अभी बहूत वक्त है... कमसे कम और तीन गेम हो सकते है...'' क्रिस्तोफरने पत्ते बांटते हूए कहा.

" पॉल तुम इस कागजपर पॉइंट्स लिखो " रोनॉल्डने एक हाथसे पत्ते पकडते हूए और दुसरे हाथसे जेबसे एक कागजका टूकडा निकालकर पॉलके हाथमें देते हूए कहा.

" और, लालटेन जादा हुशारी नही चलेगी' पॉलने स्टीव्हनको ताकीद दी. वे स्टीव्हनको उसके चश्मेकी वजहसे लालटेनही कहते थे. क्रिस्तोफरका ध्यान पत्त्ते खेलते वक्त यूंही प्लॅटफॉर्मपर उमड पडी भिडकी तरफ गया.

भिडमें नॅन्सी और जॉन एकदुसरेका हाथ पकडकर किसी परदेसी अजनबीकी तरह चल रहे थे.

उसने नॅन्सीकी तरफ सिर्फ देखा और खुले मुंह देखताही रह गया.

" बाप, क्या माल है " उसके खुले मुंहसे अनायासही निकल गया. पॉल, रोनॉल्ड और स्टीव्हनभी अपना गेम छोडकर उधर देखने लगे. उनकाभी देखते हूए खुला मुह बंद होनेको तैयार नही था.

" कबूतरी कबूतरके साथ भाग आई है शायद" क्रिस्तोफरके अनुभवी नजरने भांप लिया.

' उस कबुतरके बजाय मै उसके साथ रहना चाहिए था' पॉल ने कहा.

क्रिस्तोफरने सबके पाससे पत्ते छिनकर लेते हूए कहा, ' देखो, अब यह गेम बंद करदो... हम अब एक दुसराही गेम खेलते है "

सबके चेहरे खुशीसे दमकने लगे. वे क्रिस्तोफरके बोलनेका छिपा अर्थ जानते थे. वैसे वे वह गेम कोई पहली बार नही खेल रहे थे. सब उत्साहसे भरे एकदम उठकर खडे होगए.

" अरे, देखो जरा खयाल रहे... साले कही घुस जाएंगे तो बादमें मिलेंगे नही " रोनॉल्डने उठते हूए कहा.

फिर वे उनके खयालमें ना आए इतना फासला रखते हूए उनके पिछे पिछे जाने लगे.

" ऐ , लालटेन तुम जरा आगे जावो... साले पहलेही तुझे चश्मेसे जरा कमही दिखता है ." क्रिस्तोफरने स्टीव्हनको आगे धकेलते हूए कहा. स्टीव्हन नॅन्सी और जॉनके खयालमें नही आये ऐसा सामने दौडते हूए गया.

दिनभर इधर उधर घुमनेमें वक्त कैसा निकल गया यह जॉन और नॅन्सीको पताही नही चला. कुछ देर बाद शामभी हो गई. जॉन और नॅन्सी एक दुसरेका हाथ पकडकर मस्त मजेमें फुटपाथपर चल रहे थे. सामने एक जगह रास्तेपर हार्ट शेपके हायड्रोजसे भरे लाल गुब्बारे बेचनेवाला फेरीवाला उन्हे दिखाई दिया. वे उसके पास गए. जॉनने गुब्बारोंका एक बडासा दस्ता खरीदकर नॅन्सीको दिया. पकडनेके लिए जो धागा था उसके हिसाबसे वह दस्ता बडा होनेसे धागा टूट गया और वह दस्ता उडकर आकाशकी ओर निकल पडा. जॉनने दौडकर जाकर, उंची उंची छलांगे लगाकर उसे पकडनेका प्रयासे किया लेकीन वह धागा उसके हाथ नही आया. वे लाल गुब्बारे मानो एकदुसरेको धक्के देते हूए उपर आकाशमें जा रहे थे. जॉनकी उस धागेको पकडनेकी जी तोड कोशीश देखकर नॅन्सी खिलखिलाकर हंस रही थी.

और उनके काफी पिछे क्रिस्तोफर , रोनॉल्ड, स्टीव्हन और पॉल किसीके खयालमें नही आए इसका ध्यान रखते हूए उनका पिछा कर रहे थे.

नॅन्सी और जॉन एक जगह आईसक्रीम खानेके लिए रुक गए. उन्होने एक कोन लिया और उसमेंही दोनो खाने लगे. आईसक्रीम खातेवक्त नॅन्सीका ध्यान जॉनके चेहरेकी तरफ गया और वह खिलखिलाकर हंस पडी.

'' क्या हूवा ?'' जॉनने पुछा.

'' आईनेमें तो देखो '' नॅन्सी वही पास एक गाडीको लगे आईनेकी तरफ इशारा कर बोली.

जॉनने आईनेमें देखा तो उसके नाक के सिरेको आईसस्क्रीम लगा था. अपना वह हुलिया देखकर उसेभी हंसी आ रही थी. उसने वह पोंछ लिया और एक प्रेमभरी नजरसे नॅन्सीकी तरफ देखा.

'' सचमुछ अपनी रुची कितनी मिलती जुलती है '' नॅन्सीने कहा.

'' फिर ... वह तो रहनेही वाली है... क्योंकी ...वुई आर द परफेक्ट मॅच"' जॉन गर्वसे बोल रहा था.

आईस्क्रीम खाते हूए अचानक नॅन्सीका खयाल दुर खडे क्रिस्तोफरकी तरफ गया. क्रिस्तोफरने झटसे अपनी नजर फेर ली. नॅन्सीको उसकी नजर अजीब लगी थी और उसकी गतिविघीयांभी.

'' जॉन मुझे लगता है अब हमें यहांसे निकलना चाहिए.'' नॅन्सीने कहा और वह वहांसे निकल पडी. जॉन उलझनमें सहमासा उसके पिछे पिछे जाने लगा.

वहांसे आगे काफी समयतक चलनेके बाद वे एक कपडेके दुकानमें घुस गए. अब काफी रात हो चुकी थी. नन्सीको शक था की कहीं वह पहले दिखा हुवा लडका उनका पिछा तो नही कर रहा है. इसलिए उसने दुकानमें जानेके बाद वहांसे एक संकरी दरारसे बाहर झांककर देखा. बाहर क्रिस्तोफर उसके और दो साथीके साथ चर्चा करते हूए इधर उधर देख रहा था. जॉन उन लोगोंको दिख सके ऐसे जगहपर खडा था.

'' जॉन पिछे मुडकर मत देखो... मुझे लगता है वह लडके अपना पिछा कर रहे है. '' नॅन्सी दबे स्वरमें बोली.

'' कौन ? .. किधर ? '' जॉनने गडबडाते हूए पुछा.

'' चलो जल्दी यहांसे हम निकल जाते है... वे हमतक पहूंचना नही चाहिए... '' नॅन्सीने उसे वहांसे बाहर निकाला.

वे दोनो लंबे लंबे कदम डालते हूए फुटपाथपर चलरहे लोगोंकी भिडसे रास्ता निकालते हूए वहांसे जाने लगे.


क्रमश:...

Wednesday, May 7, 2008

Hindi Novel - अद्-भूत : Ch-16 : अलविदा

ऑफिसबॉय चाय पाणी लेकर आनेसे बेकर जो हकिकत बता रहा था उसमें खंड पड गया. सॅमको और उसके साथीदारको आगेकी कहानी सुननेकी बडी उत्सुकता हो रही थी. सब लोगोंका चायपाणी होनेके बाद डिटेक्टीव्ह बेकर फिरसे आगेकी कहानी बताने लगा ....


... जॉनकी और नॅन्सीकी टॅक्सी रेल्वे स्टेशनपर पहूंच गई. दोनो टॅक्सीसे उतर गए. टॅक्सीवालेका किराया चूकाकर वे अपना सामान लेकर टिकीटकी खिडकीके पास चले गए. कहां जाना है यह उन्होने अबतक तय नही किया था. बस यहांसे निकल जाना है इतनाही उन्होने तय किया था. एक ट्रेन प्लॅटफॉर्मपर खडीही थी. जॉनने जल्दीसे उसी ट्रेनका टिकट निकाला.

प्लॅटफॉर्मपर वे अपना टिकट लेकर अपना रेल्वेका डिब्बा ढूंढने लगे. डिब्बा ढूंढनेके लिए उन्हे जादा मशक्कत नही करनी पडी. मुख्य दरवाजेसे उनका डिब्बा नजदिकही था. ट्रेन निकलनेका समय होगया था इसलिए वे तुरंत डिब्बेमें चढ गए. डिब्बेमें चढनेके बाद उन्होने अपनी सिट्स ढूंढ ली. अपने सिट के पास अपना सारा सामान रख दिया. उतनेमें गाडी हिलने लगी. गाडी निकलनेका वक्त हो चूका था. जैसेही गाडी निकलने लगी वैसे नॅन्सी जॉनको लेकर डिब्बेके दरवाजेके पास गई. उसे वहांसे जानेसे पहले अपने शहरको एक बार जी भरके देख लेना था. .

ट्रेनमें नॅन्सी और जॉन एकदम पास पास बैठे थे. उन्हे दोनोंको एकदुसरेका सहारा चाहिए था. आखिर उन्होने जो फैसला किया था उसके बाद उन्हे बस एकदुसरेकाही तो सहारा था. अपने घरसे सारे रिश्ते , सारे बंध तोडकर वे बहुत दुर जा रहे थे. नॅन्सीने अपना सर जॉनके कंधेपर रख दिया.

'' फिर ... अब कैसा लग रहा है '' जॉनने माहौल थोडा हलका करनेके उद्देशशे पुछा.

'' ग्रेट'' नॅन्सीभी झूटमुठ हंसते हूए बोली.

जॉन समझ सकता था की भलेही वह उपरसे दिखा रही हो लेकिन घर छोडने का दु