बॉसके सामने सॅम बैठा था. वह केसके बारेमे बॉसको ब्रीफ कर रहा था. बॉसने जॉनकी सब जिम्मेदारी उसे दी थी. बॉस हमेशाकी तरह रिलॉक्स बैठा सिगारके कश भर रहा था.
इतनेमें वहा पियून आ गया.
बॉसके सामने एक चिठ्ठी रखते हूए बोला,
" साहब, जॉनसाहब आये हूए है "
" जॉन....साहब ..."
'साहब' इस शब्दके उपर जरुरत से जादा जोर देनेसे बॉसके बोलनेका उपरोध स्पष्ट झलक रहा था.
बॉसने चिठ्ठी खोली.
चिठ्ठीमें लिखा था -
" सिरियल किलर केसकी बहुत महत्वपुर्ण जानकारी मेरे हाथ आई है ... इसलिये आपको तत्काल मिलना है.
बॉसने चिठ्ठीके उपरसे चेहरेपर बिना कोई भाव लाये एक नजर घुमाई.
सॅमके सामने चिठ्ठी सरकाते हूए बॉस बोला,
" जब दिए लगाने थे तब तो नही लगाये ... अब ये क्या तिर मारनेवाले है...?"
सॅमने चिठ्ठीपर एक नजर डाली.
अचानक कुर्सीपर सिधा बैठते हूए बॉसने पियून को फर्माया ,
" सेंड हिम इन"
पियून जल्दीसे बाहर गया और बादमे जॉन अंदर आया.
" हॅलो जॉन, हाऊ आर यू?" बॉस उसे सामने कुर्सीपर बैठनेका इशारा करते हूए बोला.
जॉन कुछ ना बोलते हूए सामने कुर्सीपर बैठ गया.
" हॅलो जॉन"
" हॅलो सॅम"
जॉन और सॅममें कमसे कम शब्दोका आदान प्रदान हूवा. दोनोंको अटपटासा लग रहा था.
" यस ... व्हाट कॅन वुई डू फॉर यू?"
बॉस एकदम किसी अनजानकी तरह उससे बात कर रहा था.
" सर, आय हॅव अॅन इंपॉर्टंंट इनफॉरमेशन रिगाडीर्ंंग नेक्स्ट पॉसिबल मर्डर"
" बट अॅज ऑल नो यू आर राईट नाऊ डिस्मीस्ड "
जॉन कुछ नही बोला.
" देन व्हाय शुड यू शेअर द इंन्फारमेशन विथ अस"
" सर देखीए , यह जो जानकारी है उसका आपके डिपार्टमेंटल पॉलिटीक्सके साथ कोई लेना देना नही है. यहा पब्लीकके जिने मरनेका सवाल है. मै अगर इस जानकारी के सहारे अकेला कुछ कर सकता था तो आपके पास कभी नही आता. "
जॉनके शब्दोमें उसका उसके बॉसपरका रोष स्पष्ट झलक रहा था.
बॉसने सामने रखे अॅश ट्रेमे सिगार मसल दी और मुस्कुराते हूवे बोला , " इसे कहते है रस्सी जल गई लेकीन बल नही गया . ऐनीवे क्या जानकारी है तुम्हारे पास ?"
" अगला कत्ल किसका होनेवाला है इसकी पॉसीब्लीटी है मेरे पास " जॉनने कहा.
सॅम चूप था, कभी वह जॉनकी तरफ देखता तो कभी बॉसकी तरफ.
बॉसने जोरसे ठहाका लगाया.
" पॉसीब्लीटी!"
" सर धीस इज नॉट सम काइन्ड ऑफ अ जोक"
बॉसने अपना हंसना रोका.
" देखो , इस शहरमें लगभग 75 हजार मकान है. उसमेंकेही किसी एक मकानमें अगला कत्ल होनेवाला है.. यह पॉसीब्लीटी बतानेके लिए एक मुरखभी काफी है.
" अगला खून जिसका होनेवाला है उसका नाम 'वाय' (Y) इस अक्षरसे शुरु होगा. "
बॉसने फिरसे ठहाका लगाया.
" इज धीस सम काईन्ड ऑफ वर्ड पझल"
इतनी देरसे चूप्पी साधे बैठा हूवा सॅम हिम्मत करके बोला.
"सर मुझे लगता है... वुई शुड लिसन थरोली व्हाट हि वांट टू से"
सॅम बिचमें बोला हूवा बॉसको अच्छा नही लगा ऐसा लग रह था. .
" ओ... हो... सॉरी ... मै तो पुरी तरह भूल गया की यह केस तूम हॅन्डल कर रहे हो..." बॉसने उसे ताना मारा.
" सर, मेरा मतलब ... आखीर आपही हमारे बॉस हो... मैनेतो सिर्फ सलाह दी थी ... आखीर क्या डीसीजन लेना है वह आपकाही अधिकार है... ..." सॅम शर्मींदा होकर बोला.
बॉसका 'इगो' सॅटिसफाय हूवा ऐसा लग रहा था. .
बॉस एकदम सिरीयस होगया. कॅबीनमें सन्नाटा छा गया. बॉसने नई सिगार सुलगाई और कुर्सीपर रेलते हूए बोला,
" ओ के देन कॉल द मिटींग"
क्रमश:..
|
उपन्यास - अद्-भूत The horror, suspense, thriller online Hindi Novel based on my english screenplay 'Latched' registered with FWA. |
Friday, February 29, 2008
Ch-48: ओके देन कॉल द मिटींग (शून्य-उपन्यास)
Posted by
Sunil Doiphode
at
9:59 AM
1 comments
Labels: hind, hindi indi blog, hindi indian blog, indi blog, indi novel, india literature blog, indian blogs, indian literature blog, indian novel blog, subscribe free indian novel, subscribe indian blog
Thursday, February 28, 2008
Ch-47: यस्स ! (शून्य-उपन्यास)
अँजेनी कॉफी लेकर आयी. जॉन अभीभी काम्प्यूटरपर काम कर रहा था. उसने एक कॉफीका कप धीरेसे, उसे डीस्टर्ब ना हो इसका खयाल रखते हूए, उसके सामने रख दिया.
अपने कपसे एक घूंट लेते हूए वह बोली , " क्या कुछ मिला ? "
उसके बोलनेके दो उद्देश थे. एकतो उसके सामने रखे कॉफीके कपकी तरफ उसका ध्यान जाए और दुसरा सचमुछ उसे कुछ मिला की नही यह जानना.
जॉनने पहले अँजेनीकी तरफ और फिर कॉफीकी कपकी तरफ नजर डाली. और आजूबाजू कुछ ढूंढनेजैसा देखने लगा.
" क्या चाहिए ? " अँजेनीने पुछा.
" कोई कागज, नोटबूक या कुछ लिखनेके लिए है क्या ? "
अँजेनी हॉलमें गई. जॉनने उसके सामने रखे कॉफीका एक घूंट लिया और कॉफीका कप फिरसे वही वापस रखते हूए वह फिर अपने काममे व्यस्त हूवा. इतनेमें अँजेनी एक डायरी लेकर वहा आ गई. उसने वह डायरी खोलकर जॉनके सामने रख दी और पेन अपने हाथमें पकडकर वह हाथ उसके सामने ले गई. डायरी रखनेकी आहट होतेही उसने उधर देखा और अँजेनीके पाससे पेन लेकर वह डायरीपर कुछ लिखने लगा.
अँजेनीने अपने कॉफीका घूंट लेते हूए उसके कंधेपरसे झूककर वह क्या कर रहा है यस समझनेकी कोशीश की.
अचानक जॉनने अपने दायें हाथ की मुठ्ठी कसकर बनाते हूए विजयी स्वरमें चिल्लाया -
"यस्स्"
वह झटसे कुर्सीसे उठकर खडा हूवा. उसे शायद खुनके बारेमें या कातीलके बारेमे कुछ जानकारी मिली होगी.
" क्या ? कुछ मिला ?"
अँजेनीका चेहरा खिल गया था.
" इधर देखो, उस सिरीयल किलरने सबसे पहले सानीका खून किया"
सानीका जिक्र होतेही अँजेनीका खिला हूवा चेहरा मुरझासा गया.
" दुसरा जिसका कत्ल किया उसका नाम था - हुयाना"
अँजेनी उसे क्या कहना है यह समझनेके लिए कभी वह क्या बोल रहा है वह सुनती थी तो कभी उसने डायरीपर क्या लिखा है वह पढती थी.
"तिसरा कत्ल हूवा उस शख्स का नाम था उटीना और हालहीमें जो चौथा खुन हूवा उसका नाम था नियोल '
" तो फिर ? " प्रश्नार्थक मुद्रामें अँजेनीके खुले मुंह से निकल गया.
" और अब जो पाचवा खून होनेवाला है उसका नाम 'वाय' (Y) इस अक्षरसे शुरु होना चाहिए'
" यह तुम कैसे कह सकते हो ? "
फिर जॉनने सामने रखी डायरी और इंटरनेटकी कुछ जानकारी अँजेनीको दिखाकर वह उसके सामने कत्लका एक एक रहस्य खोलने लगा. जैसे जैसे एक एक रहस्य खुलता था वैसे वैसे उसकी आखोंमे आश्चर्य दिखने लगता.
क्रमश:..
Posted by
Sunil Doiphode
at
9:49 AM
0
comments
Labels: hindi 2008, hindi book catalog, hindi catalog, hindi catalog 2008, hindi list, hindi liteeature, hindi litefature, hindi litegature, hindi litetature, hindi nothern, hindi novel list, hindi sahitya
Wednesday, February 27, 2008
Ch-46: गुगल सर्च (शून्य-उपन्यास)
एकदम हताश, निराश, बुझा हूवा चेहरा लेकर जॉन अॅँजेनीके सामने बैठा था.
" साला ब्लडी बॉस. ..उसने मुझे दगा दिया. " जॉन गुस्सेसे टेबलपर अपनी कसी हूही मुठ्ठी जोरसे मारते हूए बोला.
अॅँजेली उठकर जॉनके पास गई और उसे सहलाते हूए उसके बालोंमे अपना हाथ फेरने लगी.
'' ऐसा लगा की बंदूक सरेंडर करनेके पहले बंदूक की नाल उसके कनपटीमे रखू और सब की सब गोलीयां दाग दूं उसके मस्तकमें ' जॉन फिरसे गुस्सेसे बोला.
अॅँजेलीने उसके बालोंसे अपना हाथ निकाल लिया. और उसके सामने खडी होकर उसे समझानेके सुरमें बोली, '' देखो जॉन, बॉसपर चिढकर कुछ नही होनेवाला ... बॉसने जोभी किया अपनी चमडी बचानेके लिए. उसकी जगह कोईभी होता तो शायद वह वही करता. "
" नही ... पहलेसेही वह मेरे उपर खफा था... वह मौकेकी तलाशमेंही था और कभी ना कभी वह दगा देने वाला था. " जॉनने उसे तोडते हूए कहा.
" लेकिन बॉसने तुम्हे दगा दिया और उसके लिए तुम्हे क्या करना चाहिए यह बात अब उतनी महत्वपुर्ण नही रही. "
जॉनने उसकीतरफ प्रश्नार्थक मुद्रामें देखा.
" तूम तुमपर लगे आरोप कैसे निकाल सकते हो यह अब सबसे महत्वपुर्ण है."
" मुझ पर लगे आरोप मै कैसे निकाल सकता हूं ?" जॉनने निराशायुक्त स्वरमें कहा.
" तुमपर लगे आरोप निकालनेका अब एकही रास्ता है "
जॉनने फिरसे उसकी तरफ प्रश्नार्थक मुद्रामें देखा.
" ... और वह है खुनीको पकडना " उसने जॉनको मानो रास्ता दिखानेकी कोशीश करते हूए कहा.
" पर वह कैसे मुमकीन है ? मेरे सब अधिकार , शस्त्र उन्होने निकाल लीये है. अब अगर मैने प्रयास कीया भी तो भी वह पर टूटे परींदेने आसमानमें उंची उडान भरनेकी कोशीश करने जैसा होगा. "
" नही. ऐसा एकदम हताश होकर नही चलेगा. यह सच है की अब काम बडा जोखीम भरा हो गया है. लेकिन तुम्हारे पास उसके सिवा कुछ चारा भी तो नही है'
जॉन कुर्सीसे उठ गया और खिडकीके पास जाकर खडा हो गया. उसे बाहर रात के अंधेरेमें आसपासके लाईटस की रोशनीमें चमकता हूवा गोल तालाब का पाणी दिखाई दिया.
एकदम शांत ना हलचल ना कोई आवाज...
उस चंचल पाणीको मानो तालाबके किनारोंने बांधा हूवा लग रहा था... .
उसे लग रहा था की शायद उसकी अवस्थाभी कुछ उस पाणी जैसीही थी....
वह गोल तालाबका किनारा देखकर उसे फिरसे शुन्यका खयाल आया. वह स्तब्धतासे काफी समयतक उस तालाबकी तरफ एकटक देखता रहा.
फिर धुमकर वह धीरेसे अँजेनीके पास जाकर खडा हो गया. काफी समयकी चुप्पीके बाद उसेने अँजेनीको एक सवाल पुछा,
" झीरोकी खोज किसने की यह तुम्हे पता है क्या ?"
ईस अचानक सवालसे गडबडाकर अँजेनीने कहा " नही ... लेकिन क्यो?"
जॉन फिरसे खिडकीके पास गया. सोचमें डूबकर वह फिरसे खिडकीके बाहर देखने लगा. फिर बेचैन होकर वह कमरेमे चहलकदमी करने लगा.
अँजेनी उसके दिमागमें क्या चल रहा होगा यह समझनेका प्रयास करती हूई उसके तरफ देखने लगी. लेकिन अँजेनीको उसके खयालोंका कुछ अंदाजा नही हो रहा था.
अचानक रुककर कॉम्प्यूटरकी तरफ निर्देश करते हूए उसने कहा,
"अँजी, जरा वह कॉम्प्यूटरतो शुरु करो"
" कॉम्प्यूटर... किस लिए?" अँजेनीने पुछा.
वह कुछ नही बोला. फिरसे बेचैनीसे कमरेमे चहलकदमी करने लगा. अँजेनी कॉम्प्यूटरके पास गई और उसने कॉम्प्यूटर शुरु किया.
जॉन अपनी चहलकदमी रोककर उसकेपास जाकर कॉम्प्यूटरके सामने बैठ गया और कॉम्प्यूटर बूट होनेकी राह देखने लगा. अँजेनी मॉनिटरकी तरफ देखते हूए कॉम्प्यूटर बूट होनेकी राह देखने लगी.
कॉम्प्यूटर बूट होतेही एकदम शांत था जॉन अचानक हरकतमे आगया. जॉन तेजीसे कीबोर्डकी बटन्स और माऊसकी बटन्स दबाने लगा.
अँजेनीने उससे कुछ ना बोलते हूए शांत रहनाही बेहतर समझा. वह कॉम्प्यूटरके स्क्रीनपर वह क्या कर रहा है यह देखने लगी.
जॉनने पहले इंटरनेट कनेक्ट किया. फिर ब्राऊजरपर डबल क्लीक किया.
ब्राऊजर ओपन होतेही उसने उस ब्राऊजरके 'अॅडेस' के जगह टाईप किया.
"गुगल डॉट कॉम"
गुगल सर्च इंजीनकी साईट ओपन हो गई.
गुगलमें उसने सर्च स्ट्रींग टाईप की.
"झीरो इन्व्हेन्शन"
जॉनके दिमागमें क्या चल रहा था यह सब अब अँजेनीके खयालमें आने लगा था.
" हां, मुझेभी लगता है... शून्यकी खोज किसने की ? इस सवालमेंही कातील कौन है ? और वह कत्ल क्यो कर रहा है ? इन सवालोंका जवाब छिपे होगे. " अँजेनी उत्साहसे बोली.
जॉनका तेजीसे की बोर्ड और माऊसकी बटन्स दबाना शुरुही था. की बोर्ड और माऊसकी बटन्स की आवाजसे उसका दिल मानो भर आने लगा था. हमेशा सानी जब ऐसाही कॉम्प्यूटरपर बैठकर काम करता था और ऐसाही की बोर्डका और माऊसका आवाज आता था तब उसे ऐसाही होता था.
वैसीही भावना अब उसे जॉनके बारेमेंभी लगने लगी थी...
चलो एक तो ठिक हूवा जॉन नये जोशके साथ फिरसे काम करने लगा है ...
उसे बहुत अच्छा और हलका हलका महसुस हो रहा था.
" तूम तुम्हारा चलने दो. मै एक गरम गरम मस्त कॉफी लाती हूं " ऐसा कहते हूए अँजेनी किचनमें चली गई.
क्रमश:...
Posted by
Sunil Doiphode
at
11:14 AM
0
comments
Labels: hindi kiterature, hindi ligerature, hindi lirerature, hindi litertaure, hindi liyerature, hindi lkterature, hindi loterature, hindi luterature, hindi miterature, hindi piterature, hindi sahitya
Tuesday, February 26, 2008
Ch-45: आय ऍम सॉरी (शून्य-उपन्यास)
बॉस पत्रकाररोंकी भीडसे जो छूटा तो सिधा 'खाट..खाट' जुतोंका आवाज करते हूए अपने कॅबीनकी तरफ निकल पडा. जॉनभी पत्रकारोको टालते हूए भीडसे बाहर आ गया और बॉसके पिछे पिछे चल पडा.
बॉस ऐसा भी धोखा दे सकता है...
पिछले बारभी सब बॉसनेही रिपोर्टरोंके सामने बताया. उसमें जॉनका कुछ भी हाथ नही था... वैसे देखा जाए तो बॉसनेही लगभग जबरदस्ती उसे छुटीपर भेजा था...
जॉनको बॉसका बहुत गुस्सा आ रहा था.
हर बार डिक्टेटरशीप करनेकी और कुछ गलत हूवा तो किसीकोतो भी फसानेका...
जॉन बॉसका काम करने का तरीका अब समझने लगा था.
जॉनकोही क्या किसीकोभी यह हजम ना होनेवाली बात थी. जॉन तेजीसे बॉसके पिछे पिछे जाने लगा. उसे बॉससे सफाई लेनी थी.
बॉस उसके कॅबिनके पास आकर पहूंचा. जॉन बॉसके पिछेही था. बॉसको जॉनकी आहट आई होगी या फिर जॉन उसके पिछे पिछे आएगा इसका अंदाजा हूवा होगा. कॅबिनके अंदर जानेके पहले अचानक ब्रेक लगेजैसा बॉस एकदम रुका. उसके पिछे जॉनभी रुका. बॉस पिछे पलटकर धीरे धीरे जॉनके पास आने लगा. जॉनके एकदम सामने आकर वह रुका. अब वह जॉनके सामने खंबीरतासे खडा होकर उसकी आंखोमे आंखे डालकर देखने लगा. जॉन अभीभी गुस्सेमे था. वह भी गुस्सेसे बॉसके आंखोसे आंखे मिलाकर देखने लगा.
" ऐसे क्या गुस्सेसे देख रहे हो? मुझे क्या खावोगे?" बॉस जॉनपर चिल्लाया.
बॉस अपनी हमशाकी ट्रीक आजमा रहा था. लेकिन इस बार जॉन बिलकुल विचलीत नही हूवा.
फिर एकदमसे बकरी बनकर बॉसने जॉनके कंधेपर अपना सांत्वनाभरा हाथ रख कर कहा,
" आय अॅम सॉरी जॉन. वक्त ही कुछ ऐसा था की मै कुछ नही कर सका "
इस बार जॉन गडबडायाभी नही. वह अभीभी बॉसकी आंखोसे आंखे मिलाकर गुस्सेसे एकटक देख रहा था. बॉसको अहसास हूवा की उसकी ट्रीक काम नही आई थी.
" आय अॅम रिअली सॉरी " बासॅने जॉनका कंधा थपथपाकर अपना हाथ पिछे लिया.
बॉस एकदमसे मुडकर फिरसे 'खाट खाट' ऐसा जुतोंका आवाज करते हूए कॅबिनमें घुस गया. बॉसने एक तिरमें दो निशाने साधे थे. पुलिस डिपार्टमेंटको लोगोंकी नजरोंसे निचा होनेसे बचाया था और जॉनको बरबाद कर डिपार्टमेंटमें अपना खौफ और महत्व और मजबुतीसे बढाया था.
क्रमश:...
Posted by
Sunil Doiphode
at
10:18 AM
0
comments
Labels: इंडीया, भारत, भारतिय, साहित्य, हिंदी, हिंदुस्तान, हिंदोस्तान, हिंन्दी, हिन्दी
Monday, February 25, 2008
Ch-44: एक तिर दो निशाने (शून्य-उपन्यास)
जॉनका बॉस और जॉन जैसेही रिपोर्टरोंको आते हूए दिखाई दिए, उनकी भिड उनकी दिशामें उमड पडी. बिजली चमकने जैसे कॅमेरोंके फ्लॅश उनके चेहरेपर पडने लगे. वहां खडे पुलिसने एक बडा घेरा बनाकर रिपोर्टर लोगोंको काबूमे रखनेकी कोशीश की. तोभी पिछे सब गडबड चल रही थी.
" क्वायट प्लीज" बॉसका कडा स्वर गुंजा.
सब तरफ सन्नाटा छाया. कुछ रिपोर्टर आगे आनेके लिए अधीर होकर गडबड करने लगे थे. बॉसने आत्मविश्वासके साथ चारोतरफ एक नजर डाली.
" यस्स" बासने रिपोर्टरोंको सवाल पुछनेके लिए इशारा किया.
सामने खडे रिपोर्टरकी भीड गडबड करने लगी. बॉसको सिर्फ शोर सुनाई दे रहा था. कौन क्या पुछ रहा था कुछ समझ नही आ रहा था.
" आय वुईल इन्शोर दॅट दी लास्ट पर्सन इज ऑल्सो अॅन्सर्ड... वन बाय वन प्लीज" बॉसने खंबीरतासे कहा.
जॉनने आश्चर्यसे बॉसकी तरफ देखा. उसे बॉस इतना बिनदास कैसे रह सकता है इसका आश्चर्य हो रहा था.
" तुम्हारा वह खुनीतो मर गया था... फिर क्या अब फिरसे जिवीत हो गया है.. ?" एक पत्रकारने व्यंग और आवेशसे से कहा.
" पुलिस डिपार्टमेंट लोगोंको इतना गुमराह करेगी इसकी अपेक्षा नही थी. " दुसरेने कहा.
" इतना होनेके बादभी बेशरमोंकी तरह लोगोंके सामने जानेकी तुम्हे हिम्मत कैसे होती है? " तिसरा चिढकर अपने आपेसे बाहर होता हुवा बोला.
" माईंंड यूवर लँगवेज" बॉस चिल्लाया.
बॉसने एकदम अपने तेवर बदले थे. जॉनभी एक पलके लिए चौंक गया. पुलिसका पलडा कमजोर होते हूए भी बॉस ऐसे कैसे बर्ताव कर सकता है इस बातका जॉनको आश्चर्य लग रहा था.
सब तरफ सन्नाटा छा गया.
' देखो... पिछलीबार हमारी गलती हूई इस बातसे मै इनकार नही करता... कातील एकसे जादा हो सकते है यह बात हमने सोचीही नही... '' बॉस फिरसे अपने तेवर नरम करते हूए एकदम हिन दिन होकर बोल रहा था.
बॉसकी यह स्टाईलही थी. पहले एकदम हमला करनेका और फिर दुसरेही पल एकदम बकरीकी तरह नरम रुख अपनानेका. इसकी वजहसे पहले तो सामनेका आदमीको अनपेक्षीत धक्का लगता है और बादमे वह गडबडा जाता है. वैसेही हूवा. पहले सब रिपोर्टरोंको गहरा धक्का लगा और वे एकदम शांत हो गए और दुसरेही पल गडबडा गए. इतनेकी उन्हे बॉसची दया आने लगी थी. लेकिन आखीर वे रिपोर्टर थे - चार घाटका पाणी पीने वाले. बॉसके डिपार्टमेंटके कोई उसके एहसानमंद पदाधिकारी नही थे. जल्दीही वे संभल गए और उन्होने बॉसपर फिरसे हल्ला बोल दिया.
" तुम लोग लोगोके रक्षक, लोगोका हित देखने वाले. तुम लोगोंपर लोगोंकी जिम्मेवारी होती है... तुम लोग ऐसे माफी मांगकर अपने हाथ नही झटक सकते. "
" और अभीभी इस केसका क्या प्रोग्रेस है? की जहांसे शुरु हुवा था फिरसे वही " कोई बोला.
" शून्य गोल होने जैसा " किसीने आगे जोड दिया.
लोगोमें थोडी व्यंगपुर्ण हंसकी लहर दौड गई.
" तुम माफी मांगकर ऐसे चूप नही बैठ सकते. तुम्हे कुछतो अॅक्शन लेनीही पडेगी"
बॉसको बोलनेके लिए कोई चान्स नही दे रहा था.
" और वहभी अब सबके सामने तुम्हे ऐलान करना पडेगा. "
" हां .. हां अभी सबके सामने... " बाकी बहुतोंने हांमे हां मिला दी.
अब बॉसके पसीने छूटने लगे थे. सामने रिपोर्टर उसे ऐसेही जाने देनेके मुडमें नही थे. बॉसकी ट्रीकभी कुछ चली नही थी. पर उतनेही जोरसे बूमरँगकी तरह उसपरही पलट गई थी.
" जस्ट अ मिनिट प्लीज" बॉसनं हाथ उपर कर लोगोंको शांत होनेके लिए कहा.
रिपोर्टर थोडे शांत हूए.
" मै मेरा अॅक्शन प्लान तुम लोगोंके सामने जाहिर करने वाला हूं "
बॉसका बोलना पुरा होनेके पहलेही कुछ लोग उसके बोलनेको बिचमेंही तोडकर चिल्लाए .
" अभी यहां... पहलेजैसी आनाकानी नही चलेगी. "
बॉसकी अब चक्रव्यूहमें फसे अभिमन्यूजैसी दशा हूई थी.
" हां ... हां अभी यही मै मेरा अॅक्शन प्लान जाहिर करने वाला हूं " बॉस नरम लहजेमें अपने चेहरेपरका पसिना पोंछते हूए बोला.
अब कहां रिपोर्टर एकदम शांत हूए - बॉसका अॅक्शन प्लान क्या है यह सुननेके लिए. सब रिपोर्टरोंने अपने मायक्रोफोन्स जितने हो सकते है उतने सामने घुसाए.
" नंबर एक. पुलिस लोगोंके रक्षक होते है... और लोगोंका उनपर पुरा विश्वास होता है... उनका हमपरका विश्वास टूटना नही चाहिए इसलिए पुलिसको गलती हूई ऐसा सिर्फ स्वीकार करके नही चलेगा. उसके लिए उन्हे बडीसे बडी सजा मिलनी चाहिए.. ताकी ऐसी गल्ती वे फिरसे नही दोहरानेकी हिम्मत नही करेंगे "
जॉनने गडबडाकर बॉसकी तरफ देखा. बॉस पुलिसकेही खिलाफ बोल रहा था.
अपनी सुननेमें तो गलती नही हो रही है...
या फिर बॉसकी बोलनेमें कोई गलती हो रही होगी...
" और इसलिए इसी वक्त मैने एक महत्वपुर्ण निर्णय लिया है..."
अपना निर्णय बयान करनेके पहले बॉसने जानबूझकर एक बडा पॉज लिया, ताकी उसके निर्णयसे उसे जो रिपोर्टरोंपर इफेक्ट करना था वह ठिक ढंगसे हो. सब तरफ सन्नाटा छा गया.
" और मेरा निर्णय यह है की जिनकी वजहसे गलती होगई उनको इमीडीएटली सजा दी जाए. इसलिए सबसे पहले मै एक समितीका गठन करता हू. वह समिती इस सब गडबडीयोंका और गलतियोंकी पुरी तफ्तीश करेगी. और जिनकी वजहसे यह गलती हो गई है उस ऑफीसरको इस समितीका रिपोर्ट आनेतक बडतर्फ करनेका मै ऐलान करता हूं. "
जॉनको खडे खडे मानो धरणीकंप हूवा हो ऐसा लगा. जॉन आश्चर्यसे उसके बॉसकी तरफ देखने लगा. लेकिन बॉसका खयाल उसकी तरफ कहां था.!
" और उस जगह तबतक आगेकी इन्व्हेस्टीगेशनके लिए मै इसी वक्त दुसरा काबील ऑफिसर नियूक्त कर रहा हूं "
जॉन उसके बॉसका यह रूप पहली बार देख रहा था. वह अभीभी आश्चर्यसे बॉसकी तरफही देख रहा था. अचानक जॉनके आश्चर्यसे बॉसकी तरफ देख रहे चेहरेपर कॅमेरेके फ्लॅश चमकने लगे. अब रिपोर्टरोंने अपना रुख जॉनकी तरफ किया था. बॉसने इस मौके फायदा उठाया और रिपोर्टरोंका रुख जॉनपर होता देखकर वह वहांसे दबे पाव खिसक गया.
क्रमश:...
Posted by
Sunil Doiphode
at
10:11 AM
0
comments
Labels: free hindi, free hindi ebook, hindi best, hindi enovels, hindi ghazalsm hindi book, hindi new, hindi new bok, hindi novels, hindi romance, hindi story, new hindi, short story in hindi
Saturday, February 23, 2008
Ch-43: फिरसे प्रेस कॉन्फरन्स (शून्य-उपन्यास)
जॉन उसके बॉसके कॅबिनमें उनके सामने बैठा था. कॅबिनमें वे दोनोही थे. काफी देर तक दोनोमें एक अनैसर्गीक चुप्पी छाई हूई थी.
"अलेक्सकाभी पोस्टमार्टम रिपोर्ट आया है. " जॉनने उसके सामने रखे फाईलके कुछ पन्ने पलटते हूए कहा.
जॉनका बॉस आरामसे कुर्सीपर बैठकर सिगार पीते हूए शांतीसे जॉनको सुन रहा था.
" मृत्यूका कोई कारण नही पता चल रहा है.' जॉनने कहा.
उसके बॉसने मुंहमेसे सिगार निकालकर सामने रखे अॅश ट्रेमे उसकी राख झटकी.
" लेकिन मुझे यकिन है की उसे इन्शुलिनका ओवरडोज देकर मारा गया होगा. ... इन्शुलीनके ओवरडोजसे ऐसाही होता है. पोस्टमार्टममें मृत्यूका कोई कारण नही मिलता और कुछ साबीतभी नही किया जा सकता. ... कभी कभी तो वह कत्ल है या नैसर्गिक मृत्यू यहभी पता नही चल पाता.
जॉनका बॉस कुर्सीसे उठ गया और सिगार पिते हूए खिडकीसे बाहर देखने लगा. फिर पलटकर उसने जॉनसे कहा ,
" देखो जॉन हम यहा नियोलके कत्लके सिलसिलेमे बैठे है... तूमने बिचमेंही इस अलेक्सका क्या लगा रखा है..."
" क्योंकी उसकाभी इस खुनसे संबध है.." जॉन खंबीरतासे बोला.
" उसका इस कत्लसे क्या वास्ता ? तुम पागल तो नही हूए ? वह साला अॅलेक्स कैसे मरा कुछ भी पता नही... और तुम उसको इस केससे जोड रहे हो. " बॉस चिढकर बोला.
" संबंध है इसलिए जोड रहा हू" जॉन आवाज चढाकर बोला.
" अॅलेक्सको शायद उस कातिलका पता चल चूका था... इसलिए उसने अलेक्सकाही खातमा कर डाला.
इतनेमें एक पियून अंदर आगया. पियूनके आहटसे दोनोंका संवाद रुक गया. दोनोंने उस पियूनकी तरफ देखा. पियूनने बॉसके पास जाकर झूककर कहा,
" साहब , बाहर रिपोर्टर लोगोंकी भीड जमा हो गई है."
पियूनने पैगाम दिया और वह वहांसे चला गया.
" रिपोर्टर इस वक्त ? इन लोगोंका क्या दिमाग खराब हो गया है ?.." जॉनका बॉस आश्चर्यसे बोला.
" साले यहां वहां जमा हो जाते है... इनको सिर्फ खबर चाहिए...कौन मरा, कैसे मरा इसका इनको कुछ लेना देना नही होता... " बॉस चिढकर बोला.
" मैनेही शामको प्रेस कॉन्फरंन्स है ऐसा एलान किया था" जॉनने कहा.
" प्रेस कॉन्फरंन्स? तूमने ऐलान किया?... अब यह तो खुदके पैरपर पत्थर मार लेने जैसा होगया... पहलेही सब लोग और मिडीया भडकी हूई है. अब ये लोग हम सबको कच्चा चबा जाएंगे. यह फालतूका काम करनेके पहले तुमने किसको पुछा?"
अब बॉस जॉनपर बहुत आगबबुला हो गया था.
" सर सुबह उनको टालनेके लिए मेरे मुंहसे निकल गया" जॉन अपना बचाव करते हूए बोला.
" मुंहसे निकल गया? मतलब गलतीया तुम करते जावो और निपटना हमें पडे " बॉस कडे स्वरमें बोला.
" सर ... पिछले बार अगर मैने कहा वैसा अगर आप मानते तो यह नौबत हमपर नही आती. " अब जॉनभी अपना आपा खोने लगा था.
" तुम्हे क्या लगता है? पिछली बार तुम्हारा अगर मैने सुना होता तो यह जो नौबत आई है वक कबकी आ चूकी होती... तूमने इन्वेस्टीगेशनमें इतना वक्त लगाया इस बातको जादा उछाला नही जाए उसकी मैने भरसक कोशीश की थी. वैसे तुम्हे मैने ऑप्शन भी दिया था. जल्द से जल्द कातिलका पता लगावो या तुमसे होता नही ऐसा कहकर कमसे कम दुसरेकोभी तो करने दो."
जॉनको क्या बोला जाए कुछ सुझ नही रहा था.
जॉन थोडा नरम रुख अपनाकर बोला " लेकिन अब उन्हे क्या बताया जाये?"
" तुम उसकी चिंता मत करो ... मै सब संभाल लूंगा " बॉसनेभी गिरगटकी तरह अपना रंग बदलते हूए जॉनको तसल्ली देनेके लहजेमें कहा.
बॉसकी तसल्लीसे जॉनको थोडा सुकुन पहूंचा.
बॉसने सिगार सामने रखे अॅश ट्रेमें मसलकर बुझाई और कुर्सीसे उठते हूए बोला "चलो... मेरे साथ"
बॉस उठकर खुले दरवाजेसे 'खाट खाट' जुतोंका आवाज करते हूए बाहर निकल गया और उसके पिछे जॉन चूपचाप चलने लगा.
क्रमश:...
Posted by
Sunil Doiphode
at
10:45 AM
0
comments
Labels: hindi, hindi blog, Hindi blogspot, hindi movies online, hindi novel, hindi novel online, hindi online novel, hindi websites, online hindi novel, online hindi novels, story online
Friday, February 22, 2008
Ch-42: शुन्यकी खोज किसने की ? (शून्य-उपन्यास)
लिफ्टसे बाहर आकर जॉन फ्लॅट क्रमांक 3 की तरफ जाने लगा. फ्लॅटके खुले दरवाजेके सामने देखनेवालोंकी भीड जमा हूई थी. कुछ रिपोर्टरभी वहां इधर उधर घुम रहे थे. वहा बाहर दरवाजेके पास खडे पुलीस सुस्ताए हूए लग रहे थे. जॉनको देखतेही वे सुस्ताए हूए पुलिस सतर्क होकर हरकतमे आए. वे कुछ कारण ना होते हूए वहा खडे लोगोंको और रिपोर्टरोंको डांटते हूए वहासे भगाने लगे. जॉनको देखतेही वे रिपोर्टर जॉनके सामने आकर उसका रास्ता रोककर खडे हूए. वहा खडे और जॉनके पिछे आए पुलिसने उन्हे लगभग पकडकर बाजू हटाया. जॉन सिधा अंदर चला गया.
अंदर हॉलमें इन्व्हेस्टीगेशनके लोग अपने काम मे व्यस्त थे. जॉन उन्हे डिस्टर्ब नही होगा इसकी सावधानी बरतते हूए बेडरुमकी तरफ चला गया. बेडरूममें सॅम था. जॉनको देखतेही वह जॉनके सामने आया.
" साला कुछभी पत्ता नही चल रहा है " सॅम जॉनको कुछतो बोलना है ऐसे बोला.
' अपनेही डिपार्टमें अगर छेद हो तो कैसे पता चलेगा' जॉनने चिढकर तिरछे अंदाजमें कहा.
जॉनका मूड देखकर सॅमने चूप रहनाही बेहतर समझा. .
बेडरूममे फर्शपर खुनसे लथपथ नियोल वॅग्नरका शव पडा हूवा था. नियोल लगभग पच्चीसके आसपास, एक आकर्षक व्यक्तीत्व का युवक था. वह फ्लॅटमें शायद अकेलाही रह रहा होगा. मतलब फ्लॅटमेंके उसके सामानसे और अबतक उसके बारेमें पुछनेके लिये उसका कोई नही आया था, इसपरसे कमसे कम ऐसाही लग रहा था. नियोलके पेटपरसे बहकर फर्शपर उसका खुन जम गया था. उस तरफसे पिठके निचेसे बहकर एक खुन की धार बाहर आई थी. नियोलके शरीरपर बंदुककी गोलीयोंकी निशानियां तो थी ही साथमे चाकुकी वार की हूई निशानीयां थी. नियोलका मुहं आधा खुला और सर एक तरफ ढूलका हूवा था. जान जानेके पहले वह बहूत तडपा होगा ऐसा लग रहा था. और उसके शरीरपर उसके ऑफिसके या फिर बाहर जानेके लिए पहने रेग्यूलर कपडे थे.
इस परसे लग रहा था की खुनी शायद उसके पिछे पिछेही घरमें घुस गया होगा...
मतलब यह भी एक संभावना!...
कमरेमेंका, नियोलके शरीरपरका, उसके जेबमें जो था वह सब सामान जैसेके वैसा सही सलामत था.
सब मतलब जो किमती था वह...
बाकी कुछ सामान खुनी ले गया था या नही कुछ पता नही चल रहा था. जॉनको अबतकके अनुभवसे पता था की कुछ कातील सभी किमती सामान नही ले जाते. कुछ सामान वे पुलिसको गुमराह करनेके लिए वही छोड जाते है. और उपरसे नियोल अकेला होनेसे कातील क्या ले गया और क्या छोड गया यह समझनेके लिए कोई रास्ता नही था.
नियोलपरसे हटकर जॉनका ध्यान सामने खुनसे भरे दिवारकी तरफ गया.
फिर वही ...
खुनसे निकाला हूवा बडासा शुन्य... शुन्यही था वह...
और उस शुन्यमे कातील छीपा हूवा था...
लेकिन शून्यका मतलब होता है कुछ भी नही...
फिर उसमें कातील कैसा छिपा होगा ?...
शून्यके बिचोबिच खुनसे लिखा था -
" शून्याकी खोज किसने की ?"
फिर इस सवालमे जरुर कातील छिपा होगा ...
जॉन सोचने लगा.
जॉनको अब यह सब गुथ्थी सुलझानेकी सख्त जरुरत महसुस होने लगी थी.
उसने बोलातो सही था की 'शामको प्रेस कॉन्फरंसमे सब बताऊंगा' करके.
लेकिन कमसे कम अभीतो उसकेपास बोलनेके लिए कुछ नही था. मतलब कमसे कम शामतक खुनीका पता लगना जरुरी था.
क्रमश:...
Posted by
Sunil Doiphode
at
10:56 AM
0
comments
Labels: hindi 10 best novel, hindi author, hindi history novel, hindi online book, hindi online romance nov




