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Hindi Entertainment - Novels - अद-भूत / Aghast CH 32 और एक मोड / One more twist

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सॅम और उसका पार्टनर जिस पुलीस अधिकारीने जॉन कार्टरके मौतकी केस हॅंडल की थी उस अधिकारी, डिटेक्टीव टेम्पलटन के सामने बैठे थे.

डिटेक्टीव टेम्पलटन जॉन कार्टरके बारेमें जानकारी देने लगा, '' मदिराके अतिसेवनकी वजहसे उसे ब्रॉंकायटीस होकर वह मर गया... ''

'' लेकिन आपको उसकी पहचान कैसे मिली ? '' सॅमने पुछा.

'' जिस कमरेंमे उसका मृतदेह मिला उस कमरेमें कुछ उसके कागजादभी मिले... उससे हमें उसकी पहचान हो गई... और उसका एक फोटो डिटेक्टीव्ह बेकरने जैसे सारे पुलिस थानोंपर भेजा था वैसा हमारे पास भी भेजा था....''

टेम्पलटनने अपने ड्रावरसे जॉनका फोटो निकालकर सॅमके सामने रखा.

'' इस फोटोकी वजहसे और डिटेक्टीव बेकरने भेजे जानकारीके वजहसे हमें उसका ऍड्रेस और घर वैगेरा मिलनेमें मदद हो गई. '' टेम्पलटनने कहा.

'' आपने उसके घरके लोगोंसे संपर्क किया था क्या ?'' सॅमने पुछा.

'' हां ... उनके घरके लोगोंकोभी यहां बुलाया था. ... उन्होनेभी बॉडी अपने कब्जेमें लेनेसे पहले जॉनकी पहचान कर ली थी और पोस्टमार्टममेभी उसकी पहचान जॉन कार्टर ऐसीही तय की गई है '' टेम्पलटनने कहा.

'' वह कब मरा होगा... मतलब शव मिलनेसे कितने दिन पहले'' सॅमने पुछा.

'' पोस्टमार्टमके अनुसार मार्च महिनेके शुरवातके दो तिन दिनमें उसकी मौत हूई होगी. '' वह अधिकारी बोला.

'' अर्ली मार्च... मतलब पहला खून होनेके बहुत पहले... '' सॅमने सोचकर कहा.

'' इसका मतलब हम जैसे समझ रहे थे वैसे वह कातिल नही है... '' सॅमने आगे कहा.

'' हां वैसा लग तो रहा है... '' टेम्पलटनने कहा.

काफी समय शांतीसे गुजर गया.

मतलब मुझे जो शक था वह सच होने जा रहा है...

सॅमको नॅन्सीका दोस्त जॉन कार्टरका अता पता मिलनेकी खबर उसके पार्टनरसे फोनपर मिलतेही वह बहुत खुश हो गया था.. ...

उसे लगा था चलो एक बारकी बला तो टली... जो केस सॉल्व हो गई... और कातिल थोडीही देरमें उनके कब्जेमें आनेवाला है....

लेकिन यहां आकर देखता हूं तो केसने और एक अलगही मोड लिया था...

जॉन कार्टरके मरनेका समय देखा जाए तो उसका इन खुनोंसे संबंध होनेकी कोई गुंजाईश नही थी...

'' जॉन कार्टर अगर कातिल नही है ... तो फिर कातिल कौन होगा?'' सॅमने जैसे खुदसेही सवाल किया.

कमरेके तिनो लोग सिर्फ एक दुसरेकी तरफ देखने लगे. क्योंकी उस सवालका जवाब उन तिनोंके पास नही था.

इतनेमें टेम्पलटनने उसके ड्रावरसे और एक तस्वीर निकालकर सॅमके सामने रख दी.

सॅमने वह तस्वीर उठाई और वह उस तस्वीरकी तरफ एकटक देखने लगा. उस तस्वीरमें जॉन कार्टर जमीनपर पडा हूवा दिख रहा था और उसके सामने फर्शपर खुनसे बडे अक्षरोंमे लिखा हूवा था,

'' नॅन्सी मुझे माफ करना ... मै तुम्हे बचा नही सका... लेकिन चिंता मत करो मै एक एक को चुनकर मारकर बदला लूंगा ... ''

सॅमको एक अंदाजा हो गया था की यह तस्वीर दिखाकर डिटेक्टीव्ह टेम्पलटन उसे क्या कहना चाहता हो.

'' मै सुन सुनकर थक गया हूं की इस कत्लमें किसी आदमीका हाथ न होकर किसी रुहानी ताकदका हाथ हो सकता है ... यह तस्वीर दिखाकर कही तुम्हेभीतो यही कहना नही है ?'' सॅमने टेम्पलटनको पुछा.

डिटेक्टीव टेम्पलटनने सॅम और उसके पार्टनरके चेहरेकी तरफ देखा.

'' नही मुझे ऐसा कुछ कहना नही है ... सिर्फ घट रही घटनाएं और जॉनने फर्शपर लिखा हूवा मेसेज दोनो कैसे एकदम मिलते जुलते है ... इसी ओर मुझे तुम्हारा ध्यान खिंचना है...'' डिटेक्टीव टेम्पलटनने शब्दोंको तोलमोलकर इस्तेमाल करते हूए कहा.


क्रमश:...

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Novels - अद-भूत / Aghast CH 31 जॉन कार्टर /John Carter

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डिटेक्टीव्ह सॅमने अपने बज रहे मोबाईलका डिस्प्ले देखा. फोन उसकेही पार्टनरका था. एक बटन दबाकर उसने वह अटेंड किया,

'' यस''

'' सर हमें नॅन्सीका दोस्त जॉन कार्टरका पता चल चूका है '' उधरसे उसके पार्टनरका आवाज आया.

'' गुड व्हेरी गुड'' सॅम उत्साहभरे स्वरमें बोला.

सॅमके पार्टनरने उसे एक ऍड्रेस दिया और तुरंत उधर आनेके लिए कहा.


.... जॉन कार्टर बेडपर पडा हूवा था और जोर जोरसे खांस रहा था. उसकी दाढी बढ चूकी थी और सरके बढे हूए बालभी बिखरे हूए दिख रहे थे. न जाने कितने दिनोंसे वह बेडपर इसी हालमें पडा हूवा था. उसका घरसे बाहर आना जानाभी बंद हो चूका था.

जब उसके प्रिय नॅन्सीका बलात्कार और कत्ल हो गया था तब वह इतना निराश और हतबल हो चूका था की उसे आगे क्या करे कुछ सुझ नही रहा था. उन गुनाहगारोंको सजा हो ऐसा उसे तहे दिलसे लग रहा था. लेकिन कैसे वह कुछ समझ नही पा रहा था. ऐसे मायूस और हतबल अवस्थामें वह शहरमें रातके अंधेरेमें पागलोंकी तरह सिर्फ घुमता रहता तो कभी शामको बिचपर जाकर डूबते सुरजको लगातार निहारता रहता. शायद उसे अपनी खुदकी अवस्थीभी कुछ उस डूबते सुरजकी तरह लगती हो. दिन रात पागलोंकी तरह इधर उधर भटकना और फिर थकनेके बाद बारमें जाकर मदीरामें डूब जाना. ऐसे उसकी दिनचर्या रहती थी. लेकिन ऐसा कितने दिनतक चलनेवाला था. आगे आगे तो उसका घुमना फिरनाभी कम होकर पीना बढ गया. इतना बढ गया की अब उसकी तबीयत खराब होकर वह न जाने कितने दिनसे बेडपर पडा हूवा था. बिस्तर पर पडे अवस्थामेंभी उसका पीना जारी था. थोडीभी नशा उतर जाती तो उसे वह भयानक बलात्कार और कत्लका दृष्य याद आता था. और वह फिरसे पीने लगता था.

अचानक उसे फिरसे खांसीका दौरा पड गया. वह उठनेका प्रयास करने लगा. लेकिन वह इतना क्षीण और कमजोर हूवा था की वह उठभी नही पा रहा था. कैसेतो दिवारका सहारा लेकर वह बेडसे उठ खडा हूवा. लेकिन अपना संतुलन खोकर निचे जमिनपर गिर गया. उसका खांसना लगातार शुरु था. खांसते खांसते उसे एक बडा दौरा पड गया और उसके मुंहसे खुन आने लगा. उसने मुंहको हाथ लगाकर देखा. खुन दिखतेही वह घबरा गया.

उठकर डॉक्टरके पास जाना चाहिए...

लेकिन वह उठभी नही पा रहा था.

चिल्लाकर लोगोंको जमा करना चाहिए...

लेकिन उसमें उतनी चिल्लानेकीभी शक्ती बाकी नही थी.

क्या किया जाए ?...

आखिर उसने एक निर्णय मनही मन पक्का किया और वह उसके हाथको लगे खुनसे फर्शपर कुछ लिखने लगा...


एक आदमी फोनपर बोल रहा था, '' हॅलो पुलिस स्टेशन?''

उधरसे जवाब आनेके लिए वह बिचमें रुक गया.

'' साहब ... हमारे पडोसमें कोई एक आदमी रहता है... मतलब रहता था... उसे हमने लगभग सात-आठ दिनसे देखा नही... उसका दरवाजाभी अंदरसे बंद है ... हमने उसका दरवाजा नॉक करके भी देखा... लेकिन अंदरसे कोई प्रतिक्रिया नही है... उसके घरसे लगातार किसी चिजके सडनेकी दुर्गंध आ रही है ... मुझे लगता है आप लोगोंमेसे कोई यहा आकर देखे तो अच्छा होगा.. ''

फिरसे वह उधरके जवाबके लिए रुका और '' थॅंक यू ... '' कहकर उसने फोन निचे रख दिया.

पुलिसकी एक टीम डिटेक्टीव्ह टेम्पलटनके नेतृत्वमें उस आदमीने फोनपर दिए पते पर तत्परतासे पहूंच गई. वह आदमी उनकी राहही देख रहा था. वे वहा पहूंचतेही वह आदमी उनको एक फ्लॅटके बंद दरवाजेके सामने ले गया. वहा पहूंचतेही एक किसी सडे हूए चिजकी दुर्गंध उनके नाकमें घूस गई. उन्होने तुरंत रुमाल निकालकर अपने अपने नाक को ढंक लिया. उन्होने उस दुर्गंधके उगमका शोध लेनेकी कोशीश की तो वह दुर्गंध उस घरसेही आ रही थी. उन्होने दरवाजा धकेलकर देखा. दरवाजा शायद अंदरसे बंद था. उन्होने दरवाजेको नॉक कर देखा. अंदरसे कोई प्रतिक्रिया नही थी. जिस आदमीने फोनपर पुलिसको इत्तला किया था वह बार बार वही हकिकत उन्हे सुना रहा था. आखिर पुलिसने दरवाजा तोड दिया. दरवाजा तोडनेके बाद तो वह सडी हूई दुर्गंध औरही तिव्रतासे आने लगी. मुंहपर और नाकपर कसकर रुमाल लगाकर वे धीरे धीरे अंदर जाने लगे.

पुलिसकी टीम जब बेडरुममें पहूंच गई तब उन्हे सडनेकी प्रक्रिया शुरु हुवा जॉन कार्टरका मृतदेह जमिनपर पडा हूवा मिला. नाकको रुमालसे कसकर ढंकते हूए वे उस डेड बॉडीके पास गए. वहा जमिनपर मरनेके पहले उसने खुनसे कुछ लिखा हूवा दिखाई दे रहा था. उनमेंसे एक पुलिसने वह नजदीक जाकर पढा,

'' नॅन्सी मुझे माफ कर देना... मै तुम्हे बचा नही पाया... लेकिन चिंता मत करो... उन बदमाशोंका ... एक एक करके बदला लिए बिना मुझे शांती नही मिलेगी... ''


क्रमश:...

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Hindi Novels - अद-भूत / Aghast CH-30 किराएदार / Tenant

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पुलिसकी गाडी ट्रफिकमें रास्ता निकालते हूए सायरन बजाते हूए तेजीसे दौड रही थी. और उस गाडीके पिछे और चारपाच गाडीयोंका जथ्था जा रहा था. सायरनके आवाजकी वजहसे ट्रफिक अपनेआप हटकर उन गाडीयोंको रास्ता दे रही थी. उस आवाजके वजहसे और इतनाबडा पुलिसकी गाडीयोंका जथ्था देखकर आसपासके वातावरणमें एक अलगही उत्सुकता और डर फैल गया था. ट्रफिकसे रास्ता निकालते हूए और रास्तेसे तेडे मेडे मोड लेते हूए आखीर वो गाडीयां जॉर्जके घरके आसपास आकर रुक गई. गाडीयोंसे पुलिसकी एक बडी टीम तेजीसे लेकिन एक अनुशाशनके साथ बाहर निकल गई.

'' चलो जल्दी... पुरे एरीयाको घेर लो... क्वीक... कातिल किसीभी हालमें अपने हाथसे निकलना नही चाहिए... ...'' सॅमने अपने टीमको आदेश दिया.

पुलिसका वह समुह एक एक करते हूए बराबर अनुशाशनमे पुरी एरीयामें फैल गया. और उन्होने पुरे एरीयाको चारो तरफसे घेर लिया. इतने बडे पुलिसके समुहके जुतोंके आवाजसे पुरे एरियामें वातावरण तनावपूर्ण हूवा था. आडोस पडोसके लोग कोई खिडकीसे तो कोई पडदेके पिछेसे झांककर बाहर क्या चल रहा है यह कौतुहलयुक्त डरसे देख रहे थे.

दो तिन पुलिसको लेकर सॅम एक घरके पास गया. जिस आदमीने पहले जॉर्जकी कहानी बयान की थी वह संभ्रमकी स्थितीमें वही खडा था.

'' जरा बताईये तो कौन कौनसे घरसे जॉर्जके घरकी सारी हरकते दिखती है और सुनाई देती है...'' सॅमने उस आदमीसे पुछा.

उस आदमीने सॅमको दो-तीन मकानकी तरफ उंगलीसे इशारा करते हूए कहा,

'' वे दो ... और मेरा एक तिसरा..''

'' हमें यह एरीया पुरी तरहसे सील करना पडेगा'' सॅम अपने टीमको उन मकानकी तरफ ले जाते हूए बोला.

सॅमने उन तिन घरोंके अलावा और दो-चार मकान अपने कार्यक्षेत्रमें लिए. एकके बाद एक ऐसे वह हर घरकी तरफ अपने दो-तिन लोगोंको ले जाता और घर अगर बंद हो तो उसे नॉक करता था. कुछ लोग जब दरवाजा खोलकर बाहर आते थे तो उनके चेहरेपर आश्चर्य और डरके भाव दिखाई देते थे. बिच-बिचमें सॅम अपने साथीदारोंको वायरलेसपर दक्ष रहनेके लिए कहता था. ऐसे एक एक घरकी तलाशी लेते हूए वे आखीर एक मकानके पास पहूंच गए. दरवाजा नॉक किया. काफी देरतक रुकनेके बाद अंदरसे कोई प्रतिक्रिया दिख नही रही थी. सॅमके साथमें जो थे वे सब लोग अलर्ट हो गए. अपनी अपनी गन लेकर तैयार हो गए. फिरसे उसने दरवाजा नॉक किया, इसबार जरा जोरसे. फिरभी अंदरसे कोई प्रतिक्रिया नही आई.

लेकिन अब सॅमका सब्र जवाब दे गया,

'' दरवाजा तोडो '' उसने आदेश दिया.

जेफ जो ऐसे कारनामोंमे तरबेज था, हमेशा दरवाजा तोडनेमें आगे रहता था, उसने और और दो चार लोगोंने मिलकर धक्के दे-देकर दरवाजा तोड दिया. दरवाजे टूटनेके बाद खबरदारीके तौरपर पहले सब लोग पिछे हट गए आव्र फिर धीरे धीरे सतर्कताके साथ अंदर जाने लगे.

लगभग सारा घर ढूंढ लिया. लेकिन घरमे कोई होनेके कोई आसार नही दिख रहे थे. किचन, हॉल खाली पडे थे. आखिर उन्होने बेडरुमकी तरफ उनका रुख किया. बेडरुमका दरवाजा पुरी तरह खुला पडा था. उन्होने अंदर झांककर देखा. अंदर कोई नही था, सिर्फ एक टेबल एक कोनेमें पडा हूवा था.

जैसेही सॅम और उसके साथ एक दो पुलिस बेडरुममें गए वे आश्चर्यके सांथ आंखे फाडकर देखतेही रह गए. उनका मुंह खुला की खुला ही रह गया. बेडरुममें एक कोनेमें रखे उस टेबलपर मांसके टूकडे और खुन फैला हूवा था. सब लोग एक दुसरेकी तरफ आश्चर्य और डरसे देखने लगे. सबके दिमागमें एक साथ न जाने कितने सवाल उमड पडे थे. लेकिन किसीकी एकदूसरेकोभी पुछनेकी हिम्मत नही बन पा रही थी. सॅमने बेडरुमके खिडकीकी तरफ देखा. खिडकी पुरी तरह खुली थी.

'' यहा कौन रहता है? ... मालूम करो '' सॅमने आदेश दिया.

उनमेंसे एक पुलिस बाहर गया. और थोडी देर बाद जानकारी इकठ्ठा कर वापस आगया.

'' सर मैने इस मकान मालिकसे अभी अभी संपर्क किया था. ... वह थोडीही देरमें यहा पहूंचेगा... लेकिन लोगोंके जानकारीके हिसाबसे यहां कोई इवेन फोस्टर नामक आदमी किराएसे रहता है ... '' वह पुलिस बोला.

'' वह आए बराबर उसे पहले मुझसे मिलनेके लिए कह दो... फोरेन्सीकके लोगोंको बुलावो... और इस अपार्टमेंटमें जबतक सारे सबुत इकठ्ठा किए नही जाते तबतक और कोईभी ना आ पाए इसका खयाल रखो.....'' सॅमने निर्देश दिये.

थोडी देरमें बाहर जमा हूई लोगोंकी भिडमें मकानमालिक आगया और 'मकान मालिक आया... मकानमालिक आया' ऐसी खुसुर फुसुर शुरु हो गई.

'' कौन है मकानमालिक ?'' सॅमने उस भीडकी तरफ जाते हूए पुछा.

एक अधेड उम्र आदमी सामने आकर डरते हूए दबे हूए स्वरमें बोला, '' मै हूं''

'' तो आपके पास इस आपके किराएदारका अतापता वैगेरा सारी जानकारी होगीही?...'' सॅमने उससे पुछा.

'' हां है ... '' मकानमाकिक एक कागजका टूकडा सॅमको थमाते हूए बोला.

सॅमने वह कागजका टूकडा लिया. उसपर इवेन फोस्टरका ऍड्रेस, फोन जैसी सारी जानकारी मकानमालिकने लिखकर दी थी.

'' लेकिन यह सब देखते हूए यह जानकारी जाली और झुठी होगी ऐसा लगता है... '' मकानमालिक डरते हूए बोला.

'' मतलब? ... आपने उसकी सारी जानकारी जांचकर नही देखी थी? '' सॅमने पुछा.

'' नही .. मतलब... वह मै करनेही वाला था'' मकानमालिक फिरसे डरते हूए बोला.


क्रमश:

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Hindi on Internet - Novel - अद-भूत CH-29 स्पेशल मिशन / Special Mission

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सॅम पुलिस स्टेशनमें बैठकर एक एक बातके उपर गौरसे सोच रहा था और अपने पार्टनर के साथ बिच बिचमें चर्चा कर रहा था.

'' एक बात तुम्हारे खयाल मे आगई क्या ?'' सॅमने शुन्यमें देखते हूए अपने पार्टनरसे पुछा.

'' कौनसी ?'' उसके पार्टनरने पुछा.

'' अबतक तिन कत्ल हूए है ... बराबर?''

'' हां ... तो? ''

'' तिनो कत्लके पहले जॉर्जको यह अच्छी तरहसे पता था की अगला कत्ल किसका होनेवाला है '' सॅमने कहा.

'' हां बराबर''

'' और तिसरे कत्लके वक्त तो जॉर्ज कस्टडीमें बंद था. '' सॅमने कहा.

'' हां बराबर है '' पार्टनरने कहा.

'' इसका मतलब क्या ?'' सॅमने मानो खुदसेही सवाल पुछा हो.

'' इसका मतलब साफ है की उसका काला जादू जेलके अंदरसेभी काम कर रहा है '' पार्टनर मानो उसे एकदम सही जवाब मिला इस खुशीसे बोला.

'' बेवकुफकी तरह कुछभी मत बको ..'' सॅम उसपर गुस्सेसे चिल्लाया.

'' ऐसी बात बोलो की वह किसीभी तर्कसंगत बुध्दी को हजम हो...'' सॅम अपना गुस्सा काबूमें रखनेकी कोशीश करते हूए उसे आगे बोला.

बेचारे सॅमके पार्टनरका खुशीसे दमकता चेहरा मुरझा गया.

काफी समय बिना कुछ बात किये शांतीसे बित गया.

सॅमने आगे कहा, '' सुनो, जब हम जॉर्जके घर गए थे तब एक बात हमने बडी स्पष्टतासे गौर की ....''

''कौनसी ?''

'' की जॉर्जके मकानको इतनी खिडकीयां थी की उसके पडोसमें किसीकोभी उसके घरमें क्या चल रहा है यह स्पष्ट रुपसे दिख और सुनाई दे सकता है .'' सॅमने कहा.

'' हां बराबर...'' उसका पार्टनर कुछ ना समझते हूए बोला.

अचानक एक विचार सॅमके दिमागमें कौंध गया. वह एकदम उठकर खडा हो गया. उसके चेहरेपर गुथ्थी सुलझननेका आनंद झलक रहा था.

उसका पार्टनरभी कुछ ना समझते हूए उसके साथ खडा हो गया.

'' चलो जल्दी... '' सॅम जल्दी जल्दी दरवाजेकी तरफ जाते हूए बोला.

उसका पार्टनर कुछ ना समझते हूए सिर्फ उसके पिछे पिछे जाने लगा.

एकदम ब्रेक लगे जैसा सॅम दरवाजेमें रुक गया.

'' अच्छा तुम एक काम करो ... अपने टीमको स्पेशल मिशनके लिए तैयार रहनेके लिए बोल दो'' सॅमने उसके पार्टनरको आदेश दिया.

उसका पार्टनर पुरी तरह गडबडा गया था. उसके बॉसको अचानक क्या हूवा यह उसके समझ के परे था.

स्पेशल मिशन?...

मतलब कही कातिल मिला तो नही ?...

लेकिन उनकी जो अभी अभी चर्चा हूई थी उसका और कातिल मिलनेका दुर दुरतक कोई वास्ता नही दिख रहा था..

फिर स्पेशल मिशन किसलिए?....

सॅमका पार्टनर सोचने लगा. वह सॅमको कुछ पुछनेही वाला था इतनेमें सॅम दरवाजेके बाहर जाते जाते फिरसे रुक गया और पिछे मुडकर बोला ,

'' चलो जल्दी करो ...''

उसका पार्टनर तुरंत हरकतमें आगया.

जानेदो मुझे क्या करना है? ...

स्पेशल मिशन तो स्पेशल मिशन..

सॅमके पार्टनरने पहले टेबलसे फोन उठाया और एक नंबर डायल करने लगा.


क्रमश:...

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Fiction Ebooks - अद-भूत / Aghast Ch-28 - रोनॉल्ड / Ronald

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The first step to wisdom is silence, the second is listening ... ANONYMOUS


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जैसेही इरिकका फोन आया, तैयारी करके डिटेक्टीव सॅम तुरंत रोनॉल्डके घरकी तरफ रवाना हूवा.

इतना फुलप्रुफ इंतजाम होनेके बादभी रोनॉल्डका कत्ल होता है ... इसका मतलब क्या ?...

पहलेही पुलिसकी इमेज लोगोंमे काफी खराब हो चूकी थी...

और इसबार पुरा विश्वास था की कातिल अब इस कॅमेरेके जालसे छूटना नामुमकीन है ...

फिर कहा गडबड हूई ?...

गाडी स्पिडसे चलाते हूए सॅमके विचारभी तेजीसे दौड रहे थे.

डिटेक्टीव सॅमने बेडरुममें प्रवेश किया. बेडरुममें रोनॉल्डकी डेड बॉडी अव्यवस्थीत हालमें बेडपर पडी हूई थी. सब तरफ खुन ही खुन फैला हूवा दिख रहा था. सॅमने बॉडीकी प्राथमीक जांच की और फिर कमरेंकी जांच की. इरिक और रिचर्ड वही थे. पुलिसकी इन्व्हेस्टीगेशन टीम जो वहां अभी अभी पहूंच गई थी, अपने काममें व्यस्त थी.

'' मिल रहा है कुछ ?'' सॅमने उन्हे पुछा.

'' नही सर .. अबतकतो कुछ नही. '' सॅमका पार्टनर उनकी तरफ से बोला.

सॅमने बेडरुममें आरामसे चलते हूए और सबकुछ ध्यानपूर्वक निहारते हूए एक चक्कर मारा. चक्कर मारनेके बाद सॅम फिरसे बेडके पास आकर खडा हो गया और उसने बेडके निचे झुककर देखा.

बेडके निचेसे दो चमकती हूई आंखे उसकी तरफ घुरकर देख रही थी. एक पलके लिए क्यों ना हो सॅम डरकर थोडा पिछे हट गया. वे चमकती हूई आंखे फिर धीरे धीर उसकी दिशामें आने लगी. और अचानक हमला कीये जैसे उसपर झपट पडी. वह छटसे वहांसे हट गया. उसे एक गलेमें पट्टा पहनी हूई काली बिल्ली कॉटके निचेसे बाहर आकर दरवाजेसे बेडरुकके बाहर दौडकर जाते हूए दिखाई दी. दरवाजेसे बाहर जातेही वह बिल्ली एकदम रुक गई और उसने मुडकर पिछे देखा. कमरेमे एक अजीबसा सन्नाटा छा गया था. उस बिल्लीने एक दो पल सॅमकी तरफ देखा और फिरसे मुडकर वह वहांसे भाग गई. दोन तिन पल कुछभी ना बोलते हूए गुजर गए.

'' यही वह बिल्ली... सर'' रिचर्डने कमरेमें फैले सन्नाटेको भंग किया.

'' ट्रान्समिशन बॉक्स किधर है ?'' बिल्लीसे सॅमको याद आगया.

'' सर यहां '' इरीकने एक जगह कोनेमें इशारा करते हूए कहा.

वह बॉक्स निचे जमिनपर गीरा हूवा था. सॅम नजदिक गया और उसने वह बॉक्स उठाया. वह टूटा हूवा था. सॅमने वह बॉक्स उलट पुलटकर गौरसे देखा और वापस जहांसे उठाया था वही रख दिया. तभी बेडरुमके दरवाजेकी तरफ सॅमका यूंही खयाल गया. हमेशाकी तरह दरवाजा तोडा हूवा था. लेकिन इसबार अंदरके कुंडीको चेन लगाकर ताला लगाया हूवा था.

''जेफ .. जरा इधर तो आवो '' सॅमने जेफको बुलाया.

जेफ तत्परतासे सॅमके पास चला गया.

'' यह इधर देखो ... और अब बोलो तुम्हारी थेअरी क्या कहती है ... कत्ल करनेके बाद दरवाजा बंद कर अंदरसे चेन लगाकर ताला कैसे लगाया होगा?'' सॅमने उस कुंडीको लगाए चेन और तालेके ओर उसका ध्यान खिंचते हूए कहा.

जेफने उस चेन और ताला लगाए कुंडीकी तरफ ध्यानसे देखते हूए कहा, '' सर.. अब तो मुझे पक्का विश्वास होने लगा है ... ''

'' किस बातका ?''

'' की कातील कोई आदमी ना होकर कोई रुहानी ताकत हो सकती है '' जेफ पागलोंकी तरह कही शून्यमें देखते हूए बोला.

सबलोग गुढ भावसे एक दूसरेकी तरफ देखने लगे.


क्रमश:...

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Hindi online Novel - अद्-भूत : Ch-27 :बेडरुमची निगरानी

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Ships in harbor are safe, but that's not what ships are built for - JOHN SHEDD

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रोनॉल्डका घर और आसपासका इलाका पुरी तरह रातके अंधेरेमें डूब गया था. बाहर आसपास झिंगुरोंका किर्र... ऐसा आवाज और दूर कही कुतोंकी रोने जैसी आवाज आ रही थी. अचानक घरके पास एक पेढपर आसरेके लिए बैठे पंछी डरके मारे फडफडाकर उडने लगे.

दो पुलिस मेंबर्स रिचर्ड और इरीक टीव्हीके सामने बैठकर रोनॉल्डके घरमें चलरही सारी हरकतोंका निरिक्षण कर रहे थे. रोनॉल्डके घरके बगलमेंही एक गेस्टरुममें उन्हे जगह दी गई थी. रिचर्ड शरीरसे जाडा और कदसे मध्यम था तो उसके विपरीत इरिक उंचा और एकदम पतला था. उनके सामने टिव्हीपर बेचैनीसे करवट बदलता और सोनेकी चेष्टा कर रहा रोनॉल्ड दिख रहा था.

'' इससे अच्छा किसी सेक्सी दांपत्यकी टिव्हीपर निगरानी करना मैने कभीभी पसंद किया होता. ..'' इरीकने मजाकमें कहा.

रिचर्डको इरीकके मजाकमे बिलकुल दिलचस्पी नही दिख रही थी.

'' नही मतलब तु मोटा है फिरभी तुम्हारे जैसे किसी मोटे शादी हूए किसी दंपतीके बेडरुमकी निगरानी करनाभी मुझे अच्छा लगता.'' इरीकने आगे कहा.

फिरभी रिचर्डने भावहीन चेहरेसे जो चूप्पी साध रखी थी वह तोडनेके लिए वह तैयार नही था. .

तभी अचानक एक मॉनीटरपर कुछ हरकत दिखाई दी. एक काली बिल्ली बेडरुममें दौडते हूए इधरसे उधर गई थी.

'' ए देख वहा रोनॉल्डके बेडरुममें एक काली बिल्ली है '' रिचर्डने कहा.

'' यहा क्या हम कुत्ते बिल्लीयोंके हरकतोंपर नजर रखनेके लिए बैठे है? .. मेरे बापको अगर पता होता की एक दिन मै ऐसे मॉनिटरपर कुत्ते बिल्लीयोंकी हरकतोपर नजर रखे बैठनेवाला हूं.. तो वह मुझे कभी पुलीसमें नही जाने देता..'' इरीकने ताना मारते हूए कहा.

अचानक उस बिल्लीने कोनेमें रखे एक चौरस डीब्बेपर छलांग लगाई... और इधर रिचर्ड और इरिकके सामने रखे हूए सारे मॉनिटर्स ब्लॅंक हो गए.

'' ए क्या हूवा ?'' इरीक कुर्सीसे उठकर खडा होते हूए बोला.

रिचर्डभी उसके कुर्सीसे उठकर खडा हो गया था.

इरिकका मजाकिया अंदाज कबका खत्म हो चूका था. उसके चेहरेपर अब चिंता, और हडबडाहट दिख रही थी.

'' चल जल्दी .. क्या गडबडी हूई यह देखके आते है '' रिचर्ड जल्दी जल्दी कमरेसें बाहर निकलते हूए बोला.

इरीकभी उसके पिछे पिछे जाने लगा.


एक बेडरुम. बेडरुममे धुंधली रोशनी फैली हूई थी और बेडपर कोई साया सोया हूवा दिखाई दे रहा था. अचानक बेडके बगलमें रखा टेलिफोन लगातार बजने लगा. उस बेडपर सोए सायेने निंदमेही अपना हाथ बढाकर वह टेलिफोन उठाया.

'' यस...'' वह साया कोई और नही डिटेक्टीव्ह सॅम था.

उधरसे इरीकका आवाज आया, '' सर रोनॉल्डकाभी उसी तरहसे कत्ल हो चूका है ''

'' क्या ?'' सॅम एकदमसे बेडसे उठकर बैठ गया.

उसने बेडके बगलमें एक बटन दबाकर बेडरुमका बल्ब जलाया. उसकी निंद पुरी तरहसे उड चूकी थी.

'' क्या कहा?'' सॅमको वह जो सुन रहा था उसपर विश्वास नही हो रहा था.

'' सर रोनॉल्डकाभी कत्ल हो चूका है '' उधरसे इरिकने कहा.

'' इतने कॅमेरे लगाकर मॉनिटर लगाकर तुमलोग लगातार निगरानी कर रहे थे.... तब भी? .... तुम लोग वहां निगरानी कर रहे थे या झक मार रहे थे ?'' चिढकर सॅमने कहा .

'' सर वह क्या हूवा ... एक बिल्लीने ट्रान्समिटरके उपर छलांग लगाई और सारे मॉनिटरपर एकदमसे बंद हो गए. .. तोभी हम रिपेअर करनेके लिए वहां गए थे... और वहां जाकर देखा तो तबतक कत्ल हो चूका था...'' इरिक अपनी तरफसे सफाई देनेका प्रयास कर रहा था.


क्रमश:...

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Hindi - Ad-bhut (upanyas) : Ch-26 जेलमें / In the prison

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Imagination is important than knowledge --- ALBERT EINSTEIN

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जॉर्जके मकानके खिडकीसे अंदरका सबकुछ दिख रहा था. आजभी वह फायरप्लेसके सामने बैठा हूवा था. उसने अपने हाथसे वह गुड्डा बगलमें जमीनपर रख दिया और झुककर आगके सामने फर्शपर अपना मस्तक रगडने लगा. यह सब करते हूए उसका कुछ बुदबुदाना जारीही था. थोडी देरसे वह खडा होगया और अजीब ढंगसे जोरसे किसी पागल की तरह चिखा. इतना अचानक और जोरसे चिखा की बाहर खिडकीसे झांक रहे डिटेक्टीव सॅम, सॅमका पार्टनर और उनको साथमें जो लेकर आया था वह आदमी, सबलोग चौंककर सहमसे गए. उस चिखके बाद वातावरणमें एक अजीब भयानक सन्नाटा छा गया.

'' मिस्टर रोनॉल्ड पार्कर अब तुम्हारी बारी है .. '' जॉर्ज वह निचे रखा हूवा गुड्डा अपने हाथमें लेते हूए बोला.

लेकिन इतनेमें दरवाजेकी बेल बजी. जॉर्जने पलटकर दरवाजेकी तरफ देखा. गुड्डेको फिरसे निचे जमिनपर रख दिया और उठकर दरवाजा खोलनेके लिए सामने आ गया.

दरवाजा खोला. सामने डिटेक्टीव सॅम और उसका पार्टनर था. वह तिसरा आदमी शायद वहांसे पहलेही खिसक गया था.

'' मिस्टर जॉर्ज कोलीन्स हम आपको स्टीव्हन स्मीथ और पॉल रोबर्टसके कत्लका एक सस्पेक्टके तौरपर गिरफ्तार करने आये है... आपको चूप रहनेका पुरी तरह हक है ... और कुछ बोलनेके पहले आप अपने वकिलके साथ संपर्क कर सकते है ... और खयाल रहे की आप जोभी बोलोगे वह कोर्टमें आपके खिलाफ इस्तेमाल किया जाएगा... '' डिटेक्टीव सॅमने दरवाजा खोलेबराबर ऐलान कर दिया.

जॉर्ज कोलीन्सका चेहरा एकदम भावशून्य था. वह बडे इम्तीनानके साथ उनके सामने आ गया.

उसे अरेस्ट करनेके पहले सॅमने कुछ सवालात पुछनेकी ठान ली.

'' यहा आपके साथ कौन-कौन रहता है?'' सॅमने पहला सवाल पुछा.

'' मै अकेलाही रहता हू '' उसने जवाब दिया.

'' लेकिन हमारे जानकारीके अनुसार आपके साथ आपके पिताजीभी रहते थे. ''

'' हां रहते थे ...लेकिन.... अब वे इस दुनियामें नही रहे ''

'' ओह ... सॉरी... यह कब हूवा? ... मतलब वे कब गुजर गए ?''

'' नॅन्सीके मौत की खबर सुननेके बाद कुछ दिनमेंही वे चल बसे ''

'' अच्छा आप स्टिव्हन और पॉलको पहचानते थे क्या ?''

'' हां उन हैवानोंको मै अच्छी तरहसे पहचानता हूं ''

स्टिव्हन और पॉलका नाम लेनेके बाद सॅमने एक बात गौर की की उनके उपरका गुस्सा और द्वेश उसके चेहरेपर साफ झलक रहा था. या फिर उसने वह छिपानेकी कोशीशभी नही की थी.

अब सॅमने सिधे असली मुद्देपर उससे बात करनेकी ठान ली.

'' आपने स्टिव्हन और पॉलका खुन किया क्या ?''

'' हां '' उसने ठंडे स्वरमें कहा.

सॅमको लगा था की वह आनाकानी करेगा. लेकिन उसने कुछभी आनाकानी ना करते हूए सिधे बात कबूल कर ली. .

'' कैसे किया आपने उनका कत्ल ?'' सॅमने अगला सवाल पुछा.

'' मेरे पासके काले जादूसे मैने उन्हे मार दिया '' उसने कहा.

जॉर्ज पागल की तरह दिखता तो थाही लेकिन उसके इस जवाबसे सॅमको अब विश्वास हो चला था.

'' आपके इस काले जादूसे आप किसीकोभी मारकर बता सकते हो?'' सॅमने व्यंगात्मक ढंगसे पूछा.

'' किसीकोभी मै क्यों मारुंगा?... जिसकी मुझसे दुष्मनी है उसकोही मै मारुंगा ''

'' अब आगे आप इस काले जादूसे किसको मारने वाले हो ?''

'' अब रोनॉल्डका नंबर है ''

'' अब अभी इसी वक्त आप उसे मारकर बता सकते हो ?'' सॅमने उसका काला जादू और वह दोनोंकाभी झूट साबीत करनेके उद्देशसे पुछा.

'' अब नही ... उसका वक्त जब आएगा तब उसे जरुर मारुंगा '' उसने कहा.

उसका यह जवाब सुनकर सॅमको अब फिलहाल उसे और सवाल पुछनेमें कोई दिलचस्पी नही रही थी. वे दोनो जॉर्जको हथकडी पहनानेके लिए सामने आ गए. इस बारभी उसने कोई प्रतिकार ना करते हूए पुरा सहयोग किया.

सॅमको लग रहा था की या तो यह आदमी पागल होगा या अति चालाक...

लेकिन वह जो कहता है वह अगर सच हो तो ?...

पल भरके लिए क्यों ना हो सॅमके दिमागमें यह विचार कौंध गया ..

नही ... ऐसे कैसे हो सकता है ?...

सॅमने अपने दिमागमें आया विचार झटक दिया.


डिटेक्टीव सॅमके पार्टनरने जॉर्जको जेलके एक कोठरीमें बंद किया और बाहरसे ताला लगाया. सॅम बाहरही खडा था. जैसेही सॅम और उसका पार्टनर वहांसे जानेके लिए मुडे, जॉर्ज आवेशमें आकर चिल्लाया -

'' तुम लोग मुरख हो... भलेही तुमने मुझे जेलके इस कोठरीमें बंद किया फिरभी मेरा जादू यहांसेभी काम करेगा...''

सॅम और उसका पार्टनर रुक गए और मुडकर जॉर्जकी तरफ देखने लगे.

सॅमको जॉर्जकी अब दया आ रही थी.

बेचारा ...

बहनका इस तरहसे दुर्दैवी अंत होनेसे उसका इस तरह झुंझलाना जायज है ...

सॅम सोचते हूए फिरसे अपने साथीके साथ आगे चलने लगा. थोडी दूरी तय करनेके बाद फिरसे मुडकर उसने जॉर्जकी तरफ देखा. वह अब निचे झुककर फर्शपर माथा रगड रहा था और साथमें कुछ मंत्र बुदबुदा रहा था.

'' इसके उपर ध्यान रखो और इसे किसीभी व्हिजीटरको मिलनेकी अनुमती मत दो. '' सॅमने निर्देश दिया.

'' यस सर'' सॅमका पार्टनर आज्ञाकारी ढंगसे बोला.


क्रमश:...

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Hindi Sahitya - अद्-भूत : Ch-25 : काला जादू?

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पोलिस स्टेशनमें डिटेक्टीव्ह सॅमके खाली कुर्सीके सामने एक आदमी बैठा हूवा था. सॅम जल्दी जल्दी वहां आकर अपनी कुर्सीपर बैठ गया.

'' हां ... तो आपके पास इस केसके संदर्भमें कुछ महत्वपुर्ण जानकारी है ?...'' सॅमने पुछा.

'' हां साब ''

सॅमने एकबार उस आदमीको उपरसे निचेतक देखा और फिर वह क्या बोलता है यह सुनने लगा.

'' साब हमारे पडोसमें वह लडकी नॅन्सी, जिसका खुन होगया ऐसा बोलते है, उसका भाई रहता है....'' उस आदमीने शुरवात की और वह आगे पुरी कहानी कथन करने लगा ....


... एक चालमें एक घर था. उस घरको चारो तरफ कांचकी खिडकीयां ही खिडकीया थी. इतनीकी उस घरमें क्या चल रहा है वह पडोसीकोभी पता चले. एक खिडकीसे हॉलमें नॅन्सीका भाई जॉर्ज बैठा हूवा दिख रहा था. अब वह पहलेसे कुछ जादाही अजीब और पागल जैसा लग रहा था. दाढी बढी हूई, बाल बिखरे हूए. मस्तकपर एक बडासा कीसी चिजका टीका लगा हूवा. वह फायरप्लेसके सामने हाथमें एक कपडेका गुड्डा लेकर बैठा हूवा था. शायद वह गुड्डा उसनेही बनाया हूवा होगा. बगलमें रखे प्लेटसे उसने हाथसे कुछ उठाया और वह कुछ तंत्र-मंत्र जैसे शब्द बुदबुदाने लगा,

'' ऍबस थी बा रास केतिन स्तता...''

उसने प्लेटसे जो उठाया था वह सामने फायरप्लेसके आगमें फेंक दिया. आग भडक उठी. फिरसे वह वैसेही कुछ विचित्र तंत्र-मंत्र बोलने लगा.

'' कॅटसी... नतंदी.. वाशंर्पत... रेर्वरात स्तता...''

फिरसे उसने उस प्लेटसे धान जैसा कुछ अपने हाथमें उठाकर उस आगके स्वाधीन किया. इस बार आग और जोरसे भडक उठी.

उसने अपने हाथसे वह गुड्डा वही बगलमें रख दिया. आगके सामने झुककर, फर्शपर अपना मस्तक घिसा.


एक आदमी पडोससे जॉर्जके घरमें क्या चलरहा है यह उत्सुकतावश देख रहा था.


मस्तक घिसनेके बाद जॉन उठकर खडा हूवा और अजिब तरहसे जोरसे चिखा. जो पडोससे झांककर देख रहा था वहभी एक पलके लिए डर और सहम गया. जॉनने झुककर बगलमें रखा हूवा वह गुड्डा उठाया और फिरसे एकबार जोरसे अजिब तरहसे चिल्लाया. सब तरफ एक अजीब, अद्भूत सन्नाटा छा गया.

'' अब तू मरनेके लिए तैयार हो जा स्टीव्हन..'' जॉर्जने उस गुड्डेसे कहा.

'' नही ... नही ... मुझे मरना नही है इतने जल्दी... जॉर्ज मै तुम्हारे पैर पडता हू... मुझे माफ कर दे... आय ऍम सॉरी... मैने जो किया वह गलत किया... मुझे अब उसका अहसास हो गया है... मै तुम्हारे लिए तुम जो कहोगे वह करुंगा.... लेकिन मुझे माफ कर दो.... '' जॉर्ज मानो वह गुड्डा बोल रहा है वैसे उस गुड्डेके संवाद बोल रहा था.

'' तुम मेरे लिए कुछभी कर सकते हो? ... तुम मेरे बहनको वापस ला सकते हो?'' जॉर्जने अब उसके खुदके संवाद बोले.

'' नही ... मै वह कैसे कर सकता हूं ?... वह अगर मेरे हाथमें होता तो मै जरुर करता... वह एक चिज छोडकर कुछ भी मांगो... मै तुम्हारे लिए करुंगा... '' जॉर्ज गुड्डेके संवाद बोलने लगा. .

''अछा... तो फिर अब... मरनेके लिए तैयार हो जावो... '' जॉर्जने उस गुड्डेसे कहा.


वह पडोसका आदमी अबभी जॉर्जके खिडकीसे छुपकर अंदर झांक रहा था.


आधी रात होकर उपर काफी समय गुजर चूका था. बाहर रास्तेपर कोईभी दिख नही रहा था. जॉर्ज धीरेसे अपने घरसे बाहर आया. चारो ओर एक नजर घुमाई. उसके हाथमें एक थैली थी जिसमें उसने वह गुड्डा ठूंस दिया. और दरवाजेको ताला लगाकर वह बाहर निकल गया. कंपाऊंडके बाहर आते हूए उसने फिरसे अपनी पैनी नजर चारोओर दौडाई. सामने रास्तेपर जिधर देखो उधर अंधेराही अंधेरा छाया हूवा दिख रहा था. अब रास्ते से वह तेजीसे अपने कदम बढाते हूए चलने लगा. उस पडोसके आदमीने अपने खिडकीसे छूपकर जॉनको बाहर जाते हूए देख लिया. जैसेही जॉर्ज रास्तेपर आगे चलने लगा वह आदमी अपने घरसे बाहर आ गया. वह आदमी उसे कुछ आहट ना हो या वह उसे दिखाई ना दे इसका खयाल रख रहा था. जॉर्ज तेजीसे अपने कदम आगे बढाते हूए चल रहा था. जॉर्ज काफी आगे निकल जानेके बाद वह आदमी उसका पिछा करते हूए उसके पिछे पिछे जाने लगा.

वह आदमी जॉर्जका पिछा करते हूए कब्रस्तानतक पहूंच गया. कब्रस्तानके आसपास घने पेढ थे. शायद उसी पेढोंमे छुपकर उल्लू मुर्दोंकी राह देखते होंगे. कही दूर कुत्तोंकें रोनेजैसी अजीबसी आवाजें आ रही थी. उस आदमीको इस सारे मौहोलका डर लग रहा था. लेकिन उसे जॉर्ज यहा किसलिए आया है यह जानना था. जॉर्ज कब्रस्तानमें घुस गया और वह आदमी बाहरही कंपाऊंड वॉलके पिछे छूपकर जॉर्ज क्या कर रहा है यह देखने लगा. चांदके रोशनीमें उस आडमीको जॉर्जका साया दिख रहा था. जॉर्जने एक जगह तय की और वह वहा खोदने लगा. एक गड्डा खोदनेके बाद उसने उसके थैलीसे वह गुड्डा निकाला. उस गुड्डेको जॉर्जने ऐसा दफन किया की मानो वह गुड्डा ना होकर कोई शव हो. वह उपरसे मट्टी डालने लगा और मट्टी डालते वक्तभी उसका कुछ मंत्र तंत्र जैसा बुदबुदाना अबभी जारी था. उस गुड्डेके उपर मट्टी डालनके बाद जब वह गड्डा मट्टीसे भर गया तो जॉर्ज उस मट्टीपर खडा होकर उसे अपने पैरोसे दबाने लगा... .


... वह आदमी कथन कर रहा था और डिटेक्टीव सॅम ध्यान देकर सुन रहा था. उस आदमीने आगे कहा -

'' दुसरे दिन जब मुझे पता चला की स्टीव्हनका कत्ल हो चूका है तब मुछे विश्वासही नही हुवा ''

काफी देर तक कोई कुछ नही बोला. अब इन सारी बातोंने एक नयाही मोड लिया था.

सॅम सोचने लगा.

'' तुम्हे क्या लगता है जॉर्ज खुनी होगा?'' सॅमने अपने इन्व्हेस्टीगेटरकी भूमीकामें प्रवेश करते हूए पुछा.

'' नही .. मुझे लगता है की वह उसका काला जादू इन सारे कत्ल करनेके लिए इस्तेमाल करता होगा.... क्योंकी जिस दिन पॉलका कत्ल हूवा उसके पहले दिन रातको जॉर्जने वैसाही एक गुड्डा बनाकर उसे कब्रस्तानमें दफन किया था. '' उस आदमीने कहा.

'' तुम इन सारी चिजोंमे विश्वास रखते हो.?'' सॅमने थोडा व्यंगात्मक ढंगसेही पुछा.

'' नही .. मै विश्वास नही रखता ... लेकिन जो अपनी खुली आंखोंसे सामने दिख रहा हो उन चिजोंपर विश्वास रखनाही पडता है '' उस आदमीने कहा.

डिटेक्टीव्ह सॅमका पार्टनर जो इतनी देरसे दूरसे सब उनकी बाते सुन रहा था, चलते हूए उनके पास आकर बोला -

'' मुझे पहलेही शक था की कातिल कोई आदमी ना होकर कोई रुहानी ताकद है ''

सारे कमरेंमे एक अनैसर्गीक सन्नाटा फैल गया.

'' अब उसने और एक नया गुड्डा बनाया हूवा है '' उस आदमीने कहा.


क्रमश:...

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Hindi Novel - अद्-भूत : Ch-24 : प्लान

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पोलिस स्टेशनके कॉन्फरंन्स रुममें मिटींग चल रही थी. सामने दिवारपर टंगे हूए सफेद स्क्रिनपर प्रोजेक्टरसे एक लेआऊट डायग्राम प्रोजेक्ट किया था. उस डायग्राममें दो मकानके लेआऊट एक के पास एक ऐसे निकाले हूए दिख रहे थे. लाल लेजर पॉईंटर का इस्तेमाल कर डिटक्टीव सॅम सामने बैठे लोगोंको अपने प्लानकी जानकारी दे रहा था....


'' मि. क्रिस्तोफर ऍन्डरसन और मि. रोनॉल्ड पार्कर ...'' सॅमने शुरवात की. सामने बाकी पुलिसके लोगोंके साथ क्रिस्तोफर और रोनॉल्ड बैठे हूए थे. वे लोग सॅम जो कुछ जानकारी दे रहा था वह ध्यान देकर सुन रहे थे.

'' .. आपके घरमें इस जगह हम कॅमेरे बिठाने वाले है. बेडरुममें तिन और घरमें दुसरे जगह तिन ऐसे कुल मिलाकर छे कॅमेरे दोनो घरमें बिठाए जाएंगे. वह कॅमेरे सर्किट टिव्हीको जोड दिए जाएंगे जहां हमारी टीम घरके सारी हरकतोंपर लगातार नजर रखी हूई होगी.

'' आपको लगता है इससे कुछ होगा ?'' क्रिस्तोफर रोनॉल्डके कानमें व्यंगतापुर्वक फुसफुसाया.

रोनॉल्डने क्रिस्तोफरकी तरफ देखा और कुछ प्रतिक्रिया व्यक्त नही की और फिर सॅमसे पुछा, '' अगर खुनी कॅमेरेंसे दूर रहा तो ?''

'' जन्टलमन हम घरमें मुव्हीग कॅमेरे लगाने वाले है .. जिसकी वजहसे आपका पुरा घर हमारी टीमके निगरानीके निचे रहने वाला है. ... और हां ... मै आपको विश्वास दिलाता हूं की यह सबसे कारगर और इफेक्टीव्ह उपाय हम खुनीको पकडनेके लिए इस्तेमाल कर रहे है ... कातिलने अगर अंदर घुसनेकी कोशीश की तो वह किसीभी हालतमें हमसे बच नही पाएगा... हमारे टेक्टीकल टिमने रात दिन काफी मशक्कत कर यह ट्रॅप तैयार किया है ... ''

'' अच्छा वह सब ठिक है ... और अगर इतना करनेके बाद अगर कातिल आपके हाथोंमे आता है तो आप उसके साथ क्या करने वाले हो? '' क्रिस्तोफरने पुछा.

'' जाहिर है हम उसे कोर्टके सामने पेश करेंगे ...और कानुनके हिसाबसे जोभी शिक्षा उसे ठिक लगे वह कोर्ट तय करेगा '' सॅमने कहा.

'' और अगर वह छूटकर भाग गया तो ?'' क्रिस्तोफरने आगे पुछा.

"" जैसे नॅन्सीके कातिल उसका खुन कर भाग गए वैसे ' एक पुलिसने व्यंगपुर्वक कहा.

क्रिस्तोफर और रोनॉल्डने उसकी तरफ गुस्सेसे देखा.

'' तुम्हे क्या हम खुनी लगते है ? '' रोनॉल्डने उस पुलिसको गुस्सेसे प्रतिप्रश्न किया.

'' याद रखो अबतक हमें कोर्ट गुनाहगार साबित नही कर पाया है '' क्रिस्तोफर गुस्सेसे चिढकर बोला.

'' मि. रोनॉल्ड पार्कर, मि. क्रिस्तोफर ऍन्डरसन ... इझी ... इझी ... मुझे लगता है हम असली मुद्देसे भटकते जा रहे है ... फिलहाल असली मुद्दा है की आप लोगोंको संरंक्षण कैसे दिया जाए ... आप लोग नॅन्सीके खुनके लिए जिम्मेदार हो या नही यह बादका मुद्दा हूवा ..'' सॅम ने उन्हे शांत करनेके उद्देशसे कहा.

'' आप लोगभी पहले हमारे संरक्षण के बारेमें सोचो.... बाकी बाते बादमें देखी जायेगी '' क्रिस्तोफर अधिकार वाणीसे , खांसकर उस पुलिस अधिकारीके तरफ देखकर बोला, जिसने उसे छेडा था. उस पुलिस अधिकारीको इन दो लोगोंके संरक्षणके लिए तैनात टीममे शामील किया था यह बात कुछ खल नही रही थी. सॅमनेभी उस पुलिस अधिकारीको शांत रहनेका इशारा किया. वह अधिकारी गुस्सेसे उठकर वहांसे चला गया. उसके जानेसे मौहोल थोडा ठंडा हो गया और सॅम फिरसे अपनी योजनाके बारेंमे सब लोगोंको विस्तृत जानकारी देने लगा.

क्रिस्तोफर और रोनॉल्ड पुलिस उनका संरक्षण कर पाएंगे की नही इसके बारेमें अभीभी संदिग्ध थे. लेकिन उन्हे उनके संरक्षणकी जिम्मेदारी उनपर सौपनेके अलावा दुसरा कुछ चाराभी तो नही था.


क्रमश:...

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Hindi online Novel - अद्-भूत : Ch-23 : जेफकी ट्रीक

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डिटेक्टीव्ह सॅम अपने कॅबिनमें सर निचा झूकाकर सोचमे डूबा हूवा बैठा था. इतनेमें, जेफ, उसका ज्यूनिअर टीम मेंबर वहा आगया.

'' सर ... वह कातिल कत्लके जगह कैसे पहूंचता होगा और फिर कैसे बाहर जाता होगा ... इसके बारेंमे मेरे दिमागमें एक आयडीया आया है '' जेफने उत्साहभरे स्वरमें कहा.

सॅमने अपना सिर उपर उठाया और जेफ की तरफ देखा.

जेफ दरवाजेके बाहर गया और उसने दरवाजा खिंचकर बंद किया.

'' सर देखिए अब '' वह बाहरसे जोरसे चिल्लाया.

डिटेक्टीवने देखा की दरवाजेकी अंदरकी कुंडी धीरे धीरे खिसककर बंद होगई. सॅम भौंचक्कासा देखता ही रह गया.

'' सर आपने देखा क्या ?'' उधरसे जेफका आवाज आया.

फिर धीरे धीरे दरवाजेकी कुंडी दुसरी तरफ खिसकने लगी और थोडीही देरमें कुंडी खुल गई.

सॅमको बहुत आश्चर्य हो रहा था.

जेफ दरवाजा खोलकर अंदर आया, उसके हाथमें पिछेकी ओर कुछतो छिपाया हूवा था.

'' तुमने यह कैसे किया ? '' सॅमने आश्चर्ययुक्त उत्सुकतासे पुछा.

जेफने एक बडासा मॅग्नेट अपने पिछे छूपाया था वह निकालकर सॅमके सामने टेबलपर रख दिया.

'' यह सब करामात इस चूंबककी है क्योंकी वह दरवाजेकी कुंडी लोहेकी बनी हूई है...'' जेफने कहा.

'' जेफ फॉर यूवर काइंड इन्फॉर्मेशन... घटनास्थलपर मिली सब दरवाजेकी कुंडीया ऍल्यूमिनियम की थी. '' सॅमने उसे बिचमें टोकते हूए कहा.

'' ओह... ऍल्यूमिनीयमकी थी.'' फिर और कोई आयडीया दिमागमें आयेजैसे उसने कहा, '' कोई बात नही... उसका हलभी है मेरे पास ... ''

सॅमने अविश्वाससे उसकी तरफ देखा.

जेफने अपने गलेमें पहना एक स्टोन्सका नेकलेस निकालकर उसका धागा तोड दिया, सब स्टोन्स एक हाथमें लेकर उसमेंसे पिरोया हूवा नायलॉनका धागा दुसरे हाथसे खिंच लिया. उसने हाथमें जमा हूए सारे स्टोन्स जेबमें रख दिए. अब उसके दुसरे हाथमें वह नॉयलॉनका धागा था.

डिटेक्टीव सॅम असंमजसकी स्थीतीमें उसकी तरफ वह क्या कर रहा है यह देखने लगा.

'' अब देखीए यह दूसरा आयडीया .. आप सिर्फ मेरे साथ कमरेके बाहर आईए'' जेफने कहा.

सॅम उसके पिछे पिछे जाने लगा.

जेफ दरवाजेके पास गया. दरवाजेके कुंडीमें उसने वह नॉयलॉनका धागा अटकाया. धागेके दोनो सिरे एक हाथमें पकडकर उसने सॅमसे कहा, '' अब आप दरवाजेसे बाहर जाइए ''

सॅम दरवाजेके बाहर गया. जेफभी अब धागेके दोनो सिरे एक हाथमें पकडकर दरवाजेसे बाहर आगया. और उसने दरवाजा खिंच लिया.

दरवाजा बंद था लेकिन वह धागा जो जेफके हाथमें था दरवाजेके दरारसे अबभी अंदर की कुंडीको अटकाया हूवा था. जेफने धीरे धीरे उस धागेके दोनो सिरे खिंच लिए और फिर धागेका एक सिरा हाथसे छोडकर दुसरे सिरेके सहारे धागा खिंच लिया. पुरा धागा अब जेफके हाथमें था.

'' अब दरवाजा खोलकर देखीए '' जेफने सॅमसे कहा.

सॅमने दरवाजा धकेलकर देखा और आश्चर्यकी बात दरवाजा अंदरसे बंद था.

सॅम भौंचक्कासा जेफकी तरफ देखने लगा.

'' अब मुझे पुरा विश्वास होने लगा है ....'' सॅमने कहा.

'' किस बातका?'' जेफने पुछा.

'' की इस नौकरीके पहले तूम कौनसे धंधे करते होंगे...'' सॅमने मजाकमें कहा.

दोनो एकदुसरेकी तरफ देख मुस्कुराए.

'' लेकिन एक बता'' सॅमने कहा.

जेफने प्रश्नार्थक मुद्रामें सॅमकी तरफ देखा.

'' की अगर दरवाजेको अंदरसे अगर ताला लगा हो तो ?'' सॅमने पुछा.

'' नही ... उस हालमें ... फिर एकही संभावना है'' जेफने कहा.

'' कौनसी?''

'' की वह दरवाजा खोलनेके लिए किसी अमानवी शक्तीकाही होना जरुरी है '' जेफने कहा.


क्रमश:...

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Hindi Novel book - अद्-भूत : Ch-22 : अब अगला कौन?

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लगभग आधी रातको रोनॉल्ड और क्रिस्तोफर हॉलमें व्हिस्की पी रहे थे. एकके बाद एक उनके दो साथीयोंका कत्ल हूवा था. पहली बार जब स्टिव्हनका खुन हूवा तभी उन्हे शक हूवा था की हो न हो यह मामला नॅन्सीके खुनसे संबधीत है. लेकिन बादमें पॉलके कत्लके बाद उनका शक यकीनमें बदल गया था की यह नॅन्सीके खुनकी वजहसेही हो रहा है. कुछ भी हो जाए हम घबराएंगे नही ऐसा ठान लेनेके बादभी उनको रह रहकर अगला नंबर उन दोनोंमेंसेही कीसी एक का स्पष्ट रुपसे दिख रहा था. इसलिए उनके चेहरेंसे चिंता और डर हटनेके लिए तैयार नही था. वे व्हिस्कीके एक के बाद एक न जाने कितने ग्लास खाली कर रहे थे और अपना डर मिटानेकी कोशीश कर रहे थे.

'' मैने नही कहा था तुम्हे ?'' किस्तोफरने आवेशमे आकर कहा.

रोनॉल्डने प्रश्नार्थक मुद्रामे उसकी तरफ देखा.

'' उस साले हरामीको जिंदा मत छोड करके ... उसको हमने तभी ठिकाने लगाना चाहिए था... उस लडकीके साथ...'' क्रिस्तोफर व्हिस्कीका कडवा घूंट लेते हूए बुरासा मुंह बनाते हूए बोला.

उन्हे शक नही ... पक्का यकिन था की जॉनकाही इन दो वारदातोंमे हाथ होगा.

'' हमें लगा नही की साला इतना डेंजरस निकलेगा ...'' रोनॉल्डने कहा.

'' बदला ... बदला आदमीको डेंजरस बना देता है. '' क्रिस्तोफरने कहा.

'' लेकिन एक बात मेरे खयालमें नही आ रही है की वह सारे कत्ल कैसे कर रहा है ... पुलिस जब वहां पहुचती है तब घर अंदरसे बंद किया हूवा रहता है और बॉडी अंदर पडी हूई... और यही नही तो पॉलके गलेका तोडा हूवा मांसका टूकडा मेरे किचनमें कैसे आया?.. और खास बात तब मैने मेरा घर... खिडकीयां, दरवाजे सबकुछ अच्छी तरहसे बंद किया था. '' रोनॉल्ड आश्चर्य जताते हूए बोला.

रोनॉल्ड कही शून्यमे देखकर सोचते हूए बोला,

'' यह सब देखते हूए एक बात मुमकीन लगती है ...''

'' कौनसी ?'' क्रिस्तोफरने व्हिस्कीका खाली हूवा ग्लास भरते हूए पुछा.

'' तूम्हारा भूतोंपर विश्वास है ?'' रोनॉल्डने बोले या ना बोले इस मनकी व्दीधा स्थीतीमें पुछा.

'' मुरखकी तरह कुछभी मत बको.... उसके पास कुछतो ट्रीक है जिसको इस्तमाल करके वह इस तरहसे कत्ल कर रहा है ... '' क्रिस्तोफरने कहा.

'' मुझेभी वही लगता है ... लेकिन कभी कभी अलग अलग तरहके शक मनमें आते है '' रोनॉल्डने कहा.

'' चिंता मत करो... वह हमारे तक पहूंचनेके पहलेही हम उसके पास पहूंचते है और उसको ठिकाने लगाते है... '' क्रिस्तोफर उसे सांत्वना देनेकी कोशीश करते हूए बोला.

'' हमें पुलिस प्रोटेक्शन लेना चाहिए'' रोनॉल्डने सोचकर कहा.

'' पुलिस प्रोटेक्शन? ... पागल होगए हो क्या ?... हम उन्हे क्या बोलने वाले है ... की भले आदमीयों हमने उस लडकीको मारा है.... हमारेसे गलती होगई.... सॉरी ... ऐसी गलती हमारेसे फिर नही होगी.... कृपया हमारा रक्षण किजिए ..'' क्रिस्तोफर दारुके नशेमें माफी मांगनेके हावभाव करते हूए बोला.

'' वह बादकी बात होगई... पहले अपना प्रोटेक्शन सबसे अहम है... वह क्या है की ...सर सलामत तो पगडी पचास'' रोनॉल्डने कहा.

'' लेकिन पुलिसके पास जाकर उनसे प्रोटेक्शन मांगना ... कुछ... ''

पोलिस प्रोटेक्शनका खयाल आतेही रोनॉल्ड अपने डरसे काफी उभर गया था.

'' उसकी चिंता तूम मत करो... वह सब मुझपर छोड दो'' रोनॉल्डने उसका वाक्य बिचमेंही तोडते हुए बडे आत्मविश्वाससे कहा.


क्रमश:...

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Hindi Literature Novel - अद-भूत : Ch-21: फिर जॉन कहा गया?

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.... डिटेक्टीव्ह सॅम डिटेक्टीव बेकरके सामने बैठकर सब सुन रहा था. वह कबकी कहानी पुरी कर चूका था. लेकिन वह दर्दभरी कहानी सुनकर कमरेमें सारे लोग इतने द्रवित और अभिभूत हो गए थे की बहुत देर तक कोई कुछ नही बोला. कमरेमें एक अनैसर्गीक सन्नाटा छाया था.

एक प्रेम कहानीका ऐसा भयानक दर्दनाक अंत होगा? ....

किसीने नही सोचा था.

नॅन्सी और जॉनकी प्रेमकहानी कॅबिनमें उपस्थीत सभी लोगोंके दिलको छु गई थी.

थोडी देर बाद डिटेक्टीव सॅमने अपनी भावनाओंको काबुमें करते हूए पुछा,

'' क्या जॉनने पुलिस स्टेशनमें रिपोर्ट दर्ज की थी ?"'

'' नही ''

'' फिर ... यह सब तुम्हे कैसे पता ?''

'' क्योंकी नॅन्सीका भाई ... जॉर्ज कोलीन्सने रिपोर्ट दर्ज की थी. ''

'' लेकिन उसनेभी रिपोर्ट कैसे दर्ज की ? ... मेरा मतलब है उसे वह सबकुछ पता कैसे चला? ... क्या जॉन उसे मिला था ? '' सॅमने एकके बाद एक सवालोकी छडी लगा दी.

''नही ... जॉन उसे उस घटनाके बाद कभी नही मिला.. .'' बेकरने कहा.

'' फिर उसे खुनी कौन है यह कैसे पता चला ?'' सॅमको अब उसे सता रहे सारे सवालोंके जवाब मिलनेकी जल्दी हो रही थी.

'' कुछ महिने पहले जॉनने नॅन्सीके भाईको इस घटनाके बारेमें खत लिखकर सब जानकारी लिखी थी... उसमें उसने उन चार लोगोंके नाम पते भी लिखे थे. ...''

'' फिर रिपोर्टका नतिजा क्या निकला ?'' सॅमने अगला सवाल पुछा.

''... इस केसपर हमनेही तहकिकात की थी... लेकिन ना नॅन्सीकी डेड बॉडी मिली थी ... ना जॉन मिला जो की इस घटना का अकेला और बहुत अहम चश्मदीद गवाह था... इसलिए केस बिना कुछ नतिजेके वैसीही लटकी रही ... और अभीभी वैसीही लटकी पडी है... ''

'' अच्छा ... जॉनका कुछ अता पता ?'' सॅमने पुछा.

'' उसके बारेमें किसीकोभी कुछ पता नही चला... उस घटनाके बाद वह कभी उसके अपने घरभी नही आया ... वह जिंदा है या मरा ... इसकाभी कुछ पता नही चला... सिर्फ उसके जॉनको आए खतसे ऐसा लगता है की वह जिंदा होना चाहिए... लेकिन अगर वह जिंदा है तो छिप क्यो रहा है? ... यही एक बात समझमें नही आती.....''

'' उसका कारण सिधा है ... '' इतनी देरसे ध्यान देकर सुन रहे सॅमके साथीने कहा.

'' हां ....उसका एकही कारण हो सकता है की ... हालहीमें जो दो कत्ल हूए उसमें जॉनकाही हाथ हो सकता है.. और इसलिएही मैने तुम्हे यहां बुलाकर यह सब जानकारी तुम्हे देना मुनासीब समझा ...'' बेकरने कहा.

'' बराबर है तुम्हारा... इस खुनमें जॉनका हाथ हो सकता है ऐसा मान लेनेकी काफी गुंजाईश है... लेकिन मुझे एक बात समझमें नही आती है की ... जब वह कमरा या मकान अंदरसे और सब तरफसे बंद होता है तब वह खुनी अंदर पहूंचता कैसे है ? ... वह सारे कत्ल कैसे कर रहा है यह एक ना सुलझनेवाली पहेली बन चूकी है ''

'' अच्छा जब नॅन्सीके भाईको इस घटनाके बारेमें पता चला तो उसकी प्रतिक्रीया क्या थी ? ... और अब केसके नतिजेमें देरी हो रही है इसके बारेंमे उसकी प्रतिक्रिया कैसी है ?''

'' वह आदमी पागलोंजैसा हो चूका है ... इस पुलिस स्टेशनमें उसकी हमेशा चक्कर रहती है... और केसका आगे क्या हूवा यह वह हमेशा पुछता रहता है ... वह यह सब फोन करकेभी पुछ सकता है ... लेकिन नही वह खुद यहां आकर पुछता है ... मुझे तो उसपर बहुत तरस आता है ... लेकिन अपने हाथमें जितना है उतनाही हम कर सकते है... '' बेकरने कहा.

'' इसका मतलब हालहीमें जो दो खुन हूए उसका कातिल नॅन्सीका भाई जॉर्जभी हो सकता है .. '' सॅम ने कहा.

'' आपने उसे देखना चाहिए... उसकी तरफ देखकर तो ऐसा नही लगता... '' बेकरने कहा.

'' लेकिन यह एक संभावना है जिसे हम झुटला नही सकते ...'' सॅमने प्रतिवाद किया.

डिटेक्टीव बेकरने थोडी देर सोचा और फिर हांमे अपना सर हिलाया.


क्रमश:...

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Hindi Novel book - अद्-भूत : Ch-20 : मै तुम्हे नही छोडूंगा

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जॉनको एकदम सबकुछ शांत और स्थब्ध होनेका अहसास हूवा.

'' ए उसके आंखोपर बंधा कपडा छोड रे... '' क्रिस्तोफरका चिढा हूवा स्वर गुंजा.

जॉनको उसके आंखोपरसे कोई कपडा निकाल रहा है इसका अहसास हूवा. उसका आक्रोश आंसुओंके द्वारे बाहर निकलकर वह कपडा पुरी तरह गिला हूवा था.

जैसेही उन्होने उसके आखोसे वह कपडा निकाला, उसने सामनेका दृष्य देखा. उसके जबडे कसने लगे, आंखे लाल लाल हो गई, सारा शरीर गुस्सेसे कांपने लगा था. वह खुदको छुडाने के लिए छटपटाने लगा. उसके सामने उसकी नॅन्सी निर्वस्त्र पडी हूई थी. उसकी गर्दन एक तरफ लटक रही थी. उसकी आंखे खुली थी और सफेद हो गई थी. उसका शरीर निश्चल हो चूका था. उसके प्राण कबके जा चूके थे.

अचानक उसे अहसास हूवा की उसके सरपर किसी भारी वस्तूका प्रहार हूवा और वह धीरे धीरे होश खोने लगा.

जब जॉन होशमें आया, उसे अहसास हूवा की अब वह बंधा हूवा नही था. उसके हाथ पैर बंधनसे मुक्त थे. लेकिन जहां कुछ देर पहले नॅन्सीकी बॉडी पडी हूई थी वहां अब कुछभी नही था. वह तुरंत उठकर खडा होगया, उसने चारो ओर अपनी नजर घुमाई.

वह मुझे गिरा हूवा कोई भयानक सपनातो नही था...

हे भगवान वह सपनाही हो...

वह मनही मन प्रार्थना करने लगा.

लेकिन वह सपना कैसे होगा...

'' नॅन्सी '' उसने एक आवाज दिया.

उसे मालूम था की उसे कोई प्रतिसाद आनेवाला नही है.

लेकिन एक झूटी आस...

उसके सरमें पिछेकी तरफसे बहुत दर्द हो रहा था. इसलिए उसने सरको पिछे हाथ लगाकर देखा. उसका हाथ लाल लाल खुनसे सन गया.

उन लोगोंने प्रहार कर उसे बेसुध किया था उसका वह जख्म और निशानी थी. अब उसे पक्का विश्वास हुवा था की वह कोई सपना नही था.

वह तेजीसे रुमके बाहर दौड पडा. बाहर इधर उधर ढूंढते हूए वह गलियारेसे दौड रहा था. वह लिफ्टके पास गया और लिफ्टका बटन दबाया. लिफ्टमें घुसनेसे पहले फिरसे उसने एक बार चारोंतरफ अपनी ढूंढती नजर दौडाई.

कहा गए वे लोग?...

और नॅन्सीकी बॉडी किधर है? ...

की उन्होने लगा दिया उसे ठिकाने...

वह हॉटलके बाहर आकर अंधेरेमें पागलोंकी तरह इधर उधर दौड रहा था. सब तरफ अंधेरा था. आधी रात होकर गई थी. रास्तेपरभी आने जानेवाले बहुतही कम दिखाई दे रहे थे. एक कोनेपर खडा एक टॅक्सीवाला उसे दिखाई दीया.

उसे शायद पता हो...

वह उस टॅक्सीके पास गया, टॅक्सीवालेसे पुछा. उसने दाईतरफ इशारा कर कुछ तो कहा. जॉन टॅक्सीमें बैठ गया और उसने टॅक्सीवालेको टॅक्सी उधर लेनेको कहा.

निराश, हताश हूवा जॉन धीमे गतीसे चलता हूवा अपने रुमके पास वापस आगया. रुममें जाकर उसने अंदरसे दरवाजा बंद कर लिया.

उसने बेडकी तरफ देखा. बेडशीटपर झुर्रिया पडी हूई थी. वह बेडपर बैठ गया.

क्या किया जाये ?...

पुलिसके पास जावो तो वे मुझेही गिरफ्तार करेंगे...

और खुनका इल्जाम मुझपरही लगाएंगे...

और वैसे देखा जाए तो मैही तो हू उसके खुनके लिए जिम्मेदार...

सिर्फ खुनही नही तो उसपर हूए बलात्कारके लिए भी ...

उसने अपने पैर मोडकर घूटने पेटके पास लिए और घूटनोमें अपना मुंह छिपाया. और वह फुटफुटकर रोने लगा.

रोते हूए उसका ध्यान वही कपाटके निचे गिरें कागजके टूकडेने खिंच लिया. वह खडा होगया. अपने आंसू अपने आस्तीनसे पोंछ लिए.

कागजका टूकडा? ... यहां कैसे ?...

उसने वह कागजका टूकडा उठाया.

कागजपर चार अंग्रजी अक्षर लिखे हूए थे - सी, आर, जे, एस. और उन अक्षरोंके सामने कुछ नंबर्स लिखे हूए थे. शायद वे कोई पत्तोके गेमके पॉईंट्स होंगे...

उसने वह कागज उलट पुलटकर देखा. कागजके पिछे एक नंबर था. शायद मोबाईल नंबर होगा.

वह दृढतापुर्वक खडा हो गया -

'' ऍसहोल्स ... मै तुम्हे छोडूंगा नही '' वह गरज उठा.


क्रमश:...

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Hindi Novel - अद्-भूत : Ch-19 : आय प्रॉमीस

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हॉटेलके एक कमरेमे नॅन्सी और जॉन बेडपर एकदुसरेके आमने सामने बैठे थे. जॉनने नॅन्सीके चेहरेपर आती बालोंके लटोंको एक तरफ हटाया.

'' मुझे तो डरही लगा था की शायद हम उनके चंगुलमें ना फंस जाए'' नॅन्सीने कहा.

वह अभीभी उस भयानक मनस्थीतीसे बाहर नही निकल पाई थी.

'' देखो .. मेरे होते हूए तुम्हे चिंता करनेकी क्या जरुरत ?... मै तुम्हे कुछभी नही होने दुंगा... आय प्रॉमीस'' वह उसे सांत्वना देनेकी कोशीश करते हूए बोला.

उसने मंद मंद मुस्कुराते हूए उसके तरफ देखा.

सचमुछ उसे उसके इस शब्दोंसे कितना अच्छा लगा था. ...

धीरेसे जॉन उसके पास खिसक गया. नॅन्सीने उसकी आंखोमें देखा. जॉनभी अब उसकी आंखोसे अपनी नजरे हटानेके लिए तैयार नही था. धीरे धीरे उनके सांसोकी गति बढने लगी. हलकेही जॉनने उसे अपनी बाहोंमें खिंच लिया. उसेभी मानो उसकी सुरक्षीत बाहोमें अच्छा लग रहा था.

जॉनने धीरेसे उसे बेडपर लिटाकर उसका चेहरा अपनी हाथोंमे लेकर वह उसकी तरफ एकटक देखने लगा. धीरे धीरे उसकी तरफ झुकता गया और उसके गर्म होंठ अब उसके कांपते होंठोपर टीक गए. दोनोभी बेकाबु होकर एकदुसरेको आवेगमें चुमने लगे. इतने आवेगमेंकी वे दोनो 'धपाक' से बेडके निचे फर्शपर गिर गए. नॅन्सी निचे और उसके उपर जॉन गिर गया. दर्दसे कराहते हूए नॅन्सीने उसे दूर धकेला,

'' मेरी क्या हड्डीयां तोडोगे? '' वह कराहते हूए बोली.

जॉन झटसे उठ गया और उसे उपर उठानेका प्रयास करने लगा.

'' आय ऍम सॉरी ... आय ऍम सो सॉरी '' वह बोला.

नॅन्सीने उसे एक चांटा मारनेका अविर्भाव किया. उसनेभी डरके मारे अपनी आंखे बंद कर अपना चेहरा दुसरी तरफ हटाया. नॅन्सी मनही मन मुस्कुराई. किसी छोटे बच्चेकी तरह मासूम भाव उसके चेहरेपर उभर आए थे. उसकी इसी मासूम अदापर तो वह फिदा हूई थी. उसने उसका चेहरा अपने हाथोंमे लिया और उसकी होंठोंको वह कसकर चुमने लगी. वह भी उसी तडप, उसी आवेगके साथ जवाबमें उसे चुमने लगा. अब तो उन्होने निचे फर्शपर बिछे गालीचेसे उठकर उपर जानेकेभी जहमत नही उठाई. असलमें वे एक क्षणभी गवाना नही चाहते थे. वे निचे गालीचेपरही लेटकर एकदुसरेंके उपर चुंबनकी बरसात करने लगे. चुमनेके साथही उनके हाथ एकदुसरेके कपडे निकालनेमें व्यस्त थे. जॉन अब उसके सारे कपडे निकालकर उसमें समा जानेको बेताब हूवा था. वह धीरे धीरे बडी बडी सांसोके साथ नॅन्सीके उपर झुकने लगा. इतनेमें... इतनेंमे उनके कमरेके दरवाजेपर किसीने नॉक किया. वे मानो जैसे थे वैसे बर्फ की तरह जम गए. गडबडाकर वे एक दुसरेकी तरफ देखने लगे.

हमें दरवाजा बजनेका आभास तो नही हुवा? ...

तब फिरसे एकबार दरवाजेपर नॉक सुनाई दी - इसबार थोडी जोरसे.

सर्विस बॉय तो नही होगा ...

'' कौन है ?'' जॉनने पुछा.

'' पुलिस ...'' बाहरसे आवाज आया.

दोनो गालिचेसे उठकर कपडे पहनने लगे.

पुलिस यहांतक कैसे पहूंच गई ?...

जॉन और नॅन्सी सोचने लगे.

उन्होने अपने कपडे पहननेके बाद जॉन सहमें हूए स्थितीमें दरवाजेतक गया. उसने फिरसे एक बार नॅन्सीकी तरफ देखा. अब इस परिस्थितीका सामना कैसे किया जाए इसकी वे मनही मन तैयारी करने लगे थे. जॉन कीहोलसे बाहर झांककर देखने लगा. लेकिन बाहर अंधेरेके सिवा कुछ नजर नही आ रहा था.

या उस कीहोलमें कुछ प्रॉब्लेम होगा ...

सावधानीसे, धीरेसे उसने दरवाजा खोला और दरवाजा थोडा तिरछा करते हूए बाहर झांकनेका प्रयास कर रहा था तभी ... क्रिस्तोफर, रोनॉल्ड, पॉल, और स्टीव्हन दरवाजा जोरसे धकेलते हूए कमरेमें घुस गए.

क्या हो रहा है यह समझनेके पहलेही क्रिस्तोफरने दरवाजेको अंदरसे कुंडी लगा ली थी. किसी चित्तेकी फुर्तीसे रोनॉल्डने चाकू निकालकर नॅन्सीके गर्दनपर रख दिया और दुसरे हाथसे वह चिल्लाये नही इसलिये उसका मुंह दबाया.

क्रिस्तोफरनेभी मानो पुर्वनियोजनकी तहत उसका चाकू निकालकर जॉनके गर्दनपर रखा और उसका मुंह दबाकर उसे दबोच लिया. मानो अब पुरी स्थिती उनके कब्जेमें आई हो इस तरहसे वे एकदुसरेकी तरफ देखकर अजीब तरहसे मुस्कुराए.

'' स्टीव्ह इसका मुंह बांध'' क्रिस्तोफरने स्टीव्हनको आदेश दिया.

जैसेही नॅन्सीने चिल्लानेकी कोशीश की रोनॉल्डने उसका मुंह जोरसे दबाते हुए और मजबुतीसे उसे दबोच लिया.

'' पॉल इसकाभी बांध...''

स्टीव्हनने जॉनका मुंह, हाथ और पैर टेपसे बांध दिया. पॉलने नॅन्सीका मुंह और हाथ बांध दीए.

उन्होने जिस फुर्तीसे यह सब हरकतें की उससे ऐसा प्रतित हो रहा था की वे ऐसे कामोंमे बडे तरबेज हो.

अब क्रिस्तोफरके चेहरेपर एक वहशी मुस्कुराहट छुपाए नही छुप रही थी.

'' ए ... इसके आंखोपर कुछ बांधरे ... बेचारेसे देखा नही जाएगा. '' क्रिस्तोफरने कहा.

स्टीव्हनने उनकेही सामानसे एक कपडा निकालकर जॉनकी आंखोपर बांध दिया. अब जॉनको सिर्फ अंधेरेके सिवा कुछ दिखाई नही दे रहा था. और सुनाई दे रहा था वह उन गिद्दोंकी वहशी और राक्षसी हंसी और नॅन्सीका दबा-दबाया हूवा चित्कार.


क्रमश:...

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Hindi Novel - अद्-भूत : Ch-18 : वे चार और ये दोनो (Hindi books literature sahitya)

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अपना पिछा हो रहा है इसका अब पुरा यकिन नॅन्सी और जॉनको हो चूका था. वे दोनोभी घबराए और गडबडाए हूए थे. यह शहर उनके लिए नया था. वे उन चारोंसे बचनेके लिए जिधर रास्ता मिलता उधर जा रहे थे. चलते चलते वे एक ऐसे सुनसान जगहपर आये की जहा लोग लगभग नही के बराबर थे. वैसे रातभी काफी हो चूकी थी. यहभी एक वहां लोग ना होनेकी वजह हो सकती थी. उसने पिछे मुडकर देखा. क्रिस्तोफर और उसके दोस्त अभीभी उनका पिछा कर रहे थे. नॅन्सीका दिल धडकने लगा. जॉनकोभी कुछ सुझ नही रहा था. अब क्या किया जाए, दोनोभी इस संभ्रममे थे. वे तेजीसे चल रहे थे और उनसे जितना दुर जा सकते है उतनी कोशीश कर रहे थे. आगे रास्तेपर तो औरभी घना अंधेरा था. वे दोनो और उनके पिछे उनका पिछा कर रहे वे चार लडके इनके अलावा उनको वहां और कोईभी नही दिख रहा था.

''लगता है उनके खयालमें आया है की हम उनका पिछा कर रहे है '' स्टीव्हन अपने साथीयोंसे बोला.

'' आने दो ... वह तो कभी ना कभी उनके खयालमें आनेही वाला था '' क्रिस्तोफरने बेफिक्र अंदाजमें कहा.

'' वे बहुत डरे हूए भी लग रहे है ... '' पॉलने कहा.

'' डरनाही तो चाहिए ... अब डरके वजहसेही अपना काम होनेवाला है... कभी कभी डरही आदमीको कमजोर बना देता है.. '' रोनॉल्डने कहा.

जॉनने पिछे मुडकर देखा तो वे चारो तेजीसे उनकी तरफ आ रहे थे.

'' नॅन्सी ... चलो दौडो... '' जॉन उसका हाथ पकडते हूए बोला.

एकदुसरेका हाथ पकडकर वे अब जोरसे दौडने लगे.

'' हमें पुलिसमें जाना चाहिए क्या ?'' नॅन्सीने दौडते हूए पुछा.

'' अब यहां कहा है पुलिस... और अगर हम ढूंढकर गएभी ... तो वेभी हमेंही ढूंढ रहे होंगे... अबतक तुम्हारे घरवालोंने पुलिसमें रिपोर्ट दर्ज की होगी ... '' जॉन दौडते हूए किसी तरह बोल पा रहा था.

दौडते हूए वे घने अंधेरेमे डूबे हूए एक संकरी गलीमें घुस गए. क्रिस्तोफर और उसके दोस्तभी उनके पिछेही थे. वे जब गलीमें घुसनेहीवाले थे की उतनेमे एक बडासा ट्रक रास्तेसे उनके और उस गलीके बिचमेंसे गुजर गया. वे ट्रक पास होनेतक रुक गए. और जब ट्रक पास हो चूका था तब उनको उस गलीमें कोई नही दिख रहा था. वे गलीमें घुस गए. गलीके दुसरे सिरे तक तेजीसे दौड गए. वहां रुककर उन्होने आजुबाजु देखा. लेकिन उन्हे जॉन और नॅन्सी कही नही दिखाई दे रहे थे.

क्रिस्तोफर और उसके दोस्त इधर उधर देखते हूए एक चौराहेपर खडे हो गए. उन्हे नॅन्सी और जॉन कहीभी नही दिखाई दे रहे थे.

'' हम सब लोग चारो तरफ फैलकर उन्हे ढूंढते है ... वे हमारे हाथसे छुटना नही चाहिए. '' क्रिस्तोफरने कहा.

चार लोग चार दिशामे, चार रस्तेसे जाकर फैल गए और उन्हे ढूंढने लगे.

नॅन्सी और जॉन रास्तेके किनारे पडे एक ड्रेनेज पाईपमें छिप गए थे. शायद ड्रेनेज पाईप्स नये डालनेके लिए या बदलनेके लिए वहां लाकर डाले होंगे. इतनेमे अचानक उन्हे उनकी तरफ दौडते हूए आ रहे किसीके पैरोकी आहट हो गई. वे अब वहांसे हिलभी नही सकते थे. वे अगर इस हालमें उन्हे मिले तो उनके पास करनेके लिए कुछ नही बचा था. उन्होने बिल्लीके जैसे अपनी आखे मुंदकर अपने आपको जितना हो सकता है उतना सिमटनेकी कोशीश की. इसके अलावा वे करभी क्या सकते थे. ?

अब उनके खयालमें आया की वह दौडकर आनेवाला, उन्ही चारोंमेसे एक, अब उनके पाईपके पास पहूंच गया है. वह नजदिक आतेही जॉन और नॅन्सी एकदम शांत लगभग सांसे रोककर कुछभी हरकत ना करते हूए वैसे ही छिपे रहे. वह अब पाईपके एकदम पास आकर पहूंचा था.

वह उन चारोंमेंसेही एक स्टीव्हन था. उसने आजुबाजु देखा.

'' साले कहा गायब होगए ?'' वह चिढकर अपने आपसेही बुदबुदाया.

उतनेमें स्टीव्हनका पाईपकी तरफ खयाल गया.

जरुर साले इस पाईपमें छिपे होंगे....

उसने अनुमान लगाया. वह पाईपके और करीब गया. वह अब झुककर पाईपमें देखनेही वाला था. इतनेमे....

'' स्टीव... जरा इधर तो आवो .... जल्दी '' उधरसे क्रिस्तोफरने उसे आवाज दिया.

स्टीव्हन पाईपमें झुककर देखते देखते रुक गया, उसने आवाज आया उस दिशामें देखा और मुडकर दौडते हूए उस दिशामें चला गया.

जानेवाले पैरोंका आवाज आतेही नॅन्सी और जॉनने सुकूनकी सांस ली.


क्रमश:...

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Hindi literarture Novel - अद्-भूत : Ch-17 : गेम

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रेल्वे प्लॅटफॉर्मपर जैसे लोगोंका सैलाब उमड पडा था. भिडमें लोग अपना अपना सामान लेकर बडी मुश्कीलसे रास्ता निकालते हूए वहांसे जा रहे थे. शायद अभी अभी कोई ट्रेन आई हो. वही प्लॅटफार्मपर एक कोनेमें स्टीव्हन, पॉल, रोनॉल्ड और क्रिस्तोफर ऍन्डरसन पत्ते खेल रहे थे. उन चारोंमे क्रिस्तोफर, उसके हावभावसे और उसका जो तिनोंपर एक प्रभाव दिख रहा था उससे, उनका लिडर लग रहा था. क्रिस्तोफर लगभग पच्चीस के आसपास, कसे हूवे और मजबूत शरीर का मालिक, एक लंबाचौडा यूवक था.

" देखो अपनी गाडी आनेमें अभी बहूत वक्त है... कमसे कम और तीन गेम हो सकते है...'' क्रिस्तोफरने पत्ते बांटते हूए कहा.

" पॉल तुम इस कागजपर पॉइंट्स लिखो " रोनॉल्डने एक हाथसे पत्ते पकडते हूए और दुसरे हाथसे जेबसे एक कागजका टूकडा निकालकर पॉलके हाथमें देते हूए कहा.

" और, लालटेन जादा हुशारी नही चलेगी' पॉलने स्टीव्हनको ताकीद दी. वे स्टीव्हनको उसके चश्मेकी वजहसे लालटेनही कहते थे. क्रिस्तोफरका ध्यान पत्त्ते खेलते वक्त यूंही प्लॅटफॉर्मपर उमड पडी भिडकी तरफ गया.

भिडमें नॅन्सी और जॉन एकदुसरेका हाथ पकडकर किसी परदेसी अजनबीकी तरह चल रहे थे.

उसने नॅन्सीकी तरफ सिर्फ देखा और खुले मुंह देखताही रह गया.

" बाप, क्या माल है " उसके खुले मुंहसे अनायासही निकल गया. पॉल, रोनॉल्ड और स्टीव्हनभी अपना गेम छोडकर उधर देखने लगे. उनकाभी देखते हूए खुला मुह बंद होनेको तैयार नही था.

" कबूतरी कबूतरके साथ भाग आई है शायद" क्रिस्तोफरके अनुभवी नजरने भांप लिया.

' उस कबुतरके बजाय मै उसके साथ रहना चाहिए था' पॉल ने कहा.

क्रिस्तोफरने सबके पाससे पत्ते छिनकर लेते हूए कहा, ' देखो, अब यह गेम बंद करदो... हम अब एक दुसराही गेम खेलते है "

सबके चेहरे खुशीसे दमकने लगे. वे क्रिस्तोफरके बोलनेका छिपा अर्थ जानते थे. वैसे वे वह गेम कोई पहली बार नही खेल रहे थे. सब उत्साहसे भरे एकदम उठकर खडे होगए.

" अरे, देखो जरा खयाल रहे... साले कही घुस जाएंगे तो बादमें मिलेंगे नही " रोनॉल्डने उठते हूए कहा.

फिर वे उनके खयालमें ना आए इतना फासला रखते हूए उनके पिछे पिछे जाने लगे.

" ऐ , लालटेन तुम जरा आगे जावो... साले पहलेही तुझे चश्मेसे जरा कमही दिखता है ." क्रिस्तोफरने स्टीव्हनको आगे धकेलते हूए कहा. स्टीव्हन नॅन्सी और जॉनके खयालमें नही आये ऐसा सामने दौडते हूए गया.

दिनभर इधर उधर घुमनेमें वक्त कैसा निकल गया यह जॉन और नॅन्सीको पताही नही चला. कुछ देर बाद शामभी हो गई. जॉन और नॅन्सी एक दुसरेका हाथ पकडकर मस्त मजेमें फुटपाथपर चल रहे थे. सामने एक जगह रास्तेपर हार्ट शेपके हायड्रोजसे भरे लाल गुब्बारे बेचनेवाला फेरीवाला उन्हे दिखाई दिया. वे उसके पास गए. जॉनने गुब्बारोंका एक बडासा दस्ता खरीदकर नॅन्सीको दिया. पकडनेके लिए जो धागा था उसके हिसाबसे वह दस्ता बडा होनेसे धागा टूट गया और वह दस्ता उडकर आकाशकी ओर निकल पडा. जॉनने दौडकर जाकर, उंची उंची छलांगे लगाकर उसे पकडनेका प्रयासे किया लेकीन वह धागा उसके हाथ नही आया. वे लाल गुब्बारे मानो एकदुसरेको धक्के देते हूए उपर आकाशमें जा रहे थे. जॉनकी उस धागेको पकडनेकी जी तोड कोशीश देखकर नॅन्सी खिलखिलाकर हंस रही थी.

और उनके काफी पिछे क्रिस्तोफर , रोनॉल्ड, स्टीव्हन और पॉल किसीके खयालमें नही आए इसका ध्यान रखते हूए उनका पिछा कर रहे थे.

नॅन्सी और जॉन एक जगह आईसक्रीम खानेके लिए रुक गए. उन्होने एक कोन लिया और उसमेंही दोनो खाने लगे. आईसक्रीम खातेवक्त नॅन्सीका ध्यान जॉनके चेहरेकी तरफ गया और वह खिलखिलाकर हंस पडी.

'' क्या हूवा ?'' जॉनने पुछा.

'' आईनेमें तो देखो '' नॅन्सी वही पास एक गाडीको लगे आईनेकी तरफ इशारा कर बोली.

जॉनने आईनेमें देखा तो उसके नाक के सिरेको आईसस्क्रीम लगा था. अपना वह हुलिया देखकर उसेभी हंसी आ रही थी. उसने वह पोंछ लिया और एक प्रेमभरी नजरसे नॅन्सीकी तरफ देखा.

'' सचमुछ अपनी रुची कितनी मिलती जुलती है '' नॅन्सीने कहा.

'' फिर ... वह तो रहनेही वाली है... क्योंकी ...वुई आर द परफेक्ट मॅच"' जॉन गर्वसे बोल रहा था.

आईस्क्रीम खाते हूए अचानक नॅन्सीका खयाल दुर खडे क्रिस्तोफरकी तरफ गया. क्रिस्तोफरने झटसे अपनी नजर फेर ली. नॅन्सीको उसकी नजर अजीब लगी थी और उसकी गतिविघीयांभी.

'' जॉन मुझे लगता है अब हमें यहांसे निकलना चाहिए.'' नॅन्सीने कहा और वह वहांसे निकल पडी. जॉन उलझनमें सहमासा उसके पिछे पिछे जाने लगा.

वहांसे आगे काफी समयतक चलनेके बाद वे एक कपडेके दुकानमें घुस गए. अब काफी रात हो चुकी थी. नन्सीको शक था की कहीं वह पहले दिखा हुवा लडका उनका पिछा तो नही कर रहा है. इसलिए उसने दुकानमें जानेके बाद वहांसे एक संकरी दरारसे बाहर झांककर देखा. बाहर क्रिस्तोफर उसके और दो साथीके साथ चर्चा करते हूए इधर उधर देख रहा था. जॉन उन लोगोंको दिख सके ऐसे जगहपर खडा था.

'' जॉन पिछे मुडकर मत देखो... मुझे लगता है वह लडके अपना पिछा कर रहे है. '' नॅन्सी दबे स्वरमें बोली.

'' कौन ? .. किधर ? '' जॉनने गडबडाते हूए पुछा.

'' चलो जल्दी यहांसे हम निकल जाते है... वे हमतक पहूंचना नही चाहिए... '' नॅन्सीने उसे वहांसे बाहर निकाला.

वे दोनो लंबे लंबे कदम डालते हूए फुटपाथपर चलरहे लोगोंकी भिडसे रास्ता निकालते हूए वहांसे जाने लगे.


क्रमश:...

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Hindi Novel - अद्-भूत : Ch-16 : अलविदा

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ऑफिसबॉय चाय पाणी लेकर आनेसे बेकर जो हकिकत बता रहा था उसमें खंड पड गया. सॅमको और उसके साथीदारको आगेकी कहानी सुननेकी बडी उत्सुकता हो रही थी. सब लोगोंका चायपाणी होनेके बाद डिटेक्टीव्ह बेकर फिरसे आगेकी कहानी बताने लगा ....


... जॉनकी और नॅन्सीकी टॅक्सी रेल्वे स्टेशनपर पहूंच गई. दोनो टॅक्सीसे उतर गए. टॅक्सीवालेका किराया चूकाकर वे अपना सामान लेकर टिकीटकी खिडकीके पास चले गए. कहां जाना है यह उन्होने अबतक तय नही किया था. बस यहांसे निकल जाना है इतनाही उन्होने तय किया था. एक ट्रेन प्लॅटफॉर्मपर खडीही थी. जॉनने जल्दीसे उसी ट्रेनका टिकट निकाला.

प्लॅटफॉर्मपर वे अपना टिकट लेकर अपना रेल्वेका डिब्बा ढूंढने लगे. डिब्बा ढूंढनेके लिए उन्हे जादा मशक्कत नही करनी पडी. मुख्य दरवाजेसे उनका डिब्बा नजदिकही था. ट्रेन निकलनेका समय होगया था इसलिए वे तुरंत डिब्बेमें चढ गए. डिब्बेमें चढनेके बाद उन्होने अपनी सिट्स ढूंढ ली. अपने सिट के पास अपना सारा सामान रख दिया. उतनेमें गाडी हिलने लगी. गाडी निकलनेका वक्त हो चूका था. जैसेही गाडी निकलने लगी वैसे नॅन्सी जॉनको लेकर डिब्बेके दरवाजेके पास गई. उसे वहांसे जानेसे पहले अपने शहरको एक बार जी भरके देख लेना था. .

ट्रेनमें नॅन्सी और जॉन एकदम पास पास बैठे थे. उन्हे दोनोंको एकदुसरेका सहारा चाहिए था. आखिर उन्होने जो फैसला किया था उसके बाद उन्हे बस एकदुसरेकाही तो सहारा था. अपने घरसे सारे रिश्ते , सारे बंध तोडकर वे बहुत दुर जा रहे थे. नॅन्सीने अपना सर जॉनके कंधेपर रख दिया.

'' फिर ... अब कैसा लग रहा है '' जॉनने माहौल थोडा हलका करनेके उद्देशशे पुछा.

'' ग्रेट'' नॅन्सीभी झूटमुठ हंसते हूए बोली.

जॉन समझ सकता था की भलेही वह उपरसे दिखा रही हो लेकिन घर छोडने का दुख उसको होना लाजमी था. उसे सहारा देनेके उद्देशसे उसने उसे कसकर पकड लिया.

'' तुम्हे कुछ याद आ रहा है ?'' जॉनने उसे औरभी कसकर पकडते हूए पुछा.

नॅन्सीने प्रश्नार्थक मुद्रामें उसकी तरफ देखा.

'' नही मतलब कोई घटना कोई प्रसंग... जब मैने तुम्हे ऐसेही कसकर पकडा था. ''

'' मै कैसे भूल सकती हू उस घटना को... '' नॅन्सी उसने जब ब्लॅंकेटसे लपेटकर उसे कसकर पकडा था वह प्रसंग याद कर बोली.

'' और तुमभी ... '' नॅन्सी उसके गालपर हाथ मलते हूए उसे मारे हूए चाटेंकी याद देते हूए बोली.

दोनो खिलखिलाकर हंस पडे.

जब दोनोंका हसना थम गया नॅन्सी इतराते हूए उसे बोली , '' आय लव्ह यू''

'' आय लव्ह यू टू'' उसने उसे और नजदीक खिंचते हूए कहा.

दोनोभी कसकर एकदूसरेके आलिंगणमें बद्ध हो गए.

नॅन्सीने ट्रेनकी खिडकीसे झांककर देखा. बाहर सब अंधेरा छाया हूवा था. जॉनने नॅन्सीकी तरफ देखा.

'' तुम्हे पता है ... तुम्हे माफी मांगते वक्त वह फुलोंका गुलदस्ता मैने क्यों लाया था. ?'' जॉन फिरसे उसे वह माफी मांगनेका प्रसंग याद दिलाते हूए बोला. वह प्रसंग वह कैसे भूल सकता था ? उसी पलमेंतो उनके प्रेमके बिज बोए गए थे.

'' जाहिर है माफी जादा इफेक्टीव होना चाहिए इसलिए..." नॅन्सीने कहा.

'' नही .... अगर मै सच कहूं तो तुम्हे विश्वास नही होगा.'' जॉनने कहा.

'' फिर ... क्यों लाया था?''

'' मेरे हाथ फिरसे कोई अजीब इशारे कर गडबड ना करदे इसलिए ... नहीतो फिरसे शायद और एक चांटा मिला होता. '' जॉनने कहा.

नॅन्सी और जॉन फिरसे खिलखिलाकर हंस पडे.

धीरे धीरे उनकी हंसी थम गई. फिर थोडी देर सब सन्नाटा छाया रहा. सिर्फ रेल्वेका आवाज आता रहा. उस सन्नाटेमें न जाने क्यूं नॅन्सीको लगा की कोई इस ट्रेनमें बैठकर अपना पिछा तो नही कर रहा है..

नही ... कैसे मुमकीन है...

हम भाग जानेवाले है यह सिर्फ जॉन और उसके सिवा और किसीकोभीतो पता नही था...


क्रमश:...

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Hindi Novel - अद्-भूत : Ch-15 : फैसला

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जॉनके दिमागमें विचारोकी कश्मकश चल रही थी. अब वह जो फैसला लेनेवाला था उसकी वजहसे होनेवाले सब परिणामोंके बारेमें वह सोच रहा था. नॅन्सीके साथ लायब्ररीमें किए चर्चासे दो-तीन बाते एकदम साफ हो गई थी -

एक तो नॅन्सी भलेही उपरसे ना लगे लेकिन अंदरसे वह बहुत खंबीर और जबान की पक्की है...

वह किसीभी हालमें मुझे नही छोडेगी...

या फिर वैसा सोचेगीभी नही .....

लेकिन अब उसे अपने आपकाही भरोसा नही लग रहा था.

मैभी उसकी तरह अंदरसे खंबीर और पक्का हू क्या ?...

बुरे वक्तमें मेरा उसके प्रती प्रेम वैसाही कायम रहेगा क्या ?...

या बुरे वक्तमें वह बदल सकता है ?..

वह अब खुदकोही आजमा रहा था. वक्तही वैसा आया था की उसे खुदकाही विश्वास नही लग रहा था.

परंतू नही ...

मुझे ऐसा ढिला ढाला रहकर नही चलेगा...

मुझेभी कुछ ठोस फैसला लेना होगा..

और एक बार निर्णय लिया तो फिर बादमें उसके कुछ भी परिणाम हो, मुझे उसपर कायम रहना होगा...


जॉनने आखीर मनही मन एक ठोस फैसला लिया.

अपने कमरेका दरवाजा अंदरसे बंद कर वह उसे जिसकी जरुरत पडेगी वह सारी चिजे अपने बॅगमें भरने लगा.

सबकुछ ठिक तो होगा ना ?...

मुझे मेरे घरवालोंको सब बताना चाहिए क्या ?...

सोचते सोचते उसने अपनी सारी चिजें बॅगमें भर दी.

कपडे वैगेरा बदलकर उसने कुछ बचातो नही इसकी तसल्ली की. आखरी बची हूई एक चिज डालकर उसने बॅककी चैन लगाई. चेनका एक विशीष्ट ऐसा आवाज हूवा. उसने वह बॅग उठाकर सामने टेबलपर रख दी और टेबलके सामने रखे कुर्सीपर थोडा सुस्तानेके लिए बैठ गया. वह एक-दो पलही बैठा होगा की इतनेमें उसका मोबाईल व्हायब्रेट हो गया. उसने जेबसे मोबाईल निकालकर उसका डीस्प्ले देखा. डिस्प्लेपर उसे 'नॅन्सी' ऐसे डिजीटल शब्द दिखाई दिए. वह तुरंत कुर्सीसे उठ खडा हूवा. मोबाईल बंद किया, बॅग उठाई और धीरेसे कमरेसे बाहर निकल गया.

इधर उधर देखते हूए सावधानीसे जॉन मुख्य दरवाजेसे बाहर आ गया और उसने दरवाजा बाहरसे खिंचकर बंद कर लिया. फिर जॉगींग कियेजैसा वह कंधेपर बॅग लेकर कंपाऊंडके गेटके पास गया. बाहर रास्तेपर उसे एक टॅक्सी रुकी हूई दिखाई दी. कंपाऊंड के गेटसे बाहर निकलकर उसने गेटभी खिंचकर बंद कर लिया. टॅक्सीके पास पहूंचतेही उसे टॅक्सीमें पिछली सिटपर बैठकर उसकी राह देख रही नॅन्सी दिखाई दी. दोनोंकी नजरे मिली. दोनो एकदुसरेकी तरफ देखकर मुस्कुराए. झटसे जाकर वह बॅगके साथ नॅन्सीके बगलमें टॅक्सीमें घुस गया. टॅक्सीके दरवाजेका बडा आवाज ना हो इसका खयाल रखते हूए उसने सावधानीसे दरवाजा धीरेसे खिंच लिया. दोनो एकदुसरेकी बाहोंमे घुस गए. उनके चेहरेपर एक विजयी हास्य फैल गया था.

अब उनकी टॅक्सी घरसे बहुत दुर तेजीसे दौड रही थी. वे दोनो तेजीसे दौडती टॅक्सीके खिडकीसे आरहे तेज हवाके झोकेंका आनंद ले रहे थे. लेकिन उन्हे क्या पता था की एक काला साया पिछे एक दुसरी टॅक्सीमें बैठकर उनका पिछा कर रहा था.....


.... डिटेक्टीव्ह बेकर हकिकत बयान करते हूए रुक गया. डिटक्टीव सॅमने वह क्यों रुका यह जाननेके लिए उसके तरफ देखा. डिटेक्टीव्ह बेकरने सामने रखा ग्लास उठाकर पाणीका एक घूंट लिया. तबतक ऑफिसबॉयने चाय पाणी लाया था. डिटेक्टीव्हने वह उसके सामने बैठे डिटेक्टीव सॅम और उसके साथ आये एक ऑफिसरको परोसनेके लिए ऑफिसबायको इशारा किया.


क्रमश:...

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Hindi Novel - अद्-भूत : Ch-14 : चिजे अपने आप नही बदलती... हमे उन्हे बदलना पडता है

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क्लासमें एक लेडी टीचर पढा रही थी. क्लासमें कॉलेजके छात्र ध्यान देकर उन्हे सुन रहे थे. उन्ही छात्रोमें जॉन और नॅन्सी बैठे हूए थे.

'' सो द मॉरल ऑफ द स्टोरी इज... कुछभी फैसला न लेते हूए बिचमेंही लटकनेसे अच्छा है कुछतो एक फैसला लेना ...'' टीचरने अबतक पढाए पाठका निष्कर्ष संक्षेपमें बताया.

नॅन्सीने छूपकर एक कटाक्ष जॉनकी तरफ डाला. दोनोंकी आखें मिल गई. दोनोंभी एक दुसरेकी तरफ देख मुस्कुराए. नॅन्सीने एक नोटबुकका पन्ना जॉनको दिखाया. उस नोटबुकके पन्नेपर बडे अक्षरोंमे लिखा था 'लायब्ररी'. जॉनने हां मे अपना सर हिलाया. उतनेमें पिरीयड बेल बजी. पहले टिचर और बादमें छात्र धीरे धीरे क्लाससे बाहर जाने लगे.

जॉन हमेशा की तरह जब लायब्ररीमें गया तब ब्रेक टाईम होनेसे वहां कोईभी छात्र नही थे. उसने नॅन्सीको ढूंढनेके लिए इधर उधर नजर दौडाई. नॅन्सी एक कोनेमे बैठकर किताब पढ रही थी. या कमसेकम वैसा दिखावा करनेकी चेष्टा कर रही थी. नॅन्सीने आहट होतेही किताबसे सर उपर उठाकर उधर देखा.

दोनोंकी नजरे मिलतेही वह वहांसे उठकर किताबोंके रॅकके पिछे जाने लगी. जॉनभी उसके पिछे पिछे जाने लगा. एकदुसरेसे कुछभी ना बोलते हूए या कुछभी इशारा ना करते हूए सबकुछ हो रहा था. उनका यह शायद रोजका दिनक्रम होगा. नॅन्सी कुछ ना बोलते हूए भलेही रॅकके पिछे जा रही थी लेकिन उसके दिमागमें विचारोंका तुफान उमड पडा था.

जो भी हो आज कुछ तो आखरी फैसला लेनाही है...

ऐसे कितने दिन तक ना इधर ना उधर इस हालमें रहेंगे...

टीचरने जो पढाए पाठका संक्षेपमें निष्कर्ष बताया था.. वह सही था...

हमें कुछ तो ठोस निर्णय लेनाही होगा...

आर या पार ...

बस अब बहुत हो गया ...

उसके पिछे पिछे जॉन रॅकके पिछे कुछ ना बोलते हूए जा रहा था. लेकिन उसके दिमागमेंभी विचारोंका सैलाब उमड पडा था.

हमेशा नॅन्सी पिरियड होनेके बाद लायब्रीमें मिलनेके लिए इशारा करती थी. ...

लेकिन आज उसने पिरियड शुरु था तबही इशारा किया..

उसके घरमें कुछ अघटीत तो नही घटा...

उसके चेहरेसे वह किसी दूविधामें लग रही थी ...

अपने घरके दबावमें आकर वह मुझे छोड तो नही देगी...

अलग अगल प्रकारके विचार उसके दिमागमें घुम रहे थे.

रॅकके पिछे कोनेमें किसीके नजरमें नही आये ऐसे जगहपर नॅन्सी पहूंच गई और पिछेसे दिवारको अपना एक पैर लगाकर वह जॉनकी राह देखने लगी.

जॉन उसके पास जाकर पहूंचा और उसके चेहरेके भाव पढनेकी कोशीश करते हूए उसके सामने खडा हो गया.

'' तो फिर तय हूवा ... आज रात ग्यारह बजे तैयार रहो ..'' नॅन्सीने कहा.

चलो मतलब अबभी नॅन्सी अपने घरके लोगोंके दबावमें नही आयी थी...

जॉनको सुकूनसा महसुस हूवा.

लेकिन उसने सुझाया हूवा यह दुसरा रास्ता कहां तक सही है? ...

यह एकदम चरम भूमीकातो नही हो रही है ? ...

'' नॅन्सी तुम्हे नही लगता की हम जरा जल्दीही कर रहे है... हम कुछ दिन रुकेंगे... और देखते है कुछ बदलता है क्या ... '' जॉनने कहा.

'' जॉन चिजे अपने आप नही बदलती... हमें उन्हे बदलना पडता है... '' नॅन्सीने दृढतासे कहा.

उनकी बहूत देर तक चर्चा चलती रही. जॉनको अभीभी उसकी भूमीका सही नही लग रही थी. लेकिने एक तरहसे उसका सहीभी था. कभी कभी ताबडतोड निर्णय लेनाही अच्छा होता है. जॉन सोच रहा था.

लेकिन इस फैसलेके लिए मै अबभी पूरी तरहसे तैयार नही हूं...

मुझे मेरे घरके लोगोंके बारेंमेंभी सोचना चाहिए...

लेकिन नही हम कितने दिन तक इस तरह बिचमें लटके रहेंगे...

हमें कुछतो ठोस कदम उठाना जरुरी है...

जॉन अपना एक फैसलेपर पहूंचकर दृढतासे उसपर कायम रहनेका प्रयास कर रहा था.

उधर रॅकके पिछे उन दोनोंकी चर्चा चल रही थी और इधर दो रॅक छोडकर एक साया छूपकर उन दोनोंकी सब बातें सुन रहा था.


क्रमश:...

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Hindi Novel - अद्-भूत : Ch-13 : प्रेम का बिज

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धीरे धीरे जॉन और नॅन्सी एकदूसरेके नजदीक खिंचते चले गए. उनके दिलमें कब प्रेमका बिज पनपना शुरु होगया उन्हे पता ही नही चला. झगडेसेभी प्रेमकी भावना पनप सकती है यह वे खुद अनुभव कर रहे थे. कॉलेजमे कोई पिरियड खाली होने पर वे मिलते. कॉलेज खत्म होनेपर मिलते. लायब्रीमें पढाईके बहानेसे मिलते थे. मिलनेका एक भी मौका वे छोडना नही चाहते थे. लेकिन सब छिप छिपकर चल रहा था. उन्हेने उनका प्रेम अभीतक किसीके खयालमें आने नही दिया था. लेकिन जो किसीके खयालमें नही आये उसे प्रेम कैसे कहे? या फिर एक वक्त ऐसा आता है की प्रेमी इतने बिन्दास हो जाते है की उनका प्रेम किसीके खयालमें आयेगा या किसीको पता चलेगा इस बातकी फिक्र करना वे छोड देते है. लोगोको अपना प्रेम पता चले ऐसी सुप्त भावनाभी शायद उनके मनमे आती हो.

काफी रात हो चूकी थी. अपनी बेटी अभीतक कैसे घर वापस नही आई यह चिंता नॅन्सीके पिता को खाये जा रही थी. वे बेचैन होकर हॉलमें चहलकदमी कर रहे थे. वैसी उन्होने नॅन्सीको पुरी छूट दे रखी थी. लेकिन ऐसी गैर जिम्मेदाराना वह कभी नही लगी थी. कभी देर होती तो वह घर फोन कर बताती थी. लेकिन आज उसने फोन करनेकीभी जहमत नही उठाई थी. इतने सालका उसके पिताका अनुभव कह रहा था की मामला कुछ गंभीर है.

नॅन्सी किसी गलत संगतमें तो नही फंस गई?...

या फिर ड्रग्ज वैगेरेकी लत तो नही लगी उसे ?...

अलग अलग प्रकारके अलग अलग विचार उनके दिमागमें घुम रहे थे. इतनेमें उन्हे बाहर कोई आहट हूई.

एक बाईक आकर घरके कंपाऊंडके गेटके सामने रुकी. बाईकके पिछेकी सिटसे नॅन्सी उतर गई. उसने सामने बैठे जॉनके गालका चूंबन लिया और वह गेटके तरफ निकल दी.

घरके अंदरसे, खिडकीसे नॅन्सीके पिता वह सब नजारा देख रहे थे. उनके चेहरेसे ऐसा लग रहा था की वे गुस्सेसे आगबबुला हो रहे थे. अपनी बेटीको कोई बॉय फ्रेंड है यह उनको गुस्सा आनेका कारण नही था. कारण कुछ अलग ही था.

हॉलमे सोफेपर नॅन्सीके पिता बैठे हूए थे और उनके सामने गर्दन झुकाकर नॅन्सी खडी थी.

'' इन ब्लडी एशीयन लोगोंके अलावा तुम्हे दूसरा कोई नही मिला क्या? '' उनका गुस्सेसे भरा गंभीर स्वर गुंजा.

नॅन्सीके मुंहसे शब्द नही निकल पा रहा था. वह अपने पितासे बात करनेके लिए हिंम्मत जुटानेका प्रयास कर रही थी. उतनेमे नॅन्सीका भाई जॉर्ज कोलीन्स, उम्र लगभग तिस के आसपास, गंभीर व्यक्तीमत्व, हमेशा किसी सोचमें खोया हूवा, ढीला ढीलासा रहनसहन, घरमेंसे वहा आ गया. वह नॅन्सीके बगलमें जाकर खडा हो गया. नॅन्सीकी गर्दन अभीभी झूकी हूई थी. उसका भाई बगलमें आकर खडा होनेसे उसमें थोडा ढांढस बंध गया. वह गर्दन निचेही रखकर अपनी हिम्मत जुटाकर एक एक शब्द तोलमोलकर बोली, '' वह एक अच्छा लडका है ... आप उसे एक बार मिल तो लो ''

'' चूप बैठो ... मुरख .. मुझे उससे मिलनेकी बिलकूल इच्छा नही. .. अगर तुम्हे इस घरमें रहना है तो तुम मुझे दुबारा उसके साथ दिखनी नही चाहिए... समझी '' उसके पिताने अपना अंतिम फैसला सुना दिया.

नॅन्सीके आंखोमें आंसू आगए और वहा से अपने आंसू छिपाते हूए वह घरके अंदर दौड पडी. जॉर्ज सहानुभूतीसे उसे अंदर जाते हूए देखता रहा.

घरमें किसीकीभी पिताजीसे बहस करनेकी हिम्मत नही थी.

जॉर्ज हिम्मत जुटाकर उसके पिताजीसे बोला, , '' पप्पा... आपको ऐसा नही लगता की आप थोडे जादाही कठोर हो रहे हो .... आपने कमसे कम नॅन्सी क्या बोलना चाहती है यह तो सुनना चाहिए... और एक बार वक्त निकालकर उस लडकेसे मिलनेमे क्या हर्ज है.?''

'' मै उसका बाप हूं... उसका भला बूरा मेरे सिवा और कौन जान सकता है?.. और तुम्हारी नसिहत तुम्हारे पास ही रखो... मुझे उसके तुम्हारे जैसे हूए हाल देखनेकी बिलकुल इच्छा नही है... तुमनेभी एक एशीयन लडकीसे शादी की थी... आखिर क्या हूवा?... तुम्हारी सब प्रॉपर्टी हडप कर उसने तुम्हे भगवान भरोसे छोड दिया..'' उसके पिताजी तेजीसे कदम बढाते हूए गुस्सेसे कमरेसे बाहर जाने लगे.

'' पप्पा आदमीका स्वभाव आदमी-आदमीमें फर्क लाता है... ना की उसका रंग, या उसका राष्ट्रीयत्व...'' जॉर्ज उसके पिताजीको बाहर जाते हूए उनकी पिठकी तरफ देखकर बोला.

उसके पिताजी जाते जाते अचानक दरवाजेमें रुक गए और उधर ही मुंह रखते हूए कठोर लहजेमें बोले, ''

'' और तुम्हे उसकी पैरवी करनेकी बिलकुल जरुरत नही... और ना ही उसे सपोर्ट करनेकी ''

जॉर्ज कुछ बोले इसके पहलेही उसके पिताजी वहांसे जा चूके थे.

इधर नॅन्सीके घरके बाहर अंधेरेमें खिडकीके पास छिपकर एक काला साया अंदर चल रहा यह सारा नजारा देख और सुन रहा था.


क्रमश:...

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Hindi is defined as the official language in the Indian constitution and considered to be a dialect continuum of languages spoken or the name of an Indo-Aryan language. It is spoken mainly in in northern and central parts of India (also called "Hindi belt") The Native speakers of Hindi amounts to around 41% of the overall Indian population. Which is the reason why the entertainment industry in India mainly uses Hindi. The entertainment industry using Hindi is also called as bollywood. Bollywood is the second largest entertainment industry producing movies in the world after Hollywood. Hindi or Modern Standard Hindi is also used along with English as a language of administration of the central government of India. Urdu and Hindi taken together historically also called as Hindustani.