उपन्यास - अद्-भूत
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Thursday, March 27, 2008

Ch-62 : लता (शून्य-उपन्यास) Hindi

बंगलेके बाई तरफ एक जगह एक फुलोंसे लदी हूई लता थी. फुलोकी खुशबुभी मन मोह लेनेवाली थी. वह लता बंगलेके दिवारका, खिडकीका और पाईपका सहारा लेते हूए उपर टेरेसतक पहूंच गई थी. उसने टॉर्चकी रोशनी डालते हूये उस लता को निचेसे उपरतक गौरसे देखा. वह फुलोंसे पुरीतरह लदी हूई थी. फिर उसने उसकी तरफ उपरसे निचे तक गौरसे देखा. लताके तले बहुत सारा कचरा पडा हूवा था. निचे पॉलीथीन बॅग्ज, कागजके मसले हूए टूकडे, इस तरह का बहुत सारा कचरा पडा हूवा था. जॉन घूटनोपर बैठकर उस कचरेमे कुछ मिलता है क्या यह देखने लगा. उसने अपने जेबसे एक बडीसी पॉलीथीन बॅग निकाली और उसमें वह वहा के कचरेसे जो भी महत्वपुर्ण लगा या महत्वपुर्ण होनेकी संभावना थी ऐसा कचरा उस बॅगमे ठूसने लगा. उस कचरेमें ढूंढनेके बाद उसने उस लता को पकडकर जोर जोरसे हिलाया. उसके शरीरपर फुलोंकी बरसात होने लगी. और कुछ गिरनेका 'धप.. धप' ऐसा आवाज आने लगा. उसने टॉर्च के रोशनीमें गौरसे देखा तो उस लताके टहनीयोंमे अटका हूवा और कुछ कचरा निचे गिर गया था. उसमेंकाभी कुछ छाटकर उसने अपने बॅगमें ठूंस दिया. उसे एक पॉलीथीनकी बॅग मिल गई. उसका मुंह गांठ मारकर बंधा हूवा था. उसने वह पॉलीथीन बॅग हिलाकर देखी. अंदरसे कुछ बजनेका आवाज आ रहा था. जो भी होगा बादमें देखेंगे...

ऐसा सोचकर उसने वह बॅगभी अपने बॅगमें डाल दी.

चलो अब बहुत हो गया...

अब मुझे चलना चाहिए...

जॉनने बॅग उठाई और कंपाऊंडकी तरफ वापस जानेके लिए निकल पडा.

जॉनको घर आते आते सुबहके चार बज चूके थे. वह पुरी तरहसे थक चूका था. पॉलीथीन बॅग निचे रखकर दुसरे जखमी हाथको संभालते हूऐ उसने क्वार्टरका दरवाजा खोला. उसे याद आगया की एकबार ऐसेही जब उसका अॅक्सीडेंट हुवा था तब अँजेनीने उसे संभालते हूए घर लाया था. और क्वार्टरका ताला उसनेही खोला था. उसकी याद आतेही उसका मन फिरसे खट्टू होगया.

दरवाजा खोलते खोलते उसे याद आया -

अरे व्हिस्कीकी बॉटल लाना तो मै भूलही गया....

मै बाहर निकलने का एक उद्देश व्हिस्कीकी बॉटल्स लाना यह था और वही मै भूल गया ...

दरवाजा खोलकर निचे रखे पॉलीथीनकी थैलीकी तरफ देखकर उसने सोचा -

चलो तो अपना दर्द भूलनेके लिए अपने पास और एक काम है...

इस कचरेमें कुछ महत्वपुर्ण मिलता है क्या यह ढूंढना...

पॉलीथीनकी थैली उठाकर वह घरके अंदर चला गया. अंदरसे दरवाजा बंद कर लिया और सोफेपर बैठकर वह उस थैलीसे एक एक मसला हूवा कागज बाहर निकालकर उसे ठिक कर उसमें कुछ मिलता है क्या यह देखने लगा. सब कागजके टूकडे टटोलकर खतम होगए लेकिन कुछ खास नही मिल रहा था. फिर वह वहांसे उठाकर लाई पॉलीथीन बॅग्ज खोलकर देखने लगा. कुछ बॅग्जमें बचे हूए, सडे हूए मुंगफलीके दाने थे. तो कुछ बॅग्जकी बहुतही गंदी बदबू आ रही थी. आखिर उसे एक गांठ मारी हूई पॉलीथीनकी थैली मिल गई. उसने उस थैलीकी गांठ बडी सावधानीसे खोली. अंदरसे बदबू आयेगी इस अनुमानसे मुंह बाजू हटाया. लेकिन अंदरसे कोई बदबू नही आयी. उसने थैलीमें झांककर देखा. अंदर कुछ कांचके टूकडे थे.

टूटे ग्लासके होंगे....

वह सोफेसे उठकर निचे मॅटपर घुटने टेंककर बैठ गया. उसने वे टूकडे बडी सावधानीसे थैलीसे बाहर मॅटपर उंडेल दिए. दो-तीन टूकडोंपर उसे खुनके दाग दिखाई दिए.

अरे वा यह तो कातिलका या उसके साथीका खुन दिख रहा है...

उसने खुनके दागवाला एक टूकडा हलकेसे अपने हाथमें लिया.

अब मुझे इस धागेसेही कातिलतक पहूचना है...

लेकिन क्या इस खुनसे मै कातिलके बारेमें कुछ जानकारी पा सकता हू ?

वह सारी संभावनाए टटोलकर देखने लगा. और फिर अचानक उसकी आंखे खुशीसे चमकने लगी. उस कांचके टूकडेपर उसे खुनसे सने हाथके और उंगलियोंके निशान दिखाई देने लगे.

" यस्स" वह खुशीसे चिल्लाया.

दुसरे खुनके दाग लगे टूकडेभी उसने सावधानीसे उठाकर गौरसे देख लिए. उसपरभी उंगलियोंके निशान दिख रहे थे. वैसेही वे कांचके टूकडे हाथमें लेकर वह फोनके पास चला गया. वे टूकडे बगलमें एक टेबलपर रखकर उसने एक नंबर डायल किया.

" सॅम... मै तुम्हारे उधर आ रहा हू... अभी ... एक बहुतही महत्वपुर्ण धागा मेरे हाथ लगा है..." वह अपनी खुशी छिपा नही पाकर उत्साहभरे स्वरमें फोनपर बोल रहा था.

क्रमश:...

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