उपन्यास - अद्-भूत
The horror, suspense, thriller online Hindi Novel based on my english screenplay 'Latched' registered with FWA.

Tuesday, March 25, 2008

Ch-60 : देर रात गए (शून्य-उपन्यास) Hindi

रातके ढाई बज चूके थे. रातके भयाण संन्नाटेमें जॉन अकेलाही गाडी तेजीसे चलाते हूए शहरमें घुम रह था. दंगोंकी वजहसे आजकल रास्ते जल्दीही खाली हो जाते थे. और अब तो रातके ढाई बजनेकी वजहसे इस वक्त रास्तेपर कोईभी नही दिख रहा था. अपनेही धुनमें एक चौकसे तेजीसे गुजरते हूए जॉनको पिछेसे सायरनका आवाज सुनाई दिया. उसने मिररमें देखा. एक पुलिसकी गाडी उसका पिछा कर रही थी.

गाडी रोकु या नही ?...

जॉनने एक क्षण के लिए सोचा और फिर गाडीका ब्रेक दबाया. उसने अपनी गाडी रस्तेके किनारे खडी की. पिछेसे पुलिसकी गाडी आकर उसके गाडीके आगे जाकर रुकी. पहले पुलिसने जॉनकी गाडीकी तरफ और फिर गाडीके अंदर झांककर देखा. अबतक जॉन उतरकर गाडीके बाहर आया था. दो पुलिस उतरकर उसके पास गए.

" इतनी रात गए कहा जा रहे हो आप?" एक पुलिसने उसकी तरफ आते आते दुरसेही पुछा.

जॉन कुछ नही बोला. दोनो उसके पास आकर रुके. उनमेंसे दुसरा जॉनकी तरफ गौरसे देखने लगा.

" जॉन सर आप!" दुसरा एकदम जॉनको पहचानते हूए बोला.

जॉन उसे पहचानता नही था. लेकिन शायद वह उसे पहचानता था. वैसेभी शहरमें चल रहे सिरीयल किलर केसकी वजहसे जॉनका अत्यधीक प्रचार हो चूका था. वह डीसमीस होनेसे पहले लगभग रोज उसका फोटो एकतो पेपरमें आता था या फिर टीव्हीपर दिखता था. .

" हां मै जॉन... निंद नही आ रही थी इसलिए ऐसेही एक चक्कर मार रहा था' जॉनने कहा.

" नो प्रॉब्लेम सर... यू कॅरी ऑन प्लीज" वह विनम्रतासे बोला.

जॉन गाडीमें बैठ गया. वे दोनो वही खडे होकर जॉनके गाडीकी शुरु होनेकी राह देखने लगे. जॉनने गाडी शुरु की और उनकी तरफ हाथ हिलाकर वह फिरसे तेजीसे वहांसे चला गया.

जॉनकी गाडी एका सुनसान ऐरीयामें एक मकानके सामने आकर रुकी. वह कमांड1का घर था. तिसरे कत्लके वक्त जब कमांड1का शव बिल्डींगके निचे पडा हूवा मिला था तब उन्होने इस घरपर रेड मारकर उसकी चप्पा चप्पा तलाशी ली थी. गाडी रास्तेके किनारे लगाकर वह गाडीसे उतर गया. पहले उसने इधर उधर नजर दौडाई. सब तरफ एक भयाण सन्नाटा छाया हूवा था. रातका वक्त और उपरसे शहरमें दंगे फसाद फैले हूए. वह चलते हूए बंगलेके कंपाऊंड गेटके पास गया. गेटको ताला लगा हूवा था और तालेपर पुलिस डिपार्टमेंटका सिल लगाया हूवा था. उसने एक चक्कर लगाकर बंगलेके कंपाऊड वॉलसे कहीसे घुसनेकी संभावना है क्या यह देखा. कंपाऊंड वॉलपर कांटोवाला तार लगा हूवा था. उसने देखा की गेटके दायी तरफ एक जगह उपरका तार टूटा हूवा है. जॉनको वहांसे अंदर घुसना संभव लग रहा था.

लेकिन अंदर जाए या ना जाए ?...

पहलेही उसे डिसमीस किया हूवा. और ऐसी स्थीतीमें पुलिसका सिल होते हूवे अगर मै छूपकर अंदर गया और उन्हे पता चला तो उन्हे अलगही शक होनेकी संभावना है...

होने दो... कुछ भी होने दो ...

अँजेनी जानेके पश्चात वैसेभी जॉन खुदके जानके बारेमें बेफिक्र हो गया था. उसका सोचना जारीही था जब जॉन कंपाऊंड वॉलके उपर चढने लगा. चढना थोडा मुश्कील जा रहा था. दिवार उंची थी और पकडनेके लिएभी कुछ नही था. जॉनने उछलकर दिवारके उपर टटोलकर देखा - पकडनेके लिए कुछ मिलता है क्या. दिवारपर कुछ पकडनेके लिए उसके हाथ आया. उसने उसे कसकर पकडते हूए वह दिवारपर चढ गया. लेकिन चढते हूए उसे उसके हाथमें बहुत जादा दर्द महसुस हूवा. चढनेके बाद जब उसने देखा तो उसने टूटी हूई कांटोवाली तार ही हाथमे पकडी हूई थी. उसने झटसे वह तार हाथसे छोडी, हाथकी तरफ देखा, तो हाथसे खुनकी धार निकल रही थी. वैसेही उस हाथको दुसरे हाथसे पकडकर उसने दिवारकी दुसरी तरफ, कंपाऊंडके अंदर छलांग लगाई.

क्रमश:...

1 comments:

अरुण said...

के भाया यहा भी,
चैन से सोना है तो जाग जाओ,वाली हालत मे डालोगे क्या..:)

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