....जॉनने बोर्डरूममे इकठ्ठा हूए सबको झीरोके खोजके इतिहासके बारेमें संक्षीप्तमें जानकारी दी.
" और इस झीरोमेंही कत्लका रहस्य छिपा हूवा है... भारतीय इतिहासमें जगह जगह झीरोका उल्लेख 'शून्य' इस नामसे मिलता है. "
जॉनने एक दीर्घ सांस ली और आगे बोलने लगा.
" पहला खून हूवा उसका नाम सानी मतलब वह 'एस' (S) इस अक्षरसे शुरु होता है. दुसरा खून हूवा उसका नाम हूयाना यानी की वह 'एच' (H) इस अक्षरसे शुरु होता है. तिसरा खून जिसका हूवा उसका नाम उटीना जो की 'यू' (U) इस अक्षरसे शुरु होता है. और अब हालहीमें जिसका खुन हूवा उसका नाम 'नियोल' जो की 'एन' (N) इस अक्षरसे सुरू होता है. मतलब 'एस् एच् यू एन वाय ए' (SHUNYA) 'शून्य' यानीकी अब जो खून होनेवाला है उसका नाम 'वाय' (Y) इस अक्षरसेही शुरु होगा इसमें कोई दोराय नही होनी चाहिए"
जॉनने किये त्रुटी रहित विश्लेषनसे सब लोग उसपर खुश लग रहे थे - बॉसभी.
" लेकिन इस शहरमें जिसका नाम 'वाय' (Y) इस अक्षरसे शुरु होनेवाले हजारो या लाखो लोग होंगे. तब क्या हम उन सब लोगोंको प्रोटेक्शन देंगे?" बॉसने आपनी अडचन चाहिर की.
" इतने लोगोंको संरक्षण देना तो लगभग नामुमकीन होगा !" सॅम ने कहा.
" नही... और एक बात मुझे इस सब मामलेमें मिली है ... जिसकी वजहसे हम लोगोंका टारगेट नॅरो डाऊन होनेवाला है " जॉनने कहा.
और एक आशाका किरन दिखेजैसे सब लोग जॉनकी तरफ उत्सुकतासे देखने लगे. फिर जॉन अपने कुर्सीसे उठ गया और सामने टंगे शहरके नक्षेके पास गया. वह अपने पासके कुछ कागजभी साथ ले गया. फिर अपने पासके कागजकी तरफ देखते हूए उसने सामने नक्षेपर लाल स्केच पेनसे एक क्रॉस किया.
" पहला खून हूए सानीका घर शहरमें लगभग यहांपर है. "
सब लोग जॉन क्या बताना चाहता है यह समझनेका प्रयास करने लगे.
जॉनने अपने पासके कागजसे देख देखकर सामने नक्शेपर और एक लाल क्रॉस किया.
" दुसरा खून हूए हूयानाका घर यहां कही है.. "
उसने और एक क्रॉस नक्शेपर मारते हूए कहा,
" तिसरा खून उटिनाका हूवा और उसका घर यहा पर है.. "
" और आखरी खून नियोलका हूवा और उसका घर"
जॉनने फिरसे एकबार अपने पासके कागजकी तरफ देखते हूए नक्शेपर एक क्रॉस करते हूए कहा, , "ये .. यहा है "
सबके चेहरेपर अभीभी संभ्रम था .
" लेकिन इससे क्या साबीत होनेवाल है .?" सॅमने प्रश्न उपस्थित किया .
" मतलब .....एक तो तुम्हे क्या कहना है यह तुम्हेही नही समझ आ रहा है ... या फिर हमारे सरके उपरसे जा रहा है.. " बॉसने कहा.
" जरा ध्यान देकर देखो .... सोचो ... तुम्हारे कुछ खयालमें आता है क्या ?"
जॉनने एकबार बोर्डरूममें बैठे सब लोगोंकी उपरसे नजरे घुमाई.
काफी समय चुप्पीमें गया. सब लोग उससे कुछ साबीत होता है क्या यह देखने लगे.
फिर जॉनने सामनेके नक्शेपर हरे डॉटस देते हूए सब लाल क्रॉसके उपरसे एक वक्र लकिर निकाली. वह वक्र लकिर जहांसे निकाली थी वहां फिरसे जोड दी. फिर उस डॉटसके उपरसे एक मोटी हरी लकीर निकाली. और क्या आश्चर्य उस नक्शेके उपर एक सर्कल दिखने लगा.
"यह देखो यह क्या निकला"
" सर्कल" एकने कहा. .
" सर्कल नही... यह शून्य है " जॉनने गूढ भावसे कहा.
सामने बैठे सभी लोगोंके चेहरेपर सबकुछ बोध होनेके आनंदयुक्त और उत्साहपूर्ण भाव आ गये थे.
" यस्स... यू आर जिनीयस जॉन!" सॅमके मुंहसे अनायास ही निकल गया.
बॉसने सॅमकी तरफ नाराजगीसे देखा.
" पहला क्रास यहां, दुसरा यहां , यहां तिसरा और यहां चौथा. "
जॉन नक्शेपर क्रॉसकी तरफ निर्देश करते हूए बोला.
" मतलब पांचवा क्रास यही कही होना चाहिए. "
जॉनने चक्रपर चौथे और पहले क्रॉसके बिचमें जो खाली जगह थी वहा एक पांचवा क्रॉस निकाला.
" इस पांचवे क्रॉसके एरियामेंही कातिल का अगला निशाना छूपा हूवा है और उसका नाम 'वाय'(Y) इस अक्षरसे शुरु होता है . यह दो जानकारीयोंमे बैठनेवाले लगभग तिन या चार मकान होंगे. और वह भी पॉसीब्ली दसवे मालेपर ... क्योंकी हर खुनके वक्त कातिलने दसवा मालाही चूना है "
" यस ....इन मकानोंपर अगर हम नजर रखते है तो कातिलको हम जरुर पकड पायेंगे.." सॅमने उत्साहसे भरे स्वरमें कहा.
इतनेमें एक पियून अंदर आकर बॉसके पास जाकर धीरेसे बोला,
" साहब , आपका अर्जंंट फोन है "
बॉस कुर्सीसे उठ गया.
" यू कॅरी ऑन. आय वील बी बॅक सून" बॉस जॉनको और बाकी लोगोंको बोलते हूए 'खाट खाट' जुतोंका आवाज करते हूए बोर्डरूमसे बाहर निकल गया.
क्रमश:...
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Tuesday, March 4, 2008
Ch-49C: मिटींग (शून्य-उपन्यास)
Posted by
Sunil Doiphode
at
10:08 AM
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