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Ch-63 : रेकॉर्ड डिटेल्स (शून्य-उपन्यास) Hindi

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सॅम और जॉन एक कॉम्प्यूटरके सामने बैठे थे. कॉम्प्यूटरपर एक सॉफ्टवेअर रन हो रहा था. उस साफ्टवेअरके सहाय्यतासे वे उनको मिले उंगलीयोंके निशान कॉम्पूटरपर गुनाहगारोंके डाटाबेसमें ढुंढ रहे थे. डाटाबेसमें गुनाहगारोंके लाखो करोडो उंगलियोंके निशान स्टोअर करके रखे होंगे. उस हर उंगलियोंके निशान के साथ उनके पासके उंगलियोंके निशान जोडकर देखना वैसे बडा कठीन काम था. लेकिन आजकल काम्प्यूटरकी वजहसे वह बहुत आसान हो गया था. कॉम्प्यूटर एक सेकंडमें कमसे कम हजारो उंगलियोंके निशान जोडकर देखता होगा. और वहभी बहुत बारीकीसे, एक भी छोटीसे छोटी महत्वपुर्ण जानकारी ना छोडते हूए. मतलब सब निशानोंको जोडकर देखनेके लिए कुछ ही मिनीटोंका अवधी लगने वाला था. वे दोनो बेसब्रीसे कॉम्प्यूटरके मॉनिटरकी तरफ देखने लगे. मॉनिटरपर कितने लोगोंके उंगलियोंके निशान जोडकर देखे यह बतानेवाला एक काऊंटर तेजीसे आगे बढ रहा था. वह काऊंटर शून्यसे शुरु होकर अबतक सात लाखके उपर पहूंच गया था. आखिर अचानक वह काऊंटर 757092 पर रुका .

मॉनिटरपर एक मेसेज झलकने लगा " मॅच फाऊंन्ड".

दोनोंके चेहरे खुशीसे खिल उठे. उन्होने एकदुसरेकी तरफ देखकर एक विजयी मुस्कुराहट बिखेरी और फिर मॉनिटरपर वह किसका रेकॉर्ड है यह देखने लगे.


॥।रेकॉर्ड डिटेल्स ॥।


नाम - विनय जोशी

उम्र - 30 साल

गुनाह - फोर्जरी

निशाणी - बायें हाथको छे उंगलिया.

नॅशनॅलिटी - अमेरिकन


दोनोभी गुनाहगारकी पुरी जानकारी पढने लगे. उसमें गुनाहगारके तीन फोटोभी थे. एक दाई तरफसे लिया हूवा , दुसरा बायी तरफसे लिया हूवा और तिसरा सामनेसे लिया हूवा.

" यह सब जानकारी हमे शहरके सब पुलिस थानोंपर जल्द से जल्द भेजना चाहिए." सॅमने कहा.

" हां सही है ... लेकिन मुझे एक डर है " जॉनने कहा.

सॅमने उसकी तरफ प्रश्नार्थक मुद्रामें देखा.

" की इसबारभी अगर यह जानकारी कातिलतक पहूंच गई तो ? " जॉनने अपनी चिंता जाहिर की.

" इसबार नही पहूंचेगी. उस डॅनको उसके कियेकी सजा मिल चूकी है." सॅमने कहा.

फिर उन्होने उस गुनाहगारकी फोटोके साथ सारी जानकारी शहरके सब पुलिस थानोंपर भेज दी. और वैसा कोई शख्स नजर आतेही ही उसपर वॉच रखकर तुरंत सॅमको सुचीत करनेके लिए बताया गया. क्योंकी वह सिर्फ एक धागा हो सकता है. वहतो उनके हाथका सिर्फ एक मोहरा हो सकता था. असली गुनाहगार कोई और ही हो सकता है. पुरी केसकी तहतक जाकर असली गुनाहगारतक पहूंचना सबसे महत्वपुर्ण था.

क्रमश:...

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Ch-62 : लता (शून्य-उपन्यास) Hindi

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बंगलेके बाई तरफ एक जगह एक फुलोंसे लदी हूई लता थी. फुलोकी खुशबुभी मन मोह लेनेवाली थी. वह लता बंगलेके दिवारका, खिडकीका और पाईपका सहारा लेते हूए उपर टेरेसतक पहूंच गई थी. उसने टॉर्चकी रोशनी डालते हूये उस लता को निचेसे उपरतक गौरसे देखा. वह फुलोंसे पुरीतरह लदी हूई थी. फिर उसने उसकी तरफ उपरसे निचे तक गौरसे देखा. लताके तले बहुत सारा कचरा पडा हूवा था. निचे पॉलीथीन बॅग्ज, कागजके मसले हूए टूकडे, इस तरह का बहुत सारा कचरा पडा हूवा था. जॉन घूटनोपर बैठकर उस कचरेमे कुछ मिलता है क्या यह देखने लगा. उसने अपने जेबसे एक बडीसी पॉलीथीन बॅग निकाली और उसमें वह वहा के कचरेसे जो भी महत्वपुर्ण लगा या महत्वपुर्ण होनेकी संभावना थी ऐसा कचरा उस बॅगमे ठूसने लगा. उस कचरेमें ढूंढनेके बाद उसने उस लता को पकडकर जोर जोरसे हिलाया. उसके शरीरपर फुलोंकी बरसात होने लगी. और कुछ गिरनेका 'धप.. धप' ऐसा आवाज आने लगा. उसने टॉर्च के रोशनीमें गौरसे देखा तो उस लताके टहनीयोंमे अटका हूवा और कुछ कचरा निचे गिर गया था. उसमेंकाभी कुछ छाटकर उसने अपने बॅगमें ठूंस दिया. उसे एक पॉलीथीनकी बॅग मिल गई. उसका मुंह गांठ मारकर बंधा हूवा था. उसने वह पॉलीथीन बॅग हिलाकर देखी. अंदरसे कुछ बजनेका आवाज आ रहा था. जो भी होगा बादमें देखेंगे...

ऐसा सोचकर उसने वह बॅगभी अपने बॅगमें डाल दी.

चलो अब बहुत हो गया...

अब मुझे चलना चाहिए...

जॉनने बॅग उठाई और कंपाऊंडकी तरफ वापस जानेके लिए निकल पडा.

जॉनको घर आते आते सुबहके चार बज चूके थे. वह पुरी तरहसे थक चूका था. पॉलीथीन बॅग निचे रखकर दुसरे जखमी हाथको संभालते हूऐ उसने क्वार्टरका दरवाजा खोला. उसे याद आगया की एकबार ऐसेही जब उसका अॅक्सीडेंट हुवा था तब अँजेनीने उसे संभालते हूए घर लाया था. और क्वार्टरका ताला उसनेही खोला था. उसकी याद आतेही उसका मन फिरसे खट्टू होगया.

दरवाजा खोलते खोलते उसे याद आया -

अरे व्हिस्कीकी बॉटल लाना तो मै भूलही गया....

मै बाहर निकलने का एक उद्देश व्हिस्कीकी बॉटल्स लाना यह था और वही मै भूल गया ...

दरवाजा खोलकर निचे रखे पॉलीथीनकी थैलीकी तरफ देखकर उसने सोचा -

चलो तो अपना दर्द भूलनेके लिए अपने पास और एक काम है...

इस कचरेमें कुछ महत्वपुर्ण मिलता है क्या यह ढूंढना...

पॉलीथीनकी थैली उठाकर वह घरके अंदर चला गया. अंदरसे दरवाजा बंद कर लिया और सोफेपर बैठकर वह उस थैलीसे एक एक मसला हूवा कागज बाहर निकालकर उसे ठिक कर उसमें कुछ मिलता है क्या यह देखने लगा. सब कागजके टूकडे टटोलकर खतम होगए लेकिन कुछ खास नही मिल रहा था. फिर वह वहांसे उठाकर लाई पॉलीथीन बॅग्ज खोलकर देखने लगा. कुछ बॅग्जमें बचे हूए, सडे हूए मुंगफलीके दाने थे. तो कुछ बॅग्जकी बहुतही गंदी बदबू आ रही थी. आखिर उसे एक गांठ मारी हूई पॉलीथीनकी थैली मिल गई. उसने उस थैलीकी गांठ बडी सावधानीसे खोली. अंदरसे बदबू आयेगी इस अनुमानसे मुंह बाजू हटाया. लेकिन अंदरसे कोई बदबू नही आयी. उसने थैलीमें झांककर देखा. अंदर कुछ कांचके टूकडे थे.

टूटे ग्लासके होंगे....

वह सोफेसे उठकर निचे मॅटपर घुटने टेंककर बैठ गया. उसने वे टूकडे बडी सावधानीसे थैलीसे बाहर मॅटपर उंडेल दिए. दो-तीन टूकडोंपर उसे खुनके दाग दिखाई दिए.

अरे वा यह तो कातिलका या उसके साथीका खुन दिख रहा है...

उसने खुनके दागवाला एक टूकडा हलकेसे अपने हाथमें लिया.

अब मुझे इस धागेसेही कातिलतक पहूचना है...

लेकिन क्या इस खुनसे मै कातिलके बारेमें कुछ जानकारी पा सकता हू ?

वह सारी संभावनाए टटोलकर देखने लगा. और फिर अचानक उसकी आंखे खुशीसे चमकने लगी. उस कांचके टूकडेपर उसे खुनसे सने हाथके और उंगलियोंके निशान दिखाई देने लगे.

" यस्स" वह खुशीसे चिल्लाया.

दुसरे खुनके दाग लगे टूकडेभी उसने सावधानीसे उठाकर गौरसे देख लिए. उसपरभी उंगलियोंके निशान दिख रहे थे. वैसेही वे कांचके टूकडे हाथमें लेकर वह फोनके पास चला गया. वे टूकडे बगलमें एक टेबलपर रखकर उसने एक नंबर डायल किया.

" सॅम... मै तुम्हारे उधर आ रहा हू... अभी ... एक बहुतही महत्वपुर्ण धागा मेरे हाथ लगा है..." वह अपनी खुशी छिपा नही पाकर उत्साहभरे स्वरमें फोनपर बोल रहा था.

क्रमश:...

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Ch-61 : कंपाऊंड के अंदर (शून्य-उपन्यास) Hindi

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दुसरे हाथसे खुनसे सना हाथ पकडते हूए जॉन उठकर खडा हो गया. खुन जादाही बह रहा था इसलिए उसने जेबसे रुमाल निकालकर उस हाथको कसकर बांध दिया. जखमी हाथको संभालते हूए वह बंगलेके दरवाजेके पास गया. वहाभी एक बडा ताला लगा हूवा था और उस तालेकोभी पुलिसका सील लगा हूवा था. उसने वही खडे होकर बंगलेके चारो ओर एक नजर दौडाई. बंगलेके अंदर जाना, कमसे कम यहांसे तो भी मुमकीन नही लग रहा था. पहले जब बंगलेकी तलाशी हूई थी तब वह बाकी लोगोंके साथही अंदर था. और उसे विश्वास था की उन्होने अंदरकी तलाशी ठिक तरहसे की थी. लेकिन उसे याद आया की बाहरके तलाशीको उतना महत्व ना देकर उसने वह जिम्मेदारी किसी एक नये पुलिसको सौंपी थी. उसने फैसला किया की पहले बंगलेके बाहरी हिस्सेकी जांच करना बेहतर होगा. वैसे कुछ मिलनेकी कोई संभावना नहीके बराबर थी. क्योंकी बिचमें बहुत दिन बित चूके थे और इसलिए बंगलेके अंदरके सबुतसे बाहरके सबुत नष्ट होनेकी जादा संभावना थी.

तोभी चान्स लेनेमें क्या हर्ज है...

शायद बंगलेके बाजुसे या पिछेसे अंदर जानेका कोई रास्ताभी मिल सकता है...

उसने जेबसे टॉर्च निकाला और टार्चका प्लॅश इधर उधर मारते हूए वह बंगलेके दाई तरफसे पिछेकी ओर जाने लगा. बिच बिचमें वह बंगलेपरभी फ्लॅश मारकर अंदर जानेके लिए कोई खिडकी है क्या वह देखने लगा. खिडकीयां थी लेकिन मजबुत जाली लगाई हूई.

तोभी किसी खिडकीकी जाली टूटी हूई हो सकती है, जैसे कंपाऊंडका तार एक जगह टूटा हूवा था...

बंगलेके चारो ओर काफी खुली जगह थी. और उस जगहमें गार्डनभी बनाया हूवा था. लेकिन उसे कभी काटा छाटा नही जा चूका था ऐसा लग रहा था. गार्डनमें घांस और झाडी अच्छी खासी कमरतक बढी हूई थी. जॉन अंधेरेमे टॉर्चके सहारे संभालकर उस घाससे और झाडीसे रास्ता बनाते हूए आगे बढ रह था. उस उंची बढी हूई झाडीके वजहसे कुछ सबुतभी होगा तो वह मिलना मुश्कीलही लग रहा था. लेकिन एक फायदाभी था की अगर कुछ सबुत हो तो वह नष्ट होनेका कालावधी उस झाडीके वजहसे बढनेकी संभावना थी. इधर उधर टार्चकी रोशनी डालते हूए वह बंगलेके पिछवाडे आकर पहूंच गया. पिछेतो दरवाजेकोभी जाली लगी हूई थी. इसलिए वहांसे अंदर जानेकी संभावनाभी खत्म हो गई थी. फिर उसने टार्चके रोशनेमे पिछवाडेका चप्पा चप्पा छान मारा. कुछ खास नही मिल रहा था. धीरे धीरे टॉर्चके रोशनीमें घासके और झाडीके तनेके पास ढूंढते हूए उसने बंगलेको एक पुरा चक्कर लगाया. खुले मैदानमेंभी कुछ नही मिल रहा था और एकभी खिडकीकी जाली टूटी हूई नही थी.

चलो मतलब कमसे कम अबतो अंदर जाना मुमकीन नही लग रहा है...

अंदर जानेके लिए मुझे फिरसे कभी सॅमकी मदद लेनी पडेगी...

और बाहरभी एक बार फिरसे दिनके उजेलेमेंही ढूंढना उचीत होगा...

ऐसा सोचकर वह कंपाऊंडके बाहर जानेके लिए मुडा. इतनेमें एक विचार उसके जहनमें कौध गया. वह एकदमसे रुक गया. मुडकर जल्दी जल्दी बंगलेके बाई तरफसे पिछेकी ओर जाने लगा.
क्रमश:...

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Ch-60 : देर रात गए (शून्य-उपन्यास) Hindi

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रातके ढाई बज चूके थे. रातके भयाण संन्नाटेमें जॉन अकेलाही गाडी तेजीसे चलाते हूए शहरमें घुम रह था. दंगोंकी वजहसे आजकल रास्ते जल्दीही खाली हो जाते थे. और अब तो रातके ढाई बजनेकी वजहसे इस वक्त रास्तेपर कोईभी नही दिख रहा था. अपनेही धुनमें एक चौकसे तेजीसे गुजरते हूए जॉनको पिछेसे सायरनका आवाज सुनाई दिया. उसने मिररमें देखा. एक पुलिसकी गाडी उसका पिछा कर रही थी.

गाडी रोकु या नही ?...

जॉनने एक क्षण के लिए सोचा और फिर गाडीका ब्रेक दबाया. उसने अपनी गाडी रस्तेके किनारे खडी की. पिछेसे पुलिसकी गाडी आकर उसके गाडीके आगे जाकर रुकी. पहले पुलिसने जॉनकी गाडीकी तरफ और फिर गाडीके अंदर झांककर देखा. अबतक जॉन उतरकर गाडीके बाहर आया था. दो पुलिस उतरकर उसके पास गए.

" इतनी रात गए कहा जा रहे हो आप?" एक पुलिसने उसकी तरफ आते आते दुरसेही पुछा.

जॉन कुछ नही बोला. दोनो उसके पास आकर रुके. उनमेंसे दुसरा जॉनकी तरफ गौरसे देखने लगा.

" जॉन सर आप!" दुसरा एकदम जॉनको पहचानते हूए बोला.

जॉन उसे पहचानता नही था. लेकिन शायद वह उसे पहचानता था. वैसेभी शहरमें चल रहे सिरीयल किलर केसकी वजहसे जॉनका अत्यधीक प्रचार हो चूका था. वह डीसमीस होनेसे पहले लगभग रोज उसका फोटो एकतो पेपरमें आता था या फिर टीव्हीपर दिखता था. .

" हां मै जॉन... निंद नही आ रही थी इसलिए ऐसेही एक चक्कर मार रहा था' जॉनने कहा.

" नो प्रॉब्लेम सर... यू कॅरी ऑन प्लीज" वह विनम्रतासे बोला.

जॉन गाडीमें बैठ गया. वे दोनो वही खडे होकर जॉनके गाडीकी शुरु होनेकी राह देखने लगे. जॉनने गाडी शुरु की और उनकी तरफ हाथ हिलाकर वह फिरसे तेजीसे वहांसे चला गया.

जॉनकी गाडी एका सुनसान ऐरीयामें एक मकानके सामने आकर रुकी. वह कमांड1का घर था. तिसरे कत्लके वक्त जब कमांड1का शव बिल्डींगके निचे पडा हूवा मिला था तब उन्होने इस घरपर रेड मारकर उसकी चप्पा चप्पा तलाशी ली थी. गाडी रास्तेके किनारे लगाकर वह गाडीसे उतर गया. पहले उसने इधर उधर नजर दौडाई. सब तरफ एक भयाण सन्नाटा छाया हूवा था. रातका वक्त और उपरसे शहरमें दंगे फसाद फैले हूए. वह चलते हूए बंगलेके कंपाऊंड गेटके पास गया. गेटको ताला लगा हूवा था और तालेपर पुलिस डिपार्टमेंटका सिल लगाया हूवा था. उसने एक चक्कर लगाकर बंगलेके कंपाऊड वॉलसे कहीसे घुसनेकी संभावना है क्या यह देखा. कंपाऊंड वॉलपर कांटोवाला तार लगा हूवा था. उसने देखा की गेटके दायी तरफ एक जगह उपरका तार टूटा हूवा है. जॉनको वहांसे अंदर घुसना संभव लग रहा था.

लेकिन अंदर जाए या ना जाए ?...

पहलेही उसे डिसमीस किया हूवा. और ऐसी स्थीतीमें पुलिसका सिल होते हूवे अगर मै छूपकर अंदर गया और उन्हे पता चला तो उन्हे अलगही शक होनेकी संभावना है...

होने दो... कुछ भी होने दो ...

अँजेनी जानेके पश्चात वैसेभी जॉन खुदके जानके बारेमें बेफिक्र हो गया था. उसका सोचना जारीही था जब जॉन कंपाऊंड वॉलके उपर चढने लगा. चढना थोडा मुश्कील जा रहा था. दिवार उंची थी और पकडनेके लिएभी कुछ नही था. जॉनने उछलकर दिवारके उपर टटोलकर देखा - पकडनेके लिए कुछ मिलता है क्या. दिवारपर कुछ पकडनेके लिए उसके हाथ आया. उसने उसे कसकर पकडते हूए वह दिवारपर चढ गया. लेकिन चढते हूए उसे उसके हाथमें बहुत जादा दर्द महसुस हूवा. चढनेके बाद जब उसने देखा तो उसने टूटी हूई कांटोवाली तार ही हाथमे पकडी हूई थी. उसने झटसे वह तार हाथसे छोडी, हाथकी तरफ देखा, तो हाथसे खुनकी धार निकल रही थी. वैसेही उस हाथको दुसरे हाथसे पकडकर उसने दिवारकी दुसरी तरफ, कंपाऊंडके अंदर छलांग लगाई.

क्रमश:...

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Ch-59B : आर्यभट्ट (शून्य-उपन्यास) Hindi

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...भारतीय गणित और खगोलविज्ञान की शुरुवात किसने की यह कहना जरा मुश्कील है फिरभी भारतीय वेदोमें गणित और खगोलविज्ञान की सब जानकारी उपलब्ध है. बहुत ऋषींयोंने पंचांगके नियम, नक्षत्र विभाजन, वैदिक कार्यके लिए आवश्यक तिथी और महुरत निर्धारित करना, ग्रहण, अमावस्या इत्यादि जानकारी देनेके लिए अलग अलग पध्दती विकसित की. वक्त के साथ पैतामह सिध्दांत, वासिष्ठ सिध्दांत, रोमक सिध्दांत, पौलिक सिध्दांत इत्यादि विकसित हुए. लेकिन वे धीरे धीरे पुराने हूए और उनसे एकदम सही परिणाम नही आते थे. इसलिए उस वक्त लोगोंका उसपरसे भरोसा उड रहा था. लेकिन फिर आर्यभट नामके एक विद्वानने गणित और खगोलशास्त्रसे सबंधीत ज्ञानमेंकी त्रुटी दूर कर उस ज्ञानको नये सिरेसे प्रस्तुत किया.

भारतके इतिहासमें जिसे 'गुप्तकाल' या 'सुवर्णयुग'के नामसे जानते है, उस वक्त भारतने साहित्य, कला और विज्ञान इन क्षेत्रोंमे अभूतपूर्व प्रगती की. विज्ञानके क्षेत्रमें गणित, रसायनशास्त्र और जोतिष्यशास्त्र इन विषयोंमे विशेष प्रगती की. उस वक्त आर्यभट नामके एक प्रसिध्द गणितज्ञ और जोतिष्यकार थे. वे अभीके बिहारराज्यकी राजधानी पटना (उस वक्तका पाटलीपुत्र) के पास कुसुमपुर इस गावके निवासी थे. उनका जन्म 13 एप्रिल सन् 476 को और मृत्यू सन् 520 को हूवा था. उस वक्त बौध्द धर्म और जैन धर्म बहुत प्रचलित था. लेकिन वे सनातन धर्मके अनुयायी थे. उन्होने गणित और जोतिष्य इन विषयोंमे बहुत महत्वपूर्ण और वक्तके हिसाबसे विस्मयकारी संशोधन किया था. उन्होने अपना संशोधन ग्रंथरूपमें शब्दबध्द कर अगली पिढीयोंको वह उपलब्ध हो इसकी व्यवस्था कर रखी थी. उस वक्त मगध स्थित नालंदा विश्वविद्याल ज्ञानदानका प्रमुख और प्रसिध्द केंद्र था. वहा देश विदेशसे विद्यार्थी ज्ञानार्जन करनेकेलिए आते थे. वहा खगोलशास्त्रके अध्ययनके लिए एक विशेष विभाग था. एक प्राचीन श्लोकके अनुसार आर्यभट नालंदा विश्वविद्यालयके कभी कुलपतीभी थे.

आर्यभटने लिखे तीन ग्रंथोंकी जानकारी सद्य:स्थितीमें उपलब्ध है. दशगीतिका, आर्यभट्टीय और तंत्र. लेकिन जाणकारोंके हिसाबसे उन्होने और एक ग्रंथ लिखा था. 'आर्यभट्ट सिध्दांत' लेकिन उसके सिर्फ 34 श्लोकही अब उपलब्ध है. उनके इस ग्रंथका सातवे शतकमें जादा उपयोग होता था. लेकिन यह ग्रंथ बाकी ग्रंथोंकी तरह उपयोगमें होते हूए भी उसका ऐसा लोप क्यो हूवा होगा ? यह एक अनाकलनीय पहेली है.

आर्यभट पहले आचार्य थे की जिन्होने ज्योतिषशास्त्रमें अंकगणित, बीजगणित और रेखागणितको शामील किया. 'आर्यभट्टीय' ग्रंथमें उन्होने ज्योतिष्यशास्त्रके मूलभूत सिध्दांतके बारेमें लिखा. इस ग्रंथमें 121 श्लोक है जो उन्होने चार खंडोमें विभाजीत कीये है.

गीतपादीका नामके पहले खंडमें ग्रहका परिभ्रमण काल, राशी , अवकाशमें ग्रहोंकी कक्षा इस विषयपर जानकारी दी है.

गीतपाद नामके दुसरे खंडमें उन्होने गणितके

वर्गमूल, घनमूल, त्रिकोणका क्षेत्रफल, ज्या (sine) इत्यादींका

विश्लेषन किया है.

उन्होने वृतका व्यास और परिधी इनमेंका संबंध जिसे हम

पाई(Pi) कहते है, उन्होने वह 3.1416 इतना, मतलब लगभग सही आंका था.

इस ग्रंथमें उन्होने बीजगणितके

(अ+ब)2 = (अ2+2अब+ब2)

का भी विस्तृत विष्लेशण किया है.

इस ग्रंथके 'कालक्रिया' इस तिसरे खंडमें

कालके अलग अलग भाग, ग्रहोंका परिभ्रमण , संवत्सर, अधिक मास, क्षय तिथी, वार ,सप्ताह

इनकी गणना इस बारेंमे विवेचन दिया है.

इसी ग्रंथमें एक जगह उन्होने संक्षिप्त स्वरूपमें संख्या लिखनेकी पध्दतीके बारेंमे लिखा है.

तिसरा खंड 'गोलपाद' नामसे प्रचलित है और उसमें खगोल विज्ञानके बारेमे जानकारी है.

सूर्य, चंद्र, राहू ,केतू और बाकी ग्रहोंकी स्थीती , दिन और रातका कारण, राशींका उदय, ग्रहणका कारण इत्यादि विश्लेशन इस खंडमें मिलता है.

आजके वक्तके बडे बडे वैज्ञानिक अबभी आश्चर्य चकीत रह जाते है की उस वक्त आर्यभटने पाई (Pi), वृत्तका क्षेत्रफळ , ज्या (sine) इत्यादिं बातोंका विश्लेषन कैसे किया होगा.

आर्यभट एक युगप्रवर्तक थे. उन्होने अपने वक्तके प्रचलित अंधश्रध्दांओंको झुटा ठहराया. उन्होने सारी दुनियाको बताया की पृथ्वी चंद्र और अन्य ग्रहोंको खुदका प्रकाश नही होता और वे सुरजकी वजहसे प्रकाशित होते है. पृथ्वीके जिस भागपर सूर्यप्रकाश पडता है वहां दिन और जहा सूर्यप्रकाश नही पडता वहा रात ऐसाभी उन्होने बताया था. पृथ्वीपर अलग अलग शहरोंमे सुर्योदय और सुर्यास्त का वक्त इसमें फर्क क्यो होता है इसके कारणोंका विश्लेषनभी उन्होने विस्तृततरहसे किया है. उन्होने यहभी जाहिर किया की पृथ्वी गोल है और वह खुदके आसके सभोवताल घुमती है. उन्होने इस मान्यताको तोडा की पृथ्वी ही ब्रह्मांडका केंद्र है और सुरज और बाकी ग्रह उसके सभोवताल घुमते है. उन्होने पृथ्वीका आकार, गती, और परिधीका अंदाज भी लगाया था. और सूर्यग्रहण और चंद्रग्रहणके बारेमेंभी संशोधन किया था.

उन्होने त्रेतालीस लाख बीस हजार वर्षका एक महायुग बताया और एक महायुगको चार हिस्सोमे

सत्ययुग, त्रेतायुग, द्वापारयुग और कलियुग इस तरह विभागीत किया. इन चारो युगोंका काल उन्होने दस लाख अस्सी हजार साल इतना आंका है.

भविष्यमें चंद्र और सूर्य ग्रहण कब कब होगे यह निकालनेके लिए उन्होने एक सूत्रका विकास किया और उस सुत्रके हिसाबसे उनकी भविष्यवाणी कभीभी गलत नही निकली.

ज्योतिष्यके अलावा गणितशास्त्रमेंभी आर्यभटने नये नये सिंध्दांतोका अविश्कार किया. भारतमें सबसे पहले उन्होने बिजगणितके ज्ञानका विस्तारसे प्रचार किया. शून्य सिध्दांत और दशमलव संख्याप्रणालीका आविश्कार भारतमें सबसे पहले किसने किया यह बताना जरा मुश्कील है फिरभी आर्यभटने उसका प्रयोग अपने ग्रंथमें कुशलतासे किया हूवा मिलता है. उनकी कामयाबी भारतमेंही नही तो बाहर विदेशमेंभी फैली थी. अरब विद्वानोंको उनके जोतिष्य ज्ञानका बहुत अभिमान था और वे उन्हे 'अरजभट' नामसे पहचानते थे.

तो इस तरह आर्यभट जिन्होने बीजगणितका विकास किया था और ज्योतिष गणितमें अंकगणित, बीजगणित और रेखागणितको शामील किया, उनको भारतीय गणितमें और जोतिष्यशास्त्रमें अगर मिल का पत्थर कहा जाए तो गलत नही होगा. उस वक्त लगभग सब ग्रंथ श्लोकके रुपमें रहते थे और उनको खासकर मुखद्गद कर एक पिढीसे दुसरी पिढीके पास सौंपा जाता था. उनका 'आर्यभट्ट सिंध्दांत' यह ग्रंथ सातवे शतकमें व्यापक रुपसे उपयोगमें लाया जाकरभी वह आगे लोप हूवा यह बात उस ग्रंथमें लिखे ज्ञानके बारेमें एक गूढ जिज्ञासा जागृत करती है. उनका अचूक निकष रहे गणित इस विषयसे और उन्होने जो ज्ञान उनके ग्रंथमें दिया वह एकदम सही रहता था इसकी तरफ गौर करते हूए उनका जो ग्रंथ लोप हुवा जिसमें जोतिष्य ज्ञानके बारेमें ऐसा कुछ लिखा होगा की जो गुप्त रखनेका किसीकोभी मोह हुवा होगा. ऐसाभी हो सकता है की वह ज्ञान गलत हातोंमे पडनेसे विघातक हो सकता था...


वैसे तो कमांड2ने यह रिसर्च पेपर पहलेभी पढा था. फिरभी कमांड2का दिल उत्साहीत हूवा था. बॉसकी शुन्यके बारेंमे, वेदकालीन गणित और जोतिष्याशास्त्रके बारेमें रुची देखते हूए और उनका एकदम सही वक्त बतानेका कौशल्य देखते हूए उसको अब विश्वास हो चला था की बॉसको 'आर्यभट्ट सिंध्दांत' यह ग्रंथ मिला होगा. कमांड2का अब लगभग आधा काम हुवा था, लेकिन आधा, जो की सबसे महत्वपूर्ण था, वह बचा था. उसको सबसे पहले बॉसचा पत्ता लगना बहुत जरुरी लग रहा था. पहले एक बार जब बॉसका फोन आया था तब उसका नंबर उसके फोनपर नही आया था. बॉसने यह करामात कैसी की थी इसका उसे कुछ पता नही लग अहा था. लेकीन फिरभी उसने बॉसको ढुंढनेका मानो बिडाही उठाया था. उसने टेलीफोन कंपनीमें जाकर बॉसको ट्रेस करनेका प्रयत्न किया था. टेलिफोन कंपनीवाले उसे कुछ खास मदत नही कर पाए थे. लेकिन टेलिफोन कंपनीको एक नयाही अविष्कार हुवा था. उनकी फ्रिक्वेन्सी कोई चोरी कर रहा था इसका. इसके अलावा एक मोटे तौरपर फोन किस इलाकेसे आया था इतनाही वे बता पाए थे. जो इलाका उन्होने बताया था वह काफी बडा था. और ना बॉसका नाम ना चेहरा मालूम होनेसे कमांड2को उसे ढुंढना बडा मुश्कील हो गया था. फिरभी लगभग रोज कमांड2 उस इलाकेमे किसी पागल की तरह घुमता था. और जब घुम घुमकर थक जाता था तबही घरकी ओर रुख करता था. लेकिन बॉसका पत्ता मिलनेके कोई आसार नही नजर आ रहे थे. शायद इतनी बार वह किसी पागल की तरह उस इलाकेमें घुमा, ना जाने कभी बॉस उसके सामनेसेभी गया होगा. लेकिन वह उसे कैसे पहचाननेवाला था. ?

क्रमश:..

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कमांड2 निश्चिंत होकर कुर्सीपर रिलॅक्स होकर बैठा था. उसके सामने टीव्ही शुरु था. लेकिन उसका टीव्हीके तरफ ध्यान कहा था.? वह तो अपनेही धुनमें था. अबतक बॉसने बताए हूए सब काम उसने इमाने इतबारे पुरे किए थे. और उसकी वजहसे बॉसभी उसपर खुश लग रहा था. सबसे महत्वपुर्ण बात यह थी की कमांड1के कत्लका शक बॉसको उसपर नही आया था. वह बिचबिचमें टिव्हीके चॅनल्स बदलकर खबरें देख रहा था. आगजनी, दंगा फसाद, लाठीमार, यह सब खबरें देखते हूए उसे बडा मजा आ रहा था. उसके चेहरेपर एक शैतानी मुस्कुराहट फैली हूई थी. वह अपनी मस्ती दिमागसे झटककर कुर्सीपर सिधा होकर बैठ गया..

मुझे ऐसे सुस्ताकर नही चलेगा...

मुझे अब आगेकी कार्यवाहीके पिछे लगना चाहिए...

वह कुर्सीसे उठ खडा हो गया. उसने वही दोचार चक्कर लगाए और फिर कुछ ठोस निर्णय लेकर वह कमरेमें कोनेमें रखे आलमारीके पास चला गया. आलमारी खोलकर उसने आलमारीका सबसे निचेवाला ड्रॉवर खोला. ड्रॉवर का बक्सा पुरी तरह बाहर निकालकर अपने पैरके पास निचे रख दिया. ड्रॉवर निकालनेके बाद जो खाली जगह बनी थी वहांसे उसने और एक छूपा कप्पा खोला. उस कप्पेसे कुछ ढूंढकर उसने वह चिज अपने पॅन्टके दाए जेब मे रख दी. फिर उसने वह छुपा कप्पा ठिक तरहसे बंद किया, पैरके पास रखा ड्रॉवर उठाकर उसने उसके पहले जगह पर ठिक तरहसे रख दिया और आलमारी बंद कर वह कॉम्प्यूटरके पास जाकर खडा हो गया. कॉम्प्यूटर शुरु किया और कॉम्प्यूटर बूट होनेकी राह देखते हूए कमरेमे फिरसे चहलकदमी करने लगा.

अगली कार्यवाही करनेके पहले मुझे अब ठिक तरहसे तैयारी कर लेनी चाहिए...

अपना लक्ष अभीभी अधूरा है...

जिस लक्षके लिए मैने कमांड1का कत्ल करनेकी रिस्क ली, वह अभीभी पहूचसे बहुत दूर है...

उसने अपने दाए पॅन्टके जेबसे अभी अभी आलमारीसे रखा हूवा पेन ड्राइव्ह निकाला. पेनड्राईव्हकी तरफ देखते हूए वह सोचने लगा.

मुझे अब एकबार बॉसके बारेमे जो मटेरीयल कमांड1के कॉम्प्यूटरपर मिला था उसको एकबार ठिक तरहसे फिरसे पढ लेना चाहिए..

अचानक कमांड2 चहलकदमी करते हूए रुक गया. उसने कॉम्प्यूटरके मॉनिटरकी तरफ देखा. कॉम्प्यूटर बूट हो गया था. कॉम्प्यूटरके पास जाकर प्रथम उसने पेन ड्राईव्ह कॉम्प्यूटरको लगाया. कुर्सी खिंचकर कॉम्प्यूटरके सामने बैठते हूए वह किसी जादूगरकी तरह कॉम्प्यूटरको कीबोर्ड और माऊसके द्वारा अलग अलग कमांड देने लगा. उसने पहले एक बार कमांड1के मेलबॉक्ससे जो महत्वपुर्ण फाईल अपने पेन ड्राईव्हके उपर कॉपी कर रखी थी, खोली. वह एक रिसर्च पेपर था. पेपरका टायटल था.

"आर्यभट्ट्का साहित्य".

उसका अंदाजा था की इस पेपरमें दिए जानकारीके आधारपर उसे भविष्यमें ऐसी कुछ बाते मिलने वाली थी की जिसकी वजहसे उसका फायदा ही फायदा होने वाला था. कमांड1के होठोंपर एक मुस्कुराहट तैरने लगी. शायद उसे भविष्यमें जो फायदा होने वाला था उसके कल्पना मात्रसे वह गदगद हो गया था. वह पेपरमें दिए महत्वपुर्ण मुद्दे पढने लगा...

क्रमश:...

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Ch-58 : यादें (शून्य-उपन्यास) Hindi

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रातका 1 बजा था. आज कमसे कम तिनचार दिन हूए होंगे जॉनने अपने आपको घरमें बंद करके रखा था. वक्त का, दिनका, रातका उसे कुछभी होश नही था. आजभी उसे होश आया था वह उसके पासके व्हिस्कीका स्टॉक खतम होनेके वजहसे. जैसेही उसे होश आया वैसे उसके सब दर्द जाग उठे थे. उसे अँजनीके साथ गुजारा हूवा एक एक पल याद आने लगा.

उसे कृत्रिम सांस देकर मानो उसके सांसोसे जुडा उसका रिश्ता.....

उसे मिलनेके लिये हमेशा बेचैन रहता उसका मन...

कितनाभी खुदको रोकनेकी कोशीश करनेके बावजुद उसकी घरकी तरफ मुडते उसके कदम..

उसके साथ उसकी पहली डेट...

उसका उसके साथ उत्स्फुर्त, पवित्र प्रथम प्रणय...

उसके सासोंकी गरमाहट...

उसपर होती उसके प्यारकी बारीश...

उसके साथ बिताए वे छुटी के दिन...

उसकी वे नटखट अदाए ...

रातोरात एंगेजमेंट रिंग लाकर उसे प्रपोज किया वह पल ...

उसका वह किसी लता की तरह लिपटकर किया हूवा इकरार ...

उसे निराशाके जंजालसे बाहर निकालकर दिया हूवा उसका प्रोत्साहन..

और ...

और उसका वह क्रुर कत्ल...

उसके आखोंमे आंसू तैरने लगे. आंसू बहकर उसके गालपर आगए. उसे अपने आपकीही चिढ आने लगी.

जब कत्ल का रहस्य खुल गया था तबही उसके क्यों खयालमें नही आया की पांचवे खुनके बाद छटवा खुन उसकी अपनी अँजीकाही होनेवाला है.....

यह इतनीसी बात उसके खयालमें क्यों नही आयी?..

लेकिन पांचवा कत्ल रोकने के चक्करमें वह कत्लके तफ्तीशमेंही इतना व्यस्त हो गया था की उसे छटवे खुन का खयालभी नही आया...

उसने अपने कलाईसे दोनो आंखोके आंसू पोंछ लिए. उसे अभीभी विश्वास नही हो रहा था की वह ऐसी उसे अकेला छोडकर चली गई है. उसने घरमें चारो ओर एक नजर दौडाई.

घरमें कैसा सब कुछ डरावना लग रहा था... ...

घर डरावना हो गया था या उसकी सोच वैसी हूई थी?...

उसने सामने दरवाजे की तरफ देखा. पेपरवालेने दरवाजेके निचेसे खिसकाए हूए तीन चार न्यूज पेपर जैसेकी वैसे पडे हूए थे. उसे ऐसा लग रहा था मानो वे न्यूजपेपरभी दरवाजेके निचेसे उसकी तरफ देखते हूए उसे चिढा रहे हो. वह उठ गया और दरवाजेके पास चला गया. एक पलके लिए उसे ऐसा लगा की दरवाजा खोले और बाहर थोडी देर खुली हवामे जाए.

लेकिन नही अब यह एकांतही अच्छा लगने लगा था..

उसने दरवाजेके निचे पडे हूए पेपर अंदर खिंच लिए. वही खडे होकर उसने दो चार पन्ने पलटे. सब तरफ दंगा फसाद, आग, लाठीमार, टीअर गॅस इसकीही खबरें थी. इतनाही नही अब भारतमेंभी इसकी प्रतिक्रियाएं शुरु हो गई थी. काफी जगह भारतमेंभी दंगे फसाद भडक उठे थे.

मतलब अबभी मामला ठंडा नही हूवा था..

अमेरिकन लोगोने तो मानो भारतिय लोगोंको ही नही तो जो लोग दुसरे किसीभी देशके थे उनको वहांसे भगानेका सिलसिलाही शुरु किया था. और भारतमें भारतीय लोगोंने मल्टीनॅशनल कंपनीयोंको वहांसे भगानेके लिए आंदोलन शुरु किया था. उससे वह पढा नही जा रहा था. उसने वह न्यूज पेपर्स कोनेमें एक जगह डाल दिये और जहांसे उठके आया था वहा फिरसे जाकर बैठ गया. सामने टी पॉयके उपर बहुत सारी व्हिस्कीकी बॉटलें जमा हूई थी और उसके बगलमें एक खाली पडा हूवा ग्लास आराम कर रहा था. जॉनने सामने टी पॉयपर पडा रिमोट लिया और टी. व्ही. शुरु किया. एक एक चॅनल वह आगे जाने लगा. किसीभी चॅनलपर रुकनेकी उसको इच्छा नही हो रही थी. सब तरफ वही खबरें - दंगा फसाद, आगजनी, लाठीमार टीअर गॅस. उसे सब असह्य होकर उसने रिमोटका बटने चिढकर जोरसे दबाते हूए टीव्ही बंद किया और रिमोट बगलमें सोफेके गद्देपर फेंक दिया.

उसे अब अंदरसे लगने लगा की उसे अब इस हतोत्साहसे उभरना पडेगा...

लेकिन कैसे ?...

यही तो उसके समझमें नही आ रहा था.

अगर मैने अपने आपको किसी काममे व्यस्त कर लिया तो? ...

हां यह इससे उभरने एक अच्छा रास्ता है ...

लेकिन डिपार्टमेंटनेभी तो मुंह मोड लिया हूवा है. अभीभी उसे कामपर जानेकी इजाजत नही थी...

और वह यह सब मामला ठंडा हूए बैगर मिलनेकी कोई गुंजाईशभी नही थी...

वह उठ खडा हूवा और हॉलमें चहलकदमी करने लगा.

अबभी अगर मै कातिल को पकड पाया तो?...

कमसे कम यह बाहर बिगडा हूवा सब मौहोल ठिक होनेमे मदत होगी. लेकिन कातिल एक ना होकर वह एक संघटनाही होनेकी जादा संभावना है . संघटना हुई तो क्या हुवा?...

उस संघटनाका एकभी मेंबर अगर मेरे हाथ आया तो एक महत्वपुर्ण धागा हाथ आए जैसा होगा..

नही, कुछ तो करना चाहिए..

वह खिडकीके पास खडा होकर बाहर अंधेरेमे देखने लगा - शुन्यमें. उसकी मुठ्ठी कसने लगी.

अँजेनीकी आत्म्याको शांती मिले इसके लिए मुझे कुछ तो करना चाहिए...

लेकिन शुरुवात कहांसे करु ?..

जंगलमें एक पेढको अगर आग लगी तो वह बुझाना आसान है लेकिन यहा तो सारें जंगलमें आग लगकर फैल गई थी ...

फिर उसने फिरसे चहलकदमी करते हूए केस नए सिरेसे, शुरुसे याद करना शूरु किया.

हो सकता है कोई धागा छुट गया हो?...

पहला खून ...

दुसरा खून ....

तिसरा खून ....

एकदम उसके दिमागमे आया की -

तिसरे खुनके वक्त जो शव बिल्डींगके निचे मिला था, उसका जरुर कत्लसे कोई गहन सबंध रहा होगा...

फिर हम लोगोंने जो शव मिला था उसके मकानपर रेड डाली थी... वहां एकभी फिंगरप्रिन्ट ना हो!... ऐसा कैसे होगा...

वहाके कॉम्प्यूटरकी हार्ड डिस्कभी गायब हुई थी ...

इसका मतलब उसका उस कत्लसे जरुर कोई गहरा संबंध था...

वह बंगला अभीभी पुलीसके कब्जेमें था. उस बंगलेपर किसीनेभी अपना हक नही जताया था.

वही कहीं मुझे कोई मिसींग लिंक मिल सकती है...

जॉनको एकदम उत्साह लगने लगा था. करनेके लिए कुछतो उसे मिला था.

उस बंगलेकी फिरसे अगर ठिक तरहसे छानबीन की तो?...

लेकिन चाबीयां तो पुलिसके पास ही है ...

चलो अब पहले यहांसे बाहर निकलना जरुरी है ...

वहां जानेके बाद देखेंगे आगे क्या करना है ...

उसने अपने सारे निराशायुक्त विचार झटक दिए और एक मजबूत निश्चयके साथ वह घरके बाहर निकल गया.

क्रमश:...

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Ch-57: जैसे को तैसा (शून्य-उपन्यास) Hindi

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रातका समय था. डॅनने अपने घरका दरवाजा धकेलकर थोडासा खोला और बाहर झांककर देखा. चारो तरफ अंधेरा था. वह धीरेसे घरसे बाहर निकल गया. बाहर आनेके बाद उसने चारो तरफ अपनी नजरे घुमाकर उसे कोई देखतो नही रहा इसकी तसल्ली की. कोई देख नही रहा है इस बातकी तसल्ली होतेही वह कंपाऊंडके बाहर आ गया. फिरसे रस्तेपर उसने चारो ओर अपनी नजरे दौडाई. रास्ता एकदम खाली खाली था. अब वह दाई तरफ मुडकर चलने लगा - अंधेरेमे तेजीसे कदम बढाते हूए. उसके चलनेके गतीके साथही उसके सोचनेभी गती पकड ली. पिछले बार कातिलने हमें भरपूर बक्षिसी देकर खुश कर दिया था. इस बारभी जॉन, सॅम और बॉसको अगला खुन किसका होगा इसकी जानकारी मिलने की बात उसने कातिल को फौरन बताई थी. कातिल उसपर बहूत खुश हो गया था. फिदाही हूवा था.

कातिलने उसे एक जगह बताकर वहा वह सोच भी नही सकता उतना पैसा रखनेका वादा किया था. अब वह वहांही पैसे लेनेके लिए जा रहा था. पैसेका खयाल आतेही उसके दिलमें गुदगुदी होने लगी. पिछले बार मिले पैसेसे दस गुना पैसे उसको अपने आखोंके सामने दिखने लगे. खुशीसे वह झुम उठा. उसके चलनेकी गती धीमी होगई और चालमें एक मस्ती झलकने लगी थी.

होगया अब यह आखरी...

इसके बाद ऐसी बेईमानी नही करुंगा...

इतना पैसा मिलनेके बाद मुझे ऐसी बेइमानी करनेकी फिरसे नौबतही नही आयेगी...

पैसा मिलनेके बाद नौकरी एकदम नही छोडूंगा.. नहीतो किसीको शक हो सकता है...

नौकरीमें कुछ देरतक टाईमपास करेंगे और फिर सही वक्त आतेही नौकरी छोडकर कुछ बिझीनेस करेंगे....

नहीतो पहले बिझीनेस डालूंगा और वह अच्छा खासा चलनेके बाद नौकरी छोड दूंगा....

डॅन सोच रहा था. अचानक असे अहसास हूवा की जिस जगह कातिलने पैसे रखनेका कबुला था वह जगह नजदीक आ चूकी है. वह एक पल रुका. फिरसे एकबार चारो ओर देखकर जिस जगह पर पैसे रखे थे उधर निकल गया. उसके चेहरेपर एक मुस्कुराहट झलक रही थी. स्थान एकदम निर्जन था. चारो ओर अंधेरा छाया हूवा था. बिच बिचमें कुतोंका अजीब आवाज आ रहा था. वह जगह किसीकोभी डर लगेगा ऐसीही थी. लेकिन आज डॅनके डर पर उसका लालच पुरी तरहसे हावी हो चूका था.

सामने एक बडा पेढ था. यही वह पेढ था जिसके निचे कातिलने पैसे रखे थे...

अब मानो डॅनके शरीरमें खुशीकी लहरे दौड रही थी. अब कुछही और पल! कुछ पलमेंही अब मै एक बडे संपतीका मालिक बनने वाला हूं. वह अधीरतापुर्वक पेढके निचे चला गया. वहा एक बडा पत्थर रखा हूवा था. डॅनने एक पलकाभी विलंब ना लगाते हूए वह पत्थर वहासे हटाया. जैसेही उसने वह पत्थर वहा से हटाया एक बडा धमाका हुवा और उसके हाथके टूकडे टूकडे हो गए. उसके बदनमेंभी नुकीले पत्थरके टूकडे गए थे. और खुनसे लथपथ अवस्थामें उसकी जान चली गई. उसे अहसास हो गया था की उसने जैसे ठान लिया था वैसेही यह उसकी आखरी बेइमानी साबित हूई थी.

क्रमश:...

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Ch-56: आखरी शिकार (शून्य-उपन्यास)

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जॉनने धडकते दिलसे फ्लॅटका दरवाजा धकेला. दरवाजा खुलाही था. अंदरका नजारा देखकर जॉनको एक पलके लिए तो ऐसा लगा की उसका दिल धडकना बंद हो जाएगा देगा. उसके सामने हॉलमे उसकी प्रीया अँजेनी खुनसे लथपथ पडी हूई थी. और सामने दिवारपर एक बडा शुन्य निकाला हूवा था. जॉन उसके पास गया. उसको एहसास हूवा की उसके पैर क्षीण होने लगे है मानो पैरोंकी सारी शक्ती निकाल ली हो. इतनी की वह निराशासे निचेही बैठ गया. खुदको संभालकर उसने अँजेनीकी नब्ज टटोली और वह उसकी हथेलीमे अपना चेहरा छुपाकर अनियंत्रीत होकर रोने लगा.

अँजेनीके प्राण कबके जा चूके थे...

सॅमको क्या करे कुछ सुझ नही रहा था. उसने सांत्वनाभरा एक हाथ जॉनके कंधेपर रखा. उसके हाथको जॉनके सिसकीयोंके धक्के किसी भूकंपके धक्के जैसे भयानक प्रतित हो रहे थे. सॅम जॉनके पास घूटने टेककर बैठ गया.

कातिल अपना आखरी शिकार करनेमेभी कामयाब रहा था.

सॅम " शून्य जहासे शुरु होता है वही खतम होता है " इस बातका मतलब समझ गया था.

और 'शून्य' का आखरी अंग्रेजी अक्षर 'ए' का महत्व भी उसे समझ गया था.

अँजेनी - अँजेनीका नामभी 'ए' इस अक्षरसेही शुरु होता था...

जॉनको अपने कर्तव्यका एहसास होगया.

कातिल इतनेमेंही कत्ल कर भाग गया होगा ...

यानीकी वह यही कही आसपासही होना चाहिए...

कुछतो करना चाहिए...

लेकिन जॉनके हाथपैर साथ नही दे रहे थे. उसमें उठनेकी शक्तीही नही बची थी.

" खुनी अभी जादा दूर नही गया होगा ' जॉनने किसी तरह सॅमसे कहा.

सॅम खुदको संभालकर झटसे उठ खडा हूवा और आगेकी कार्यवाहीके लिए तैयार हो गया.

क्रमश:...

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Ch-55: दिवारपर लिखा आखरी मेसेज (शून्य-उपन्यास)

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सायरन बजाती हूए पुलिसकी गाडी एका अपार्टमेंटके सामने रास्तेके किनारे आकर रुकी. गाडीसे जल्दी जल्दी जॉन और सॅम उतर गए. अभीतक प्रेस वहां नही पहूंची थी. उतनाही जॉनको अच्छा लगा. उतरने के बाद लगभग दौडतेही वे लिफ्टतक पहूंचे. दोनो लिफ्ट एंंगेज देखकर जॉनने लिफ्टका बटन दो-तीन बार दबाकर गुस्सेसे लिफ्टके दरवाजे को लात मारी. इस बारभी खून दसवे मालेपरही हूवा था. एक पलके लिए जॉनने सिढीयोंसे उपर जानेका सोचा. लेकिन दसवे मालेपर सिढीयोंसे जानेसे थोडी देर रुकना कभीभी समझदारी थी. बार बार अपने बाए हाथपर दाहिने हाथकी मुठ्ठी जोरसे मारते हूए जॉन लिफ्टकी राह देखने लगा. सॅमभी बेचैन होकर चहलकदमी करने लगा. कभी वह एक लिफ्टके सामने खडा रहता तो कभी दुसरे लिफ्टके सामने खडा होकर यूही उसका बटन दबाता. इतनेमे बाए तरफकी पहली लिफ्ट खुली. दोनोभी जल्दी जल्दी अंदर घुस गए. अंदर जातेही सॅमने 10 नंबरका बटन दबाया. लिफ्टका दरवाजा बंद हो गया और लिफ्टके डिस्प्लेपर 1... 2... 3... 4... ऐसे एक के बाद एक नंबर दिखने लगे.

लिफ्टका दरवाजा खुलतेही दोनो बाहर आकर सहमेसे इधर उधर देखने लगे. बिल्डींगकी रचना थोडी जटीलही थी. जॉनने लिफ्टमें घुसरहे एक आदमीको पुछा,

"फ्लॅट नं. 15 किधर है "

वह आदमी सिर्फ दायी तरफ हाथसे इशारा करते हूए लिफ्टमें घुस गया. सॅम और कुछ पुछे इसके पहलेही लिफ्टका दरवाजा बंद हो गया और वह आदमी लिफ्टमें गायब होगया था. दोनोंने और कोई पुछनेके लिए मिलता है क्या यह देखा. आसपासभी कोई दिख नही रहा था. उन्होने एक पल सोचा और वे दोनो दायी तरफ निकल पडे.

जॉनने फ्लॅटके दरवाजेपर देखा. 1015 नंबर लिखा हूवा था. दोनोने एक दुसरेकी तरफ देखकर स्वीकारातत्मक सर हिलाया. दोनोभी सतर्क हो गए. सॅमने अपनी बंदूक निकाली और सामने जाकर धीरेसे दरवाजा धकेला. दरवाजा खुलाही था. सॅम और जॉन सावधानीसे अंदर घुस गए. अंदर हॉलमे सब तरफ सब सामान पडा हुवा था. और उस सामानके बिचमें फर्शपर खुनके तालाबमें एक शरीर पडा हूवा था.

" माय गॉड" सॅमके मुंहसे निकल गया.

" लेट मी चेक हिज बीट "

जॉनने निचे पडे हूए शरीर की नब्ज टटोली.

जॉनने सॅमकी तरफ देखा.

सॅमने जॉनको इशारेसेही पुछा.

" ही ईज डेड" जॉनने निराशायुक्त स्वरमें कहा.

सॅमने निराशासे भरी एक लंबी सांस छोडी.

और वह पुरा फ्लॅट ढूंढने के लिये अंदर चला गया.

जॉनने हमेशाकी तरह सामने दिवारपर देखा. इसबारभी खुनसे शून्य निकालनेसे कातील नही भूला था. शून्यके बिचमें खुनसे लिखनेसेभी वह नही चूका था. दूरसे कातिलने क्या लिखा है यह पहचानमें नही आ रहा था इसलिए वह दिवारके पास जाकर देखने लगा.

" शून्य जहासे शुरु होता है वही खतम होता है " दिवारपर लिखा था.

दिवारपर लिखे उस मेसेजकी तरफ देखकर जॉन सोचने लगा. उधर अंदर सॅमका कुछ ढूंढनेका आवाज आ रहा था.

सोचते सोचत अचानक जॉनके चेहरेपर डर का साया छा गया.

"सॅम..." जॉनने सॅमको अपने कपकापाते स्वरमें आवाज दिया.

सॅम झटसे अपना काम छोडकर दौडतेही बाहर आ गया.

" क्या हूवा ?" सॅम जॉनके डरे हूए चेहरेकी तरफ देखकर बोला.

अबतक जॉन खुले दरवाजेकी तरफ दौड पडा था और सॅम कुछ समझ पाए इसके पहलेही जॉन दरवाजेके बाहर सॅमके नजरोंसे ओझल हो गया था.

दरवाजेके बाहरसे जॉनका आवाज आया,

" चलो ... चलो हमें जल्दी करनी पडेगी..."

" कहा ?" सॅमने दरवाजेके बाहर जाते हूए पुछा.

बाहर कॉरीडोरमें जॉन लिफ्टकी तरफ दौड पडा था. सॅमको जॉन क्यों दौड रहा है कुछ समझ नही आ रहा था.

सिर्फ उसके हरकतोंसे कुछ तो गडबड है या होनेकी संभावनाका डर झलक रहा था.

कुछ ना समझते हूए सॅमभी उसके पिछे दौडने लगा.

लिफ्टके पास पहूंचकर जॉनने लिफ्टका बटन दबाया. इत्तफाकसे लिफ्ट वही थी. लिफ्टका दरवाजा खुला.

जॉनने सॅमकी तरफ देखकर कहा, " चलो जल्दी ... हमें तुरंत निकलना चाहिए"

जॉन सॅमके लिए ना रुकते हूए लिफ्टमें घुस गया. सॅम और जोरसे दौडते हूए लिफ्टका दरवाजा बंद होनेके पहले लिफ्टमे घुस गया.

अंदर जाते हूए सॅमने दुबारा पुछा, " लेकिन ... हम कहां जा रहे है?"

" बताता हूं ' जॉन अपनी तेज हूई सांसे ठीक करने की कोशीश करते हूए बोला.

सॅम लिफ्टमें घुसकर जॉनकी तरफ आश्चर्यसे देखते हूए उसके पास जाकर खडा होगया और धीरे धीरे लिफ्टका दरवाजा बंद हो गया.

क्रमश:...

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Ch-54: हिलव्ह्यू अपार्टमेंट (शून्य-उपन्यास)

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जॉन और सॅम कार्पोरेशन आफिससे बाहर आ रहे थे. बाहर आते वक्त लोगोंकी भिड, इधरसे उधर फाइल्स ले जानेवाले ऑफिस बॉइज उनके बिचमें आ रहे थे. उस भिडसे रास्ता निकालते हूए वे ऑफिसके बाहर मैदानमें आगए. मैदानमें आनेके बाद कहा उन्हे अच्छा लगा.

" सर , अब क्या करेंगे ?" सॅमने जॉनके साथ चलते चलते कहा.

वैसे देखा जाए तो अब केसका पुरा चार्ज ऑफीशियली सॅमके हाथमें था. फिरभी वह उसके डिसमीस हूए बॉस जॉनका बडप्पन नही भूला था.

" मुझे लगता है बॉसने अपनेसाथ जो दो लोग दिए है उनको हम पहले इन दो जगह पर निगरानी करनेके लिए तैनात कर देंगे. ."

" हां ... मुझे लगता है यू आर राईट '' सॅम अपने जेबसे मोबाईल निकालते हूए बोला.

सॅमने एक नंबर डायल किया.

" हॅलो ... अँथानी ... देखो ... हमें पाचवे खुनके तीन पॉसीबल अॅड्रेसेस मिले है ... उसमेंका एक अॅड्रेस मै तुम्हे बताता हूं ... वहां तुम्हे जल्दसे जल्द निगरानीके लिए जाना है... हां अॅड्रेस लिख लो..."

सॅमने एक निवासीका नाम और अॅड्रेस अँथनीको बताया.

वह आगे बोला , "... और फौरन उधर जावो ... उसके जानको खतरा है..."

सॅमने फोन कट कर दिया. फिर उसने और एक नंबर डायल किया. उसके साथ दिए दुसरे पुलिसकोभी दुसरे एक अॅड्रेसपर फौरन तैनात होनेके लिए कहा.

" अब इस तिसरे अॅड्रेसका क्या करेंगे?...बॉसने तो अपने साथ सिर्फ दो लोग ही दिये थे..." जॉनने सॅमसे पुछा.

" एक काम करेंगे ... बॉसको फोन करके अपना अबतकका प्रोग्रेस बताएंगे और और एक जण को मांग लेंगे .. ताकी उसको हम इस तिसरे पत्ते पर तैनात कर सकेंगे"

" बॉस और एक आदमी हमें देगा ? ... मुझे तो संदेह है " जॉनने अपना संदेह व्यक्त किया.

" देखते तो है ..."

सॅम बॉसका फोन डायल करने लगा. इतनेमें उसकाही फोन बजा. जॉनने उसके मोबाईलके डिस्प्लेकी तरफ देखा. फोन बॉसकाही था. सॅमने तुरंत फोन अटेंड किया.

"एक अॅड्रेस बोलता हू ... लिख लो..." उधरसे बॉसने कहा.

" यस सर ....प्लीज '' पहले बॉस क्या बोलता है यह सुन लेंगे और फिर अपना प्रोग्रेस उसको बताएंगे ऐसा सॅमने सोचा.

सॅमने जॉनके जेबसे पेन और एक कागज अॅड्रेस लिखनेके लिए लिया.

" याहोता क्राफ्ट, बी-1011 हिलव्ह्यू अपार्टमेंटस, केटी लेन-3" उधरसे बॉसने एक अॅड्रेस बताया.

यह तो उनके पास था वह तिसरा अॅड्रेस था...

लेकिन बॉसको कैसे पता चला वह अॅड्रेस?...

हमने तो बताया नही था ....

" ...वहा फौरन पहूंचो ... पाचवा खूनभी हो चूका है " बॉसने आगे कहा.

उधरसे फोन कट होगया. बॉसको वह अॅड्रेस कैसे पता चला यह पहेली अब सॅमके लिए पहेली नही रही थी.

" हमें देर हो गई है " हताश होकर सॅमने जॉनसे कहा.

" क्या हूवा ?" जॉनने आश्चर्यसे पुछा.

" पाचवा कत्लभी हो गया है ... याहोता क्राफ्टका"

क्रमश:...

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Ch-53: वाय स्टार (शून्य-उपन्यास)

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जॉन और सॅम कॉर्पोरेशनके ऑफीसमें बैठे थे. जॉनने अपने हातमे जो नक्षा था वह एक ऑफिसरके सामने खोलकर टेबलपर फैलाया. वह शहरका नक्षा था और उसपर पांच क्रास निकालकर उसमेंसे एक गोल चक्र निकाला था. जॉनने पांचवे क्रॉसकी तरफ इशारा कर ऑफीसरसे कहा,

" मि. पिटरसन हमें इस एरियामें रह रहे और जिनके नाम 'वाय' (Y) इस अक्षरसे शुरु होते हो ऐसे लोगोंकी लिस्ट चाहिए "

" इस एरियाके और 'वाय' (Y) इस अक्षरसे शुरु होनेवाले निवासी? मुझे लगता है हमें उसके लिए कॉम्प्यूटरकी सहायता लेनी पडेगी "

फिर पीटरसन खडा होते हूए बोला,

" आवो मेरे साथ "

पिटरसनन उन्हे एक कॉम्प्यूटर सेंटरमें ले गया. अंदर चार पाच क्यूबीकल्स थे. और क्यूबीकल्समें कॉम्प्यूटरपर काम करनेमें व्यस्त स्टाफ बैठा हूवा था. कॉम्प्यूटरपर काम कर रहा स्टाफ खासकर लडकियांही थी. पिटरसन उन्हे एक क्यूबीकलके पास ले गया. वहां एक बॉबकटवाली युवा लडकी कॉम्प्यूटरपर बैठी हूई थी. वह अपने काममें व्यस्त थी. उसकी आंखोपर ऐनक लगा हूवा था.

पिटरसनने उस लडकीसे कहा,

" मेरी, इन लोगोंको कुछ निवासी लोगोंकी लिस्ट चाहिए"

जॉनने अपने हाथमें था व नक्शा फिरसे उसके सामने फैलाकर कहा,

" इस एरियामें रहनेवाले... " जॉन नक्शेपर किये क्रॉसकी तरफ निर्देश करते हूए बोला.

"... और जिनके नाम 'वाय' अक्षरसे शुरु होते हो ऐसे "

उस लडकीने पहले जॉन और फिर सॅमकी तरफ एक दृष्टीक्षेप डाला. नक्शेमें बताये हूए जगहपर देखकर वह बोली,

" शुअर सर... जस्ट अ मिनट"

उसने उस क्रॉसकी तरफ देखकर तिनचार कॉलनीके नाम उसके सामने रखे एक कागज के टूकडे पर लिखे. फिर उसने कॉम्प्यूटरके डेस्कटॉपपर एक आयकॉन ढूंढा और उसपर डबल क्लीक किया.

सामने एक सॉफ्टवेअर खुल गया था. उसमें अलग अलग मेनू थे और उन मेनूमें अलग अलग आप्शन्स दिख रहे थे. आंखे छोटी करते हूए उसने एका मेनूके निचेका एक ऑप्शन सिलेक्ट किया.

सामने टेक्स्ट बॉक्समें उसने 'वाय स्टार' (Y*) टाईप किया और दुसरे सिलेक्शन बॉक्समें उसने कागज के टूकडे पर लिखी सब कॉलनी और एरियाके नाम बिचमें कॉमा देकर एकके बाद एक ऐसे लाईनमें लिखे.

वह क्या टाईप कर रही है या कहां कहां माऊस क्लीक कर रही है यह देखनेसे उसकी सफाईसे चल रही हाथोकी और उंगलीयोकी गतिविधीयां मजेदार लग रही थी.

बस अब एक बटन क्लीक करनेकीही देरी थी !..

आखीर उसने 'फाईन्ड' बटनपर माऊस क्लीक किया.

मॉनिटरपर 'फाईन्डीग' ऐसा मेसेज दिखने लगा.

अगर कॉम्प्यूटर नही होता तो यह सब जानकारी ढूंढना बडाही मुष्कील काम था. ....

जॉन सोच रहा था.

और कॉम्प्यूटर भी क्या है तो सब 'शून्य' और 'एक' का खेल. यह 'शून्य' यहांभी आ गया!...

एकदम मॉनिटरपर 29 निवासी लोगोंके नाम उनके पत्तो के सहित दिखने लगे.

" उनतीस लोग !" सॅमके मुंहसे निकल गया.

" अच्छा अब इनमेंके कौन कौन दसवे मालेपर रहते है यह पता चल सकता है क्या?" जॉनने मेरीको पुछा.

" दसवे मालेपर ? कॉम्प्यूटरके मदतसे पता चल सकता है ... लेकिन मुझे लगता है ... अगर हम उनके पते पढकर पता करे तो जादा सुविधाजनक रहेगा. " मेरीने कहा.

उसने अपने उंगलीयोंकी सफाईदार हरकतोंसे प्रिंट कमांड देकर उनतीस लोगोंके नाम उनके पतेके साथ बगलकेही प्रिंटरपर प्रिंट किए.

मेरीने वह प्रिंट हाथमें लेतेही सॅम और जॉन अपना सर बिचमें घुसाकर उस प्रिंटकी तरफ देखने लगे. वे उस प्रिंटके निवासीयोंके अॅड्रेसके रकानेसे अपनी नजर दौडाने लगे. अॅड्रेसमें फ्लोअर का जिक्र कही फ्लॅटके नंबरमें था तो कही अलगसे था. कही कही तो फ्लोअरका जिक्र रोमन नंबरमें किया हूवा था. उनके अब खयालमें आया था की दसवे मालेके निवासी कॉम्प्यूटरके मदतसे ढूंढना सचमुछ कितना मुष्कील हूवा होता.

जॉनने वह प्रिंट अपने हाथमें लेकर उसमेंके तिन लोगोंके नामपर 'टीक' किया.

जॉनने मेरीसे और पिटरसनसे हाथ मिलाया.

" थँक यू मेरी... थँक यू पिटरसन... यू हॅव रिअली मेड अवर जॉब इझी... थँकस्"

" यू आर वेलकम"

जॉन और सॅम प्रिंट लेकर वहासे जल्दी जल्दी निकल गए.

क्रमश:...

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Ch-52: ब्रम्ह है परिपूर्ण (शून्य-उपन्यास)

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हिमालय के पर्बतोंकी गोदमें बहते नदी के तटपर जो गुंफा थी उसमें ध्यानमग्न अवस्थामें बैठा ऋषी, अचानक चौंककर अपने समाधी अवस्थासे बाहर आ गया. उसकी आंखे लाल थी और चेहरेपर कुछ रहस्य सुलझनेका गुढ आनंद झलक रहा था. उसके चेहरेपर एक रहस्यमय मुस्कुराहट फैल गई. धीरे धीरे अपने आप उसकी आंखे फिरसे बंद हो गई. और फिर वक्त, जगह और अपने शरीर से अनजान उनकी सुक्ष्म अस्तीत्वका विचर सब मर्यादाएं लांघकर बंधनमुक्त होकर होने लगा.

जंगलमें पर्णकुटीके पास तिन लोग आपसमे कुछ चर्चा कर रहे थे. इतनेमें वहा वह ऋषी आगया. उसकी आहट होतेही सबलोग पलटकर उसकी तरफ देखने लगे.

यह तो वही ऋषी है...

जो उनको पहले एक बार मिला था...

उनको उसके लब्ज याद आ गए-

" चिंता मत करो.. मै तुम्हे तुमारे दुविधासे बाहर निकालूंगा "

वे बडी आस से उसकी तरफ देखने लगे.

ऋषीके चेहरेपर एक गूढ मुस्कुराहट दिखने लगी.

" आप लोगोंकी पहेली सुलझीही समझो " ऋषी गूढभाव से बोला.

" क्या? ... हमारी पहेली सुलझी?" तिनोंके मुंहसे खुशीसे निकला.

ऋषीने एक संस्कृत श्लोकका जोरसे उच्चारण किया -


ॐ पूर्णं अद: पूर्णं इदं, पूर्णात् पूर्णं उदच्यते ।

पूर्णस्य पूर्णं आदाय, पूर्णं एवाव शिष्यते ॥


"अर्थात जब पूर्णका पूर्णसे संयोग होता है या पूर्णसे पूर्ण निकाला जाता है तब बाकी पूर्णही रहता है. ब्रह्म यह परिपूर्ण है... इसलिए ब्रह्ममें बह्म मिलाया जाए तो या ब्रह्मसे ब्रह्मको निकाला जाए तो आखीर बाकी ब्रह्मही रहता है.

यहां पूर्ण और ब्रह्म यानीकी अगणित हो सकता है... जैसा दिन हो तो रात आतीही है, प्रकाश के विरुध्द अंधेरा होता है... वैसे जहा पूर्ण यानी अगणित हो वहां उसका विरुद्ध रिक्तता यानी शून्य आनाही चाहिए."

सामने नदीकी तरफ इशारा करके फिर ऋषीने आगे कहा, " उस पाणीमे बुलबुले देखो कैसे बनते है और कैसे नष्ट होते है "

" ऐसी एक चिज है की वह कभी कुछभी नही और कभी कभी सबकुछ है... वह जहांसे शुरु होती है खतमभी वही होती है... वह ऐसी चिज है की जिससे यह ब्रह्मांड, आप और मै तैयार हुए है... वह ऐसी चिज है की जिसमे सबको एक दिन समा जाना है "

बोलते बोलते ऋषी उन तिनोंके इर्द गिर्द गोल गोल चल रहा था.

"ऋषीवर, हम लोग गणितपर संशोधन कर रहे है हमें हमारे पहेली का गणिती हल चाहिए ; ना की आध्यात्मिक ' उनमेंसे एकने कहा.

" हां, आप लोगोंका संशोधन आपलोगोंको जिस वजहसे अपूर्ण लग रहा है वह आपके पहेलीका हल जितना गणिती है उतनाही आध्यात्मिक है. "

फिर ऋषीने सबको उठकर एक तरफ आने के लिए कहा और गोल गोल चलकर पैरके निशानोंसे जो गोल बना था उसकी तरफ निर्देश कर कहा,

'' तुम्हे तुम्हारा संशोधन पुरा करनेके लिए जिस बात की जरुरत थी वह है शुन्य"

तिनोंके चेहरेपर खुशी झलक रही थी.

ऋषीने कहा " शून्य जहा शुरु होता है खतम भी वही होता है"

एकने बडासा गोल निकाला.

ऋषीने कहा " कभी शून्य कुछभी नही"

एकने 0 को 6 मे जोडकर 6 ही आता है ऐसे लिखा.

ऋषीने आगे कहा " कभी शून्य सबकुछ है यानी सर्वसमावेशक है"

दुसरेने 0 बार 6 करनेसे 0 आता है ऐसा लिखा.

उन तिनोंके संशोधन कार्यको अब गती मिली थी. वे तिनो अपने कार्यमें व्यस्त हो गए. जब वे व्यस्तसा से जागे तब उन्होने आजूबाजू देखा. तो ऋषी वहा नही था.

उनके चेहरेपर आश्चर्य झलक रहा था. .

कहा गया वह ऋषी?...

शायद वह शून्यमें विलीन हूवा था....

क्रमश:...

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Ch-51: आग भडक उठी (शून्य-उपन्यास)

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बॉस और बाकी पुलिस टीव्हीके सामने खडे होकर सारी अमेरीकामे किसी आगकी तरह फैले दंगे फसाद की खबरे देख रहे थे. बिच बिचमें फोन बज रहा था. उसे एक पुलिस अटेन्डंट अटॆंड कर रहा था. बॉसने दुसरा न्यूज चॅनल लगाया. वहां भी वही. सब न्यूज चॅनल्सपर वही खबरे - दंगा, फसाद, लाठीचार्ज , टीयर गॅस, सब वही खबरें थी.

इतनेमें जॉन आवेशसे अंदर आया. उसकी तरफ सॅमने सहानुभूतीपूर्वक देखा. बॉसने देखकर ना देखे ऐसा किया और बाकी सब अपने अपने काममे व्यस्तता का अभिनय कर रहे थे. बॉसका ऐसा टालना उसे अच्छा नही लगा. वह लगभग चिल्लाकरही बोला,

" सर, पाचवा कत्ल अगर हम रोक नही पाए तो यही दंगे पर उतारू लोग खुन खराबा कर सकते है...फिर उनको रोकना बडा मुश्कीलही नही नामुमकीन हो जाएगा.... किसीभी हालमें हमें यह कत्ल रोकना जरुरी है. "

बॉसने एक कटाक्ष जॉनकी तरफ डाला. फिर कुछ सोचा और सॅमकी तरफ देखकर बोला,

" सॅम मुझे लगता है जॉन सही कह रहा है. तूम और और दो लोग उसके साथ जाओ और कुछ करने लायक हो तो देखो. "

फिर बॉस जॉनकी तरफ मुडा.

" आय अॅम सॉरी जॉन लेकिन मै अब इस हालमें इतनाही कर सकता हूं "

जॉनने बॉसके बोलनेमेंका व्यंग भाप लीया था... उसने उसके सादे कपडे की तरफ देखकर ताना मारा था.

जॉन कुछ बोले इससे पहले बॉसने संभलकर कहा,

'' क्योंकी कॅनॉट प्लेसको दंगाफसाद शुरु हो चूका है... मुझे वहाभी लोग लगेंगे और औरभी जगह फसाद हो सकते है... "

जॉन बॉॅसको कुछ बोले इससे पहले बॉसके लिए और एक फोन आया.

बॉस फोन अटेंड करनेके पहले जॉन और सॅमसे बोला,

"तुम जल्दी जाओ... वक्त मत बरबाद करो "

जॉन और सॅम जल्दी जल्दी बाहरकी ओर निकले.

क्रमश:...

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Ch-50B: ऑडीओ (शून्य-उपन्यास)

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" मेरे हिंदूस्थानी भाईयों और बहनो..."

बिचमें एक लांबा पॉज था.

बोर्डरूमके सब लोगोंने एक दुसरेकी तरफ प्रश्नार्थक मुद्रामें देखा.

ऑडीओका आवाज फिरसे बोर्डरूममें घुमने लगा. .

" किसी ना किसी तरह कोई हमपर आजतक राज करते आया है. हमे जैसे गुलामी की आदत सी हो गई है. इससे पहले 150 साल तक हमपर ब्रिटीश लोगोंने राज किया ... और बुरी तरह... किसी जानवरो की तरह हमसे बर्ताव किया. यह लोगोंका हमपर राज करने का सिलसिला अभीभी जारी है. अभीभी हमपर कोई राज कर रहा है. यह सुनकर आपको आश्चर्य हो रहा होगा. लेकिन यह सच है और यह आश्चर्य की नही शर्म की बात है. हमारे गुजरे हूए कल पर थोडी नजर डाली जाएँ तो यह जो आजका प्रगत विज्ञान है. इसकी नींव हमने रची हुई है. लेकिन उसे कोई मानने को तैयार नही. वह विज्ञान इन प्रगत देशोंने या तो हमसे चुराया है या अपने ताकद की जोर पर जबरदस्ती हमसे हथीया लिया है. उदाहरण के तौरपर है शून्य. शून्य का शोध हमने लगाया है. लेकिन यह कोई मानने के लिए तैयार नही. पायथॅगोरस थेरम उसका शोध हमारे पूर्वज वैज्ञानिक आर्यभट्टने लगाया. लेकिन आज वह किसी और के नाम से प्रचलित है ज्या (sine) का शोधभी आर्यभटने लगाया है. ये होगए गणिती क्षेत्र के शोध और संशोधन. स्वास्थविज्ञानमें विविध जडीबूटीयाँ, उनके औषधीय उपयोग. इन सबको अनदेखा करते हूए अमेरिकाका हल्दीका पेटेंट अपने झोलीमें डालनेका प्रयास किसीको नागवार गुजरा नही क्योंकी वह एक शक्तीशाली देश है. अपने शक्तीके जोर पर वे कुछ भी करने की क्षमता रखते है. अपने शक्ती के जोर पर वे किसी झूठ को सच का सुनहरी मुलामा देकर मिडीया का सहारा लेकर सारे विश्वपर थोपते है. ऎैसे बहुत सारे शोध है जो हमने लगाये हूए है लेकिन वह आज कोई दुसरे लोगोंने चुराकर अपने नाम पर कर लिए है या फिर वे अपने ताकत के जोरो पर उसको वे अपना संशोधन या शोध बताते है. इससे एक बात साबीत होती है की हम दिमागी तौर पर ना कभी कीसी देशसे कम थे ना है. हाँ आज भी नही है. आज इस वक्त अमेरिका, युरोप मे हमारा ब्रेन ड्रेन हो चूका है. यह बात यह साबीत करती है की आज भी दिमागी तौर पर हम किसीसे कम नही है. हमारे पास दिमाग होते हूए भी यह सब क्यो हो रहा है? उसके लिये हमारी सोई हूई राष्ट्रीयता और इन प्रगत देशोंकी हमारे प्रति नीतीयाँ और उनका हमारे अंदरूनी मामलेमें हस्तक्षेप है.

उन लोगोंका हमारे प्रती ध्यान खिंचकर उन्हे झिंजोरने के लिए और अपने हिंदू लोगोंका सोया हूवा धर्माभीमान , अभिमान और राष्ट्रीयता जगाने के लिए हमने यह 'झीरो मिस्ट्री' हत्या श्रृंखला अभियान चलाया है. क्योंकी सोये को जगाया जा सकता है लेकीन सोनेका ढोंग करने वाले को जगाने के लिए किसी बडे धमाको की जरूरत होती है. हाँ इस वक्त हमें बडे धमाके की जरूरत है. क्योंकी हमेशा हमारे अहिंसा और शांतीप्रीय भाव को लोगोंने गलत तरीके से लिया है और उसकी वजहसे वे हमे कमजोर समझते है. यह तो सिर्फ पहला कदम है. हमें अपना खोया हूवा वैभव पाने के लिए और बहुत कुछ करना बाकी है. मुझे आशाही नही बल्की विश्वास है की आप सब हिंदू लोग इस अभियान मे हमारा तहे दिलसे साथ देंगे. हिंदूज आर मच मोर कॅपॅबल बी रेडी फॉर रूलींग द र्वल्ड ...

... जय हिंद! "


मेसेज हिंदीमें था. बोर्डरूमें किसीकोभी हिंन्दी नही आती थी. लेकिन बोर्डरुममें बैठे एक भारतीय मुलके एक अधिकारीके वजहसे बाकी लोगोंको समझनेमं दिक्कत नही हूई. मेसेज सुनते वक्त बिचबिचमें वह अपने साथीयोंको इंग्लीशमें ट्रान्सलेट कर बता रहा था.

बोर्डरूममें एक अजीब सन्नाटा फैला हूवा था.

" माय गॉड" बॉसके मुंहसे निकल गया.

" इट इज अ टेररीझम?" सॅमने पुछा.

" नो. नॉट सिप्ली टेररीझम इट्स हिंदू टेररीझम... अर्लीयर वुई वेअर व्हीक्टीम ऑफ मुस्लीम टेररीझम. नाऊ इटस् हिंदू टेररीझम आल्सो इन द लिस्ट" बॉसने कहा.

" सर मुझे लगता है हमें किसीभी हालमें अगला कत्ल होनेसे बचाना चाहिए. " जॉनने कहा.

" मि. जॉन अब यह मामला सिर्फ एक सिरीयल मर्डर केस नही रहा है.... नाऊ इट हॅज बिकम अ फेनॉमेनॉन" बॉसने कहा.

" लेकिन अगर हम यह अगला कत्ल होनेसे अगर रोक सके ... और कातिलको पकड सके ... तो इसपर जरुर कुछ नियंत्रण आयेगा " जॉनने अपनी राय व्यक्त की.

" अब क्या क्या टाल सकते है हम... अब पहलेसेही सारी अमरिकामें भारतीय अमेरिकन और अमेरिकन लोगोंमें दंगे भडक चूके है. और कातिल एक ना होकर एक टेररीस्ट संघटना है. हिंदू टेररिस्ट संघटना "

' लेकिन यह दंगे इतने जल्दी एकदमसे कैसे शुरु हूए? '' सॅमने आश्चर्य व्यक्त करते हूए कहा. .

" 9/11 के दरम्यान लोगोंका गुस्सा एक सीमातक यानी की उनकी थ्रेशोल्ड लेव्हलतक पहूंच गया था. ... और अब यह और एक टेररीझम सुनकर उनका गुस्सा आऊट र्बस्ट होगया है.." बॉसने मानो लोगोंके आचरण का विश्लेशण किया. वैसे मॉब बिहेवीयर और मॉब टेन्डंसीके बारेमे बॉसका अच्छा खासा अध्ययन था. फिरसे पियून अंदर आया.

" साहब, मेयरका फोन" पीयूनने बॉसके कानकेपास झूककर अदबसे कहा.

बॉस उठ खडा हूवा.

" चला उठो .. अब हमें यह दंगा फसाद काबूमें लाना पडेगा."

बॉस बाहर जाने लगा. जॉन छोडकर सब लोग उठकर बॉसके पिछे पिछे जाने लगे. जॉन नाउम्मीद होकर सब जानेवालोंको देखता रहा.

क्रमश:...

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Ch-50A: ऑडीओ (शून्य-उपन्यास)

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जॉन, सॅम और बाकी पुलिसके अधिकारी पांचवे कत्लके वक्त कातिलको कैसा पकडना है इस बारेमे चर्चा करने लगे. जॉनने पहले सबको बोलनेका चान्स दिया और उनका कहना ध्यान देकर सुना. और सबके चर्चाका एक मध्य निकालकर कातिलको पकडनेका एक तरीका तय किया. चर्चामें उसने सबको एक सरीका अवसर और मौका दिया था. यह चर्चाका तरीका सबके लिये नया ही था. क्योंकी बॉसका तरीका अलगही रहता था. उसका डिक्टेटरशीपमें जादा विश्वास था. यह डेमोक्रॅटीक तरीका सबको पसंद आया था. इसमें सबका इन्वॉल्वमेंट होनेसे सबको प्रोत्साहन मिलता था. लेकिन उनको चिंता थी की अगर अब बॉस वहा आगया तो सब गडबड कर देगा. और वैसाही हूवा. उनकी चर्चा आधेमेंही होगी तब अचानक वहां तेजीसे बॉस आया. उसके चेहरेपर पसिना आया हूवा था. उसकी वह दशा देखकर सब लोग शांत होगए. जरुर कुछ अघटीत घटा था. उसके पिछे पिछे एक पियून एक लॅपटॉप लेकर आया.

" एक गडबड हो गई है " आतेही बॉसने कहा.

सब लोग स्तब्ध होकर बॉस क्या कहता है यह सुनने लगे.

" यह कातिल कोई अकेला आदमी ना होकर कोई संघटना होगी ... कोई बडी संघटना .. शायद टेररिस्ट संघटना"

" टेररिस्ट संघटना?" सबके मुंहसे आश्चर्योद्गार निकले.

क्योंकी वहां बैठे सबके लिए यह नई जानकारी थी. किसीनेभी इस केसको उस तरहसे नही सोचा था.

" प्रेसका फोन था.. सब तरफ गडबडी मची हूई है... उन लोगोंने इंटरनेटपर एक ऑडीओ रिलीज किया है. " बॉसने एक सांसमे बताया.

फिर बॉसने डॅनको लॅपटॉप शुरू करनेका आदेश दिया. डॅन लॅपटॉप शुरू करने लगा और बॉस आगे बोलने लगा,

" मैने अभीतक ऑडीओ सुना नही है. मुझे लगता है वह हमें सुनना चाहिए" बॉस लॅपटॉपके सामने बैठते हूए बोला.

तबतक डॅनने लॅपटॉप शुरु कर गुगल सर्च इंजीन ओपन किया. डॅनको बॉसके बोलनेसे पता चला था की पहले वह ऑडीओ फाईल इंटरनेटपर ढूंढनी पडेगी.

डॅनने सर्च स्ट्रींग टाईप करनेके पहले 'क्या सर्च स्ट्रींग दूं ' इस आविर्भावसे बॉसकी तरफ देखा.

वैसे बॉसका और डॅनका टयूनिंग अच्छा था. किसके मनमें क्या चल रहा है यह उनको एकदूसरेके साथ हमेशा रहनेसे पहलेही पता चलता था.

" झीरो मिस्ट्री" बॉसने कहा.

डॅन ने ' झीरो मिस्ट्री' सर्च स्ट्रींग देकर सर्च बटन क्लीक किया. एक पलमें सौसे उपर निले कलरकी लिंक्स कॉम्पूटरके ब्राउजरपर दिखने लगी.

सब लोग अपना जितना हो सकता है उतना सर अंदर घुसाकर मॉनिटरकी तरफ देखने लगे.

" वह चौथी लिंक " बॉसने कहा.

सॅमने वह चौथी लिंक क्लीक की. एक साईट ओपन हो गई. उसपर एक ऑडीओ फाईलकी लिंक थी. प्ले और डाऊनलोड ऐसे दो ऑप्शन्स थे.

"प्ले इट डायरेक्टली" बॉस ने आदेश दिया.

सॅमने प्ले बटनपर क्लीक किया. पहले ऑडीओपर जैसे किसी चक्रवातके पहले सन्नाटा होता है वैसा सन्नाटा था. फिर एक धीरगंभीर आवाज घुमाने लगा. सब लोग एकदम चूप होकर सुनने लगे -

क्रमश:..

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Ch-49C: मिटींग (शून्य-उपन्यास)

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....जॉनने बोर्डरूममे इकठ्ठा हूए सबको झीरोके खोजके इतिहासके बारेमें संक्षीप्तमें जानकारी दी.

" और इस झीरोमेंही कत्लका रहस्य छिपा हूवा है... भारतीय इतिहासमें जगह जगह झीरोका उल्लेख 'शून्य' इस नामसे मिलता है. "

जॉनने एक दीर्घ सांस ली और आगे बोलने लगा.

" पहला खून हूवा उसका नाम सानी मतलब वह 'एस' (S) इस अक्षरसे शुरु होता है. दुसरा खून हूवा उसका नाम हूयाना यानी की वह 'एच' (H) इस अक्षरसे शुरु होता है. तिसरा खून जिसका हूवा उसका नाम उटीना जो की 'यू' (U) इस अक्षरसे शुरु होता है. और अब हालहीमें जिसका खुन हूवा उसका नाम 'नियोल' जो की 'एन' (N) इस अक्षरसे सुरू होता है. मतलब 'एस् एच् यू एन वाय ए' (SHUNYA) 'शून्य' यानीकी अब जो खून होनेवाला है उसका नाम 'वाय' (Y) इस अक्षरसेही शुरु होगा इसमें कोई दोराय नही होनी चाहिए"

जॉनने किये त्रुटी रहित विश्लेषनसे सब लोग उसपर खुश लग रहे थे - बॉसभी.

" लेकिन इस शहरमें जिसका नाम 'वाय' (Y) इस अक्षरसे शुरु होनेवाले हजारो या लाखो लोग होंगे. तब क्या हम उन सब लोगोंको प्रोटेक्शन देंगे?" बॉसने आपनी अडचन चाहिर की.

" इतने लोगोंको संरक्षण देना तो लगभग नामुमकीन होगा !" सॅम ने कहा.

" नही... और एक बात मुझे इस सब मामलेमें मिली है ... जिसकी वजहसे हम लोगोंका टारगेट नॅरो डाऊन होनेवाला है " जॉनने कहा.

और एक आशाका किरन दिखेजैसे सब लोग जॉनकी तरफ उत्सुकतासे देखने लगे. फिर जॉन अपने कुर्सीसे उठ गया और सामने टंगे शहरके नक्षेके पास गया. वह अपने पासके कुछ कागजभी साथ ले गया. फिर अपने पासके कागजकी तरफ देखते हूए उसने सामने नक्षेपर लाल स्केच पेनसे एक क्रॉस किया.

" पहला खून हूए सानीका घर शहरमें लगभग यहांपर है. "

सब लोग जॉन क्या बताना चाहता है यह समझनेका प्रयास करने लगे.

जॉनने अपने पासके कागजसे देख देखकर सामने नक्शेपर और एक लाल क्रॉस किया.

" दुसरा खून हूए हूयानाका घर यहां कही है.. "

उसने और एक क्रॉस नक्शेपर मारते हूए कहा,

" तिसरा खून उटिनाका हूवा और उसका घर यहा पर है.. "

" और आखरी खून नियोलका हूवा और उसका घर"

जॉनने फिरसे एकबार अपने पासके कागजकी तरफ देखते हूए नक्शेपर एक क्रॉस करते हूए कहा, , "ये .. यहा है "

सबके चेहरेपर अभीभी संभ्रम था .

" लेकिन इससे क्या साबीत होनेवाल है .?" सॅमने प्रश्न उपस्थित किया .

" मतलब .....एक तो तुम्हे क्या कहना है यह तुम्हेही नही समझ आ रहा है ... या फिर हमारे सरके उपरसे जा रहा है.. " बॉसने कहा.

" जरा ध्यान देकर देखो .... सोचो ... तुम्हारे कुछ खयालमें आता है क्या ?"

जॉनने एकबार बोर्डरूममें बैठे सब लोगोंकी उपरसे नजरे घुमाई.

काफी समय चुप्पीमें गया. सब लोग उससे कुछ साबीत होता है क्या यह देखने लगे.

फिर जॉनने सामनेके नक्शेपर हरे डॉटस देते हूए सब लाल क्रॉसके उपरसे एक वक्र लकिर निकाली. वह वक्र लकिर जहांसे निकाली थी वहां फिरसे जोड दी. फिर उस डॉटसके उपरसे एक मोटी हरी लकीर निकाली. और क्या आश्चर्य उस नक्शेके उपर एक सर्कल दिखने लगा.

"यह देखो यह क्या निकला"

" सर्कल" एकने कहा. .

" सर्कल नही... यह शून्य है " जॉनने गूढ भावसे कहा.

सामने बैठे सभी लोगोंके चेहरेपर सबकुछ बोध होनेके आनंदयुक्त और उत्साहपूर्ण भाव आ गये थे.

" यस्स... यू आर जिनीयस जॉन!" सॅमके मुंहसे अनायास ही निकल गया.

बॉसने सॅमकी तरफ नाराजगीसे देखा.

" पहला क्रास यहां, दुसरा यहां , यहां तिसरा और यहां चौथा. "

जॉन नक्शेपर क्रॉसकी तरफ निर्देश करते हूए बोला.

" मतलब पांचवा क्रास यही कही होना चाहिए. "

जॉनने चक्रपर चौथे और पहले क्रॉसके बिचमें जो खाली जगह थी वहा एक पांचवा क्रॉस निकाला.

" इस पांचवे क्रॉसके एरियामेंही कातिल का अगला निशाना छूपा हूवा है और उसका नाम 'वाय'(Y) इस अक्षरसे शुरु होता है . यह दो जानकारीयोंमे बैठनेवाले लगभग तिन या चार मकान होंगे. और वह भी पॉसीब्ली दसवे मालेपर ... क्योंकी हर खुनके वक्त कातिलने दसवा मालाही चूना है "

" यस ....इन मकानोंपर अगर हम नजर रखते है तो कातिलको हम जरुर पकड पायेंगे.." सॅमने उत्साहसे भरे स्वरमें कहा.

इतनेमें एक पियून अंदर आकर बॉसके पास जाकर धीरेसे बोला,

" साहब , आपका अर्जंंट फोन है "

बॉस कुर्सीसे उठ गया.

" यू कॅरी ऑन. आय वील बी बॅक सून" बॉस जॉनको और बाकी लोगोंको बोलते हूए 'खाट खाट' जुतोंका आवाज करते हूए बोर्डरूमसे बाहर निकल गया.


क्रमश:...

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Ch-49B: मिटींग (शून्य-उपन्यास)

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... दुनियाके इतिहासमें शून्यकी खोजको बडा महत्व है. शून्यकी खोजने गणितको एक नई दिशा और पुर्णत्व दिया. शून्यको एक नंबरके हैसीयतसेही नही तो एक कॉन्सेप्टके हैसीयतसे बडा महत्व है. अभीभी विज्ञानमें ऐसी बहुतसारी समस्याए है की जो शुन्यके बिना और परिणामत: 'अगणित' (infinity) इस कॉन्सेप्ट के बिना सुलझाना लगभग नामुमकिन है. शून्यकी खोज किसने की इस बातपर बहुत संभ्रम और अलग अलग धारणाए अस्तीत्वमें है. लेकिन यह भी एक सच है की अमेरिका और युरोप जैसे दुनियाके हिस्सेमें जिसकोकी अब बहुत जादा प्रगत समझा जाता है वहां शुन्यकी खोज नही हूई थी. वहां बाकी खोजोंकी तरह शून्यको चतूराई और कपटसे 'इंम्पोर्ट' किया गया था. इतनाही नही तो युरोप और अमेरिकामें जो रोमन अंकपध्दती शुरुमें इस्तेमाल की जाती थी वह बहुत ही अनपुयुक्त और अपरिपूर्ण थी. क्योंकी उस पध्दतीमें आंकडेंको उसके जगहके अनुसार महत्व या व्हॅल्यू ना होनेसे उस अंक पध्दतीममें गणितके बेसीक प्रक्रियायें जैसे जोडना, घटाना, विभाजन, गुणन भी ठिक ढंगसे और जलद नही किये जा सकते है.

अब शुन्यके बारेमेंही बोलना हो तो एक धारणा ऐसी है की शून्यकी खोज सबसे पहले भारतमें लगी. 1 यह प्राकृतिक पहली संख्या है. 1 के बाद आनेवाली प्राकृतिक संख्या .. 2,3,4,5,6 ... इत्यादि है. इन संख्यांयोंका कोई अंत नही. 1 में 1 का योग करनेसे 2 आता है. 2 में 1 का योग करनेसे 3 आता है. . 3 में 1 का और 4 में 1 का योग करनेसे क्रमश: 4 और 5 आता है. इसी प्रकार 6,7,8... इत्यादि संख्यायें आयेगी. योग इस क्रियाके विरुध्द क्रियाको व्यवकलन यानेकी घटाना कहते है. . 5 मेंसे 1 का व्यवकलन करनेसे 4 प्राप्त होता है , 4 से 1, 3 से 1 और 2 से 1 का व्यवकलन करनेसे क्रमश 3,2,1 ऐसे : प्राप्त होते है. लेकिन अब सवाल आता है की 1 से 1 का व्यवलोकन करनेसे क्या प्राप्त होगा? यह सवाल सबसे पहले भारतीय ऋषींयोंके दिमागमें आया . 1 से 1 का व्यवलोकन करनेसे रिक्तता उत्पन्न होती है , और उसे 0 के स्वरुपमें लिखा जाता है.. शून्यको संख्याके स्वरुपमें किसने उपयोगमें लाया यह कहना थोडा कठिन है. लेकिन इतनी जानकारी मिलती है की ई.पू. दुसरे शताब्दीमें यूनानके जोतिषी शून्यकेलिए 0 का इस्तेमाल करते थे. लेकिन वह लोगभी उसी अर्थसे उसका उपयोग करते थे जिस अर्थसे बॅबीलॉनीयन लोग उपयोग करते थे. 200 ई.पू. आचार्य पिंगलके छन्द: सूत्रमें शून्यका इस्तेमाल मिलता है. भक्षाली पाण्डूलिपिमें (300 ई.) शून्य चिन्हका (0) प्रयोग कर संख्याए लिखी हूई मिलती है. इस ग्रंथके 22वे पन्नेपर शून्य चिन्ह (0) मिलता है. शून्याका सबसे प्राचीन चिन्ह है (.).

शून्यका खोजही नही तो बीजगणित, भूमिती इन सबपर आर्यभट्ट् गणिततज्ञके कालमें बहुत कार्य किया गया. लेकिन वह सब कार्य संस्कृतमें सूत्रोंके स्वरूपमें होनेसे जिनको संस्कृत नही आता वे उसे समझ नही पाए. कालके साथ भारतमें वह पिढी दर पिढीतक मुखोद्गद करके संजोया गया. शून्यके खोजका मूल भारतीय इतिहासके वैदिक कालमें अलग अलग स्वरूपमें मिलता है. सबसे पहला जिसे कोईभी ठूकरा नही सकता ऐसा प्रमाण ग्वालेर को मिला. ग्वाल्हेरमें एक जगह संवत 933 में खुदाये गये कुछ आंकडे मिले. वहा एक जगह 50 हार का उल्लेख मिलता है और 270 यह संख्या हिंदी अंकका उपयोग कर लिखी हूई है. यहा शून्यका संख्याही नही तो प्लेस होल्डर के हैसीयतसेभी उपयोग किया गया है.

दुनियाके इतिहासमें बह्मगुप्त यह पहले गणिततज्ञ थे की जिन्होने नॅचरल नंबर्स और झीरोपर अलग अलग गणिती प्रक्रिया करनेका प्रयास किया था. औरभी कुछ सभ्यताओंने जैसे बॅबीलॉनीयन लोगोंनेभी एक चिन्ह शून्यके लिए प्लेसहोल्डर और एक संख्या की हैसीयतसे इस्तेमाल कीया था. लेकिन एक धारणाके अनुसार दुनियाके इतिहासमें भारतीय सभ्यतामेंही सबसे पहले झीरोका एक संख्या, एक प्लेस होल्डर और एक संकल्पना के हैसीयतसे इस्तेमाल हूवा था. इस चिन्हको , उस प्लेस होल्डरको और संकल्पनाको भारतीय वेदीक साहित्यमें 'शून्य' ऐसा नाम दिया हूवा मिलता है . ...

क्रमश:...

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Ch-49A: मिटींग (शून्य-उपन्यास)

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बोर्ड रूममें बॉस, सॅम, डॅन और बाकी काफी पुलिस अधिकारी बैठे हूए थे. जॉन सबके सामने एक जगह बैठा था. सब लोग अब वह क्या बताता है यह सुननेके लिए बेताब थे. बॉसको वह क्या बताता है इसमें कोई खास दिलचस्पी नही दिख रही थी.

जॉनने शुरवात की.

" यह जो कातील है वह एक सिरीयल किलर है इसमे किसीकी दोराय नही होगी".

जॉनने सब लोगोंपर एक नजर दौडाई.

" मुझे लगता है अगर हम सिधे मुद्देपरही बात करोगे तो ठिक रहेगा' बॉसने उसे बिचमें टोका.

जॉनको बॉसका ऐसा बिचमें टोकना अच्छा नही लगा था. उसे उसका गुस्सा भी आया. लेकिन अपना गुस्सा चेहरेपर जाहिर ना करते हूए जॉनने सिर्फ एक नजर बॉसपर डाली.

" देखो , कातिलने पहला कत्ल जिसका किया उसका नाम था सानी , दुसरे का हुयाना, और तिसरे शख्सका उटीना और अब हालहीमें जो चौथा कत्ल हूवा उसका नाम था नियोल.

जॉनने फिरसे एकबार बॉसको टालते हूए सब लोगोंपर अपनी नजर घुमाई.

" और अब पाचवा कत्ल जिसका होनेवाला है उसका नाम 'वाय' इस अक्षरसे शुरु होनेवाला है.." जॉन कोई राज खोलनेके आविर्भावमें बोला.

बॉसची उत्सुकता बढ गई थी लेकीन उसने वैसा जाहिर नही होने दिया.

" यह तूम इतने ठोस तरहसे कैसे कह सकते हो ?" किसीने अपनी शंका उपस्थित की.

" बोलता हूं " जॉन एक दीर्घ श्वास लेते हूए बोला.

अब सब लोग एकाग्र होकर ध्यान देकर सुनने लगे.

" हर कत्लके वक्त कातीलने हमे 'क्लू' देनेकी कोशीश की थी. उस सब क्लू में एक कॉमन मुद्दा जो था वह था 'झीरो' और अब चौथे कत्लके वक्त उसने दिवारपर लिखा था -

'झीरोकी खोज किसने की?'

... और उसीमें अगले खुनका रहस्य छिपा हूवा है ... वैसे देखा जाए तो झीरोकी खोज किसने की यह एक विवादातीत मुद्दा है ..."

जॉन झीरोकी खोजके बारेमे बोर्डरूममें बैठे सब लोगोकों जानकारी देने लगा. सब लोग ध्यान देकर सुन रहे थे. लेकिन वह सुनते हूए डॅन बेचैन होगया था. वह बोर्डरूमसे बाहर जानेके मौकेका इंतजार करने लगा...

क्रमश:...

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About Hindi

Hindi is defined as the official language in the Indian constitution and considered to be a dialect continuum of languages spoken or the name of an Indo-Aryan language. It is spoken mainly in in northern and central parts of India (also called "Hindi belt") The Native speakers of Hindi amounts to around 41% of the overall Indian population. Which is the reason why the entertainment industry in India mainly uses Hindi. The entertainment industry using Hindi is also called as bollywood. Bollywood is the second largest entertainment industry producing movies in the world after Hollywood. Hindi or Modern Standard Hindi is also used along with English as a language of administration of the central government of India. Urdu and Hindi taken together historically also called as Hindustani.