जॉनने डिटेक्टीव अॅलेक्सके दरवाजेकी बेल बजाई. अंदरसे हलकासा आवाज आया-
'डिंग डाँग'
जॉन दरवाजा खुलनेकी राह देखते हूए खडा रहा. जॉनने बिचमें आसपास एक नजर घुमाई.
....अॅलेक्स घरमें अकेलाही रहता था. जॉन और अॅलेक्सकी दोस्ती काफी पुरानी थी. घरके सामने जो बागीचा था उसकी अॅलेक्स कुछ खास देखभाल नही करता होगा ऐसा प्रतीत हो रहा था. जब अॅलेक्सकी बिवी जिंदा थी तब उसने बडे शौकसे यह बागीचा बनाया था. लगभग पाच साल पहले अॅलेक्सके बिवीका एक दुर्घटनामें इंतकाल हूवा था. तबसे इस बागकी देखभाल कोई नही करता था. बिच बिचमें वहां का एक चौकीदार किसीको पैसे देकर वह बागीचा ठिक कर लेता था. लेकिन वह नियमित नही होता था. इसलिए वह बागीचा भयाण और रूक्ष दिखता था. बिलकुल अॅलेक्सजैसा. .
बेल बजाकर काफी समय हूवा था. फिरभी अभीतक अॅलेक्सने दरवाजा कैसे नही खोला. ?...
जॉनने फिरसे एकबार बेल बजाई. दरवाजा जोरजोरसे ठोका और फिर दरवाजा खुलनेकी राह देखने लगा.
...अॅलेक्सकी पत्नीकी मृत्यूके बाद उसके व्यक्तीत्वमे बहुत बदल हुवा था. तबसे अॅलेक्सका दोस्तोंके साथ हंसना मस्तीकरना लगभग बंद हो चूका था. उसेके नेचरमेंभी बदलाव आया था. वह अब अकेला रहना पसंद करने लगा था. उसको मां बाप, बेटा कुछ भी आगे पिछे ना होनेके कारण वह और ही बेपर्वा हूवा था. उसकी बिवीही उसका सबकुछ थी और वही ना रहनेसे वह औरही अकेला हो गया था. उसका कामभी ऐसा था की उसका अंधेरेसे जादासे जादा पाला पडता था. लेकिन अब अंधेरेसे उसकी गहरी दोस्ती हो गई थी.
उसकी जिंदगी तबसे निरस बन चूकी थी और उसने उसके बाद किसीभी स्रीको उसके जिंदगीमें आनेके लिए कोई गुंजाईश नही छोडी थी.
अभीभी अॅलेक्सके घरका दरवाजा खुला नही था...
लेकिन अब जॉनको चिंता होने लगी थी. उसेने फिरसे दरवाजा ठोका.
" अॅलेक्स" जॉनने अंदर जोरसे आवाज लगाई.
अंदरसे कोई प्रतिक्रिया नही थी.
जॉन अब अॅलेक्सके घरके बाजूसे पिछे जाने लगा. पिछे जाते जाते उसने एक खिडकीसे अंदर झाककर और नॉक कर देखा. लेकिन अंदर कोई हरकत नही थी. वह घरके पिछवाडे पहूंच गया. पिछेका दरवाजा खुला था. जॉनने फिरसे अॅलेक्सको उसके खुले दरवाजेसे आवाज दिया. तोभी कोई प्रतिक्रिया नही थी. आवाज सिर्फ घरमें गुंजा. अंदर अंधेरा छाया हूवा था. जॉन धीरे धीर अंदर जाने लगा. अब जॉनके दिमागमें अलग अलग भले बुरे खयाल आने लगे थे...
क्या हूवा होगा?...
कुछ अघटीत तो नही घटा?...
उसके सांसोंकी गती विचलित होने लगी थी. अपने आप उसका हाथ उसकी कमरमे लगाए बंदूककी तरफ गया. उसने बंदूक निकाली और बंदूक ताने वह सावधानीसे अंदर जाने लगा. घरमें सब चिजें इधर उधर फैली हूई थी.
वैसेभी अॅलेक्सको चिजें ठिकठाक रखनेकी आदत नही थी....
कभी गुस्सा कर कभी प्यारसे समझाकर उसकी पत्नी उसे चिजे ठिक ढंगसे रखनेकी आदत डालनेका प्रयास करती थी...
लेकिन जबसे अॅलेक्सकी पत्नी गई तबसे घर की जानही चली गई थी. ...
बेडरूममें जातेही जॉनका दिल जोर जोरसे धडकने लगा. बेडरूममें अॅलेक्स बेडपर गिरा हूवा था. जल्दीसे जॉन उसके पास गया.
" अलेक्स..." उसने उसे हिलाकर देखा.
शरीरमें कोई हरकत नही थी. उसने उसकी नब्ज टटोलकर देखी. उसकी नब्ज कबकी बंद हो चूकी थी. जॉनने झटसे अपना मोबाईल निकालनेके लिए जेबमें हाथ डाला. लेकिन व्हायब्रेट होता हूवा मोबाईल उसके हाथमें आया. उसने मोबाईलके डिस्प्लेकी तरफ देखा. वह उसका साथी सॅमका था.
उसने मोबाईल का एक बटन दबाकर उसे अटेंड किया.
" हं सॅम"
"सर एक बुरी खबर है... सर खुनीने चौथा खूनभी किया है... " उधरसे सॅमने कहा.
" क्या ?" जॉनके मुंह से अनायास निकल गया.
" नियोल वॅग्नर .. नॉर्थ स्ट्रीट, 2024.... उसका भी उसी तरहसे खुन हो चूका है.." सॅमने जानकारी दी.
क्रमश:...
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Wednesday, February 20, 2008
Ch-40: डिटेक्टीव ऍलेक्स (शून्य-उपन्यास)
Posted by
Sunil Doiphode
at
9:49 AM
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