आधी रात बित चूकी थी. बाहर आकाशमें पूर्णीमा का चांद अपनी सफेद रोशनी सब तरफ फैला रहा था. बहते पाणी की मधूर आवाज और चांद का धूसर प्रकाश कॉटेजमें आ रहा था. दोनो बेडपर लेटे हूए थे और जॉनकी उंगलीयां अँजेनीके मुलायम जिस्मसे खेल रही थी. उसका हाथ जिस्मसे खेलते खेलते धीरे धीरे निचे सरकने लगा.
" अंगुठी लानेकी इतनी क्या जल्दी थी. ? " अँजेनीने एक मंद मुस्कान देते हूए उसके निचे खिसकते हूए हाथको अपने हाथमें पकडते हूए कहा.
" जानेवाले वक्तको तो मै रोक नही सकता लेकिन वह वक्त व्यर्थ ना जाए इसका खयाल मुझे रखनाही चाहिए." उसे बाहोंमे भरकर कसकर पकडते उसने कहा.
" अच्छा" उसने शरारतभरी हंसी बिखेरते हूए उसे दूर धकेला.
वह उसे फिरसे पकडनेके लिए लपका. वह उसके शिकंजेसे बचनेके लिए बेडसे निचे उतर गइ. जॉनभी अब उसे पकडनेके तडपने लगा. वह इधर दौडते हूए उसके पहूंचसे दूर दूर भाग रही थी. अब जॉनभी जिदपर अड गया. वहभी बेडसे निचे उतरते हूए उसके पिछे लपका. वह खिलखिलाती हूए सिढीयोंकी तरफ लपकी. वह भी उसका पिछा करने लगा.
सिढीयोंसे दौडते हूए आखीर अँजेनी टेरेसपर आकर पहूंची. जॉनभी उसके पिछे पिछे टेरेसपर पहूंचा. उपर टेरेसपर खुला आकाश, आसमानमें चमकती चांदनी और चांद की दूधसी सफेद रोशनी बहुत आकर्षक लग रही थी. और उपरसे चांदके रोशनीमें चमकता हूवा बहता पाणीभी दिख रहा था. वह उस चमकते बहते पाणीकी तरफ देखकर मानो खो सी गई.
" देखो देखो कितना सुंदर दिख रहा है वह चमकता पाणी " उसने कहा.
तबतक जॉनने पिछेसे आकर उसे अपनी बाहोंमे भर लिया था.
" लेकिन इस चांदकी रोशनीमें चमकते तुम्हारे चेहरेसे यकिनन सुंदर नही . " उसने कहा.
वह उसकी खुली लंबी, गोरी गोरी गर्दनके साथ अपने व्याकुल होठोंसे खेलने लगा.
उसका जिस्मभी अब तपने लगा था.
जॉनने उसे पलटाकर उसका चेहरा अपने चेहरेके सामने लाया और अपनी पकड और मजबुत करते हूए अपने गरम होंठ उसके होठोंपर रख दिए.
वहभी अब उसे आवेगके साथ प्रतिसाद देने लगी .
उसने उसके पिठको ढंके हूए उसके लंबे घने बालोको एक हाथसे बाजू हटाया और वह उसके टॉपकी पिठपर बंधी हूई लेस छोडने लगा.
अँजेनी उसके सिनेके बालोंसे खेलते हूए उसके शर्टके बटन निकालने लगी.
अब उन्हे एकदुसरेंके सांसमे भरी आर्द्रता और गर्मी महसूस हो रही थी.
" जॉन आय लव्ह यू व्हेरी मच" उसके मुंहसे अपनेआप निकल गया.
" आय टू" बोलते हूए उसने उसे टेरेसके खुले फ्लोवरपर अपने और उसके निकाले हूए कपडोका बिस्तर बनाकर धीरेसे फुलोजैसी नाजूकताके साथ उसपर लिटाया.
अब दोनोभी खुले टेरेसपर बिलकुल विवस्त्र होकर आवेगके साथ एकदूसरेसे लिपट गए थे.
चांदके सफेद रोशनीमें , बहते पाणीके मधूर संगीतमें, एकदुसरेकी उत्कट भावनावोंको प्रतिसाद देते हूए उस अंधेरी रातमें वे अपने मधूर मिलनमें प्यारसे धीरे धीर रंग भरने लगे.
क्रमश:..
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उपन्यास - अद्-भूत (संपूर्ण) The horror, suspense, thriller online Hindi Novel based on my english screenplay 'Latched' registered with FWA. आप यह उपन्यास अपने दोस्तोंको ईमेलभी कर सकते है. |
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Saturday, February 16, 2008
Ch-37: चांदनी रात (शून्य-उपन्यास)
Posted by
Sunil Doiphode
at
11:23 AM
Labels: Hindi Home, Hindi Portal, shabdkosh, हिन्दी खोज, हिन्दी पुस्तकें
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