कमांड2ने अपनी जगह बदली थी. वह अपने नए अड्डेमें तहखानेमें कॉम्प्यूटरके सामने बैठा हूवा था. उसका चेहरा अभीभी खुशीसे दमक रहा था.
कमांड1को मारनेके बाद अपना आगेका रास्ता आसान होगया...
वह सोच रहा था. वह देखनेमेतो कॉम्प्यूटरपर मेल चेक कर रहा था लेकिन उसके दिमागमे और ही कुछ चल रहा था. इतनेमे उसका मोबाईल बजा. उसने मोबाईलपर नंबर देखा. लेकिन मोबाईलके डिस्प्लेपर कुछभी नंबर नही आया था.
किसका फोन होगा ?...
पुलिस तो नही होगी?...
उसने मोबाईलका एक बटन दबाकर मोबाईल कानको लगाया,
" हॅलो " टर्राए हूए स्वरमें वह बोला.
उधरसे कुछभी आवाज नही आ रहा था. सिर्फ 'घरघर' ऐसा किसी चिजका आवाज आ रहा था.
" हॅलो... कौन बोल रहा है ? " उसका आवाज अब सौम्य हूवा था.
" बॉस, मै बॉस बोल रहा हूं " उधरसे आवाज आया.
" बॉस? यस बॉस " कमांड2 खुदको नार्मल रखनेकी कोशीश करते हूए बोला.
" कमांड1का पता चला मुझे" बॉसने कहा.
" हां सर, बहूत बुरा हुवा " कमांड2 सिचूएशनको समझनेकी कोशीश करते हूए बोला.
" किसने मारा उसे " बॉसने पुछा.
" मारा ? मुझे तो लगा वह उपरसे निचे गिर गया होगा. " कमांड2ने मासूमियतसे कहा.
" लगा ? मतलब ? तूम नही थे उसके साथ? " बॉसने आश्चर्यसे पुछा.
" नही सर, मै नही था. आपने दिए वक्तसे एक दिन पहले और वह भी बुरे वक्तमें वह जा रहा था इसलिए मै नही गया उसके साथ. वह बोल रहा था की एक बार मुझे आजमाकर देखना है की बॉसका कहां कहातक बराबर आता है. " कमांड2 बोल रहा था.
" फिर देखा ? देखनेके लिए जिंदा भी रहना पडता है... मूरख! मुफ्तमे अपनी जान गवा बैठा. जहरका इम्तेहान लेने निकलाथा बेवकुफ. " बॉस गुस्सेसे बोल रहा था.
" फिर पुलिसको किसने बताया ? और इतने जल्दी पुलिस कैसे क्या आगई वहा? " बॉसने आगे पुछा.
" बॉस उसनेही बताया होगा. उसने पिछले बारभी पुलिसको बतानेकी जरा जल्दीही की थी. " कमांड2ने कहा.
थोडी देर उधरसे कुछभी आवाज नही आया. सिर्फ किसी चिजका घरघर आवाज आ रहा था.
" तूमने अपनी जगह बदली यह बहुत अच्छा किया. " बॉस ने कहा.
" हा सर, मुझे अंदाजा था की कमांड1की पहचान होनेके बाद पुलिस उसके घरपर रेड करेगी करके. "
" कमसे कम अब उससे सबक लो और आगे ऐसी बेवकुफी मत करो. अभी और अपना बहुत सारा काम बाकी है. " बॉस उसे हिदायत देते हूए बोला.
" हां सर " कमांड2ने अदबसे कहा.
उधरसे फोन कट हूवा.
क्रमश:...
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Monday, February 4, 2008
Ch-29: बॉसका फोन (शून्य-उपन्यास)
Posted by
Sunil Doiphode
at
9:39 AM
Labels: black and white, bombay to gangtok, chitrapat, chitrapat geete, chitrapatgeete, dharm, dharma, hindi awards, hindi cine awards, hindi movies, hindi oscar, hindi screenplay, jodha akbar, vidhu vinod
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