तेजीसे सब कुछ निपटाकर कमांड1 फ्लॅटके दरवाजेसे दौडकर लिफ्टके पास गया. थोडीही देर पहले उसे सायरनका आवाज बिल्डीग के निचे आकर बंद हूवा ऐसा महसूस हूवा था. उसने लिफ्टके डिस्प्लेपर देखा. लिफ्ट उपर आ रही थी. वह घबरा गया.
कही पुलिस बिल्डींगमें तो नही आए ?..
और शायद वह उपर ही आ रहे थे ...
उसके चेहरेपर अब डर झलकने लगा था. क्या करे कुछ सुझ नही रहा था. उसने इस डरे हूए हालतेमेंभी तेजीसे फैसला लिया और वह सिढीयोंसे उपरकी तरफ दौडने लगा. थोडी देरमें उसके खयालमें आया की दौडते हूए उसके जुतोंका आवाज हो रहा है. उसने अपने जूते निकालकर वही छोड दिए और वह वैसेही उपर तेजीसे दौडने लगा. दौडते हूए निचे क्या हो रहा होगा इसकी तरफ भी उसका ध्यान था. आखीर वह बिल्डींगके टेरेसपर आकर पहूंच गया. टेरेसपर उसने इधर उधर देखा. उपर चमचमाते चांदनीसे भरा आकाश और आजूबाजू चमचमाते इलेक्ट्रीक लाईटसे भरा शहर. दौडनेके वजह से वह हांफ रहा था और उसे पसीना आया था. उपर ठंडी हवा चल रही थी. पसिनेसे सने उसके गरम शरीर को वह ठंडक पहूचा रही थी. उसे थोडी राहतसी महसुस हूई. लेकिन रुकनेके लिए वक्त कहां था? बिल्डींगके सामनेकी तरफ उसने झांककर देखा. बिल्डींगके सामने पुलिसकी गाडी खडी थी. गाडीके पास तीन हथीयारोंसे लेस पुलिस खडे थे. उसे एक समझमें नही आ रहा था की -
खुनके बारेमें पुलिस को पता कैसे चला ?...
ऐसाभी हो सकता है की वे दुसरेही किसी जुर्मके सिलसिलेमें वे वहां आये हों...
लेकिन वह अगर दूसरे किसी अपराधके सिलसिलेमें यहां आए होंगे और ऐसेमे अगर मै पकडा गया तो वह एक घोर इत्तेफाक ही कहना पडेगा...
लेकिन उसे पुरा भरोसा था की बॉसने दिए वक्तमें ऐसी अनहोनी नही होनी थी. अबतक ऐसा कभी नही हूवा था..
अब यहांसे कैसे खिसका जाए?...
वह सोचने लगा.
एक बात पक्की थी की बिल्डींगके सामनेसे खिसकना लगभग नामुमकीन था...
दुसरा कोई विकल्प ढूंढनेके लिए वह इधर उधर देखने लगा. बिल्डींगके दाए बायेंसेभी निकलना मुमकीन नही था. एक तो उतरनेको कुछ नही था और किसी तरह उतरो तो पुलिसके सामनेसेही जाना पड सकता था. फिर कमांड1 धीरे धीरे बिल्डींगके पिछले हिस्सेमें आकर वहांसे निकलनेके बारेंमे ताकझाक करने लगा. पिछे उतरनेको पाईप थे. वह देखकर उसके जानमें जान आ गई. लेकिन पिछे दुसरे एक बिल्डींगपर लगे सोडीयम लँपकी रोशनी पड रही थी. इसलिए उतरते वक्त किसीके नजरमें आना मुमकीन था. वह और कुछ विकल्प है क्या इसके बारेंमें सोचने लगा. उसके पास जादा वक्त नही था.
अगर गलतीसेभी पुलीस यहा टेरेसपर आ गई तो ?...
तो वह अपने आप ही उनके कब्जेमें आनेवाला था....
उसने बिल्डींगका पिछला हिस्सा निचे उतरनेके हिसाबसे और एकबार ठिक ढंगसे देखने का फैसाला किया. इसलिए वह पिछे के तरफ की पॅराफिट वॉलपर चढ गया. पाईप उपरसे निचे जमीनतक थे. शायद ड्रेनेज पाईप थे. पाईपपर जगह जगह किले लगाए हूए थे इसलिए उतरने के लिए पकडना आसान था. अचानक उसके खयालमें आया की उसके पिछे टेरेसपर कुछ हरकत हूई है. जबतक वह पलटकर देखता एक काला साया उसपर झपट पडा और उसने पुरा जोर लगाकर कमांड1को टेरेसके निचे धकेला. इस अचानक हूए हमलेसे कमांड1 गडबडा गया. उसे खुदको संभालनेकाभी वक्त नही मिला. वह बिल्डींगसे निचे गिरने लगा. गिरते वक्त उसका चेहरा उपर टेरेसकी तरफही था. वह काला साया टेरेससे झुककर उसे निचे गिरता हूवा देख रहा था. पिछेसे आ रहे सोडीयम लॅंप के रोशनीमें उसे उस काले साएका चेहरा दिखाई दिया. वह उस चेहरेकी तरफ आंखे फाडफाडकर देखने लगा. इधर निचे गिरकर मरनेका डर और सामने उस काले साए का चेहरा देखकर उसके डरमें और आश्चर्यमें जैसे औरही इजाफा हो रहा था.
वह चेहरा कमांड2का था ...
उसे विश्वासही नही हो रहा था....
उसने एकबार फिरसे तसल्ली कर ली.
हां वह चेहरा, उसका दोस्त जिसपर उसने पुरी तरहसे भरोसा किया था उस कमांड2काही था...
लेकिन उसने ऐसा क्यों किया ?...
वह उस सवालपर सोचकर कुछ नतिजेतक पहूंचनेके पहलेही वह निचे फर्शपर गिर गया. लगभग 15-16 माले उपरसे निचे गिरकर उसके सरके टूकडे टूकडे हूए थे और तत्काल उसकी जान चली गई थी. इधर उपर उसे निचे गिरते हूए देख रहे कमांड2के चेहरेपर एक गुढ मुस्कुराहट बिखेर गई.
क्रमश:...








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