कमांड1 काम्प्यूटरपर कुछतो कर रहा था. कमांड2 उसके बगलमें हाथमें व्हिस्कीका ग्लास लेकर शानसे बैठा था.
'" सालेको कुचलना चाहिए था '" कमांड2 अपना व्हिस्कीका ग्लास एकही घुंटमें खाली करते हूए बोला.
" अरे नही ... उसे जिंदा रखना बहुत जरुरी है '" कमांड1 काम्प्यूटरपर तेजीसे कमांडस् टाईप करते हूए बोला.
उतनेमें बगलमें रखे फोनकी घंटी बजी.
कमांड1 ने फोन उठाया.
काम्प्यूटर का काम जारी रखते हूए वह फोनपर बोला,
" हॅलो"
उधरसे कुछभी जबाब नही आया.
" हॅलो ... कौन बात कर रहा है ?"
कमांड1ने फोनके डिस्प्लेपर उधरके फोनका नंबर देखा. डिस्प्लेपर कोई नंबर नही था. कोई नंबर नही देखकर कमांड1 सोच मे पड गया.
उसने अपना काम्प्यूटरका काम छोडकर फिरसे फोनमें कहा-
" हॅलो..."
" मै बॉस बोल रहा हूं " कमांड1को बिचमेंही काटते हूए उधर से आवाज आया.
"ब.. ब... बबॉस ? ... यस बॉस " कमांड1के मुंह से मुश्कीलसे निकल गया.
कमांड1 झटसे कुर्सीसे उठकर खडा हूवा था. उसके हाथ कांपने लगे थे. उसके पुरे चेहरेपर पसीनेकी बुंदे झलक रही थी. एक छोटी पसीनेकी लकीर कानके पिछेसे बहते हूए निचे आ गई.
कमांड2 को आश्चर्य होने लगा था.
कमांड2ने कमांड1को इतना घबराये हूए पहले कभी नही देखा था.
कमांड1की यह स्थिती देखकर कमांड2नेभी अपना व्हिस्कीका ग्लास बाजूमें रख दिया और वह भी कुर्सीसे उठ खडा हूवा.
बॉसने इसके पहले कभीभी फोन लगाया ऐसा उसने कभी सुना नही था.
बॉस उसके सब आदेश इंटरनेटके द्वाराही देता था.
फिर अचानक फोन करनेकी ऐसी कौनसी जरुरत आन पडी?
" तुम्हे जॉनको धडकानेकी बद्तमीजी करनेको किसने कहा था ?" उधरसे कडा और गंभीर आवाज आया.
आवाज किसी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणसे आये जैसा लग रहा था.
"बबबॉस ... हमने उसे जानसे मारने के उद्देशसे धडकाया नही था. '" कमांड1 अपनी सफाई देनेकी कोशीश कर रहा था.
" चूप. मूरख .... तुम्हे पता है ... खुदकी मनमानी करनेवालोंको इस संस्था कोई स्थान नही " उधरसे बॉसका झल्लाया हूवा स्वर आया.
" स सॉरी बॉस... गलती हूई .... फिरसे नही होगी ऐसी गलती... " कमांड1 फिरसे क्षमायाचना करने लगा.
" तुम्हे पता है?... तुम्हारी तकदीर अच्छी थी की वह क्षण तुम्हारे लिए अच्छा था ...इसलिए तुम लोग बच गए... तुम लोग अगर 45 मिनट इधर या 45 मिनट उधर होते तो तुम्हे उस वक्त कोईभी बचा नही सकता था. '" बॉसका कडा स्वर कमांड1के कानमें घुमा.
अब कमांड2 कमाड1के पास जाकर फोनके स्पीकरके पास अपना सर घुसाकर बॉस क्या बोल रहा है यह सुननेका प्रयास करने लगा था. .
" आय अॅम रिअली सॉरी बॉस " कमांड1 फिरसे माफी मांगने लगा.
" यह तुम्हारी पहली गलती... और यह गलती तुम्हारी आखरी गलती रहनी चाहिए ... समझे? '" उधरसे बॉसने ताकीद दी.
"हां सर; यस...."
कमांड1 अपना बोलना खतम करनेके पहलेही उधरसे बॉसने धडामसे फोन रख दिया.
कमांड1ने अपने चेहरेका पसीना पोछते हूए फोन क्रेडलपर रख दिया. वह अपने चेहरेके डर के भाव छिपानेकी कोशीश करने लगा.
" बॉसको अच्छा नही लगा ऐसा लग रहा है...'" कमांड2ने कहा.
" हमने अपनी मनमानी नही करनी चाहिए थी " कमांड1ने कहा.
" जो हूवा सो हूवा ... फिरसे ध्यान रखेंगे..." कमांड2ने उसे दिलासा देने की कोशीश करते हूए कहा.
" यह बॉसका पहली बार फोन आया... उसका फोन आया तभी मुझे संदेह हूवा था की कुछ सिरीयस हूवा है... " कमांड1 ने अपना व्हिस्कीका ग्लास भरते हूए कहा.
कमांड2नेभी अपने बगलमें रखा व्हिस्कीका ग्लास उठाया और वह कमांड1के सामने बैठ गया. कमांड1ने गटागट व्हिस्कीके घुंटके साथ अपना अपमान पिनेकी कोशीश की.
... to be contd..
|
उपन्यास - अद्-भूत (संपूर्ण) The horror, suspense, thriller online Hindi Novel based on my english screenplay 'Latched' registered with FWA. आप यह उपन्यास अपने दोस्तोंको ईमेलभी कर सकते है. |
|
उपन्यास - शून्य (संपूर्ण) The suspense, thriller online Hindi Novel based on my published book. You can also Email this Hindi Novel to your friends! |
|
|
Thursday, January 17, 2008
Ch-17: बॉसका फोन ... (शून्य-उपन्यास)
Posted by
Sunil Doiphode
at
9:50 AM
Labels: bihar, hindi bhasha pradesh, hindi dohe, hindi kitab, hindi kitaben, hindi pradesh, hindi speaking people, hindi speaking pradesh, jharkhand, kitabghar, madhaya pradesh, uttar pradesh, uttaranchal
Subscribe to:
Post Comments (Atom)





0 comments:
Post a Comment